पंडित रघु झा से मिली थी संगीत की प्रारंभिक शिक्षा : शारदा सिन्हा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 15 Mar 2016 7:50 AM
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सुपौल : अपने पैतृक जिला व भूमि पर आना और कार्यक्रम प्रस्तुत करना अविस्मरणीय पल है़ मौके का गांव व गलियां आज भी सुखद एहसास कराती है़ यह बाते देश की सुप्रसिद्ध लोक गायिका पदम् श्री शारदा सिन्हा ने जिला मुख्यालय स्थित किसान भवन में सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कही. जिले की […]
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सुपौल : अपने पैतृक जिला व भूमि पर आना और कार्यक्रम प्रस्तुत करना अविस्मरणीय पल है़ मौके का गांव व गलियां आज भी सुखद एहसास कराती है़ यह बाते देश की सुप्रसिद्ध लोक गायिका पदम् श्री शारदा सिन्हा ने जिला मुख्यालय स्थित किसान भवन में सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कही.
जिले की बेटी श्री मती सिन्हा ने कहा कि राघोपुर प्रखंड अंतर्गत हुलास गांव स्थित मैके व सुपौल की यादें उनकी स्मृति में हमेशा ताजा रहती है़ यह अलग बात है कि 31 वर्ष बाद सुपौल आने का सौभाग्य मिला है़ इससे पूर्व 1985 ई0 में बरूआरी आने का मौका मिला था़ श्री मती सिन्हा ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुलास व स्थानीय विलियम्स स्कूल में ही हुआ था़
वहीं संगीत की प्रशिक्षण उन्हें महान संगीतज्ञ पंडित रघु झा से मिली़ जो उस समय में विलियम्य स्कूल में ही संगीत शिक्षक पद पर पदस्थापित थे़ हलांकि इससे पूर्व बचपन में पैतृक गांव हुलास में पंडित रामचन्द्र झा ने उन्हें संगीत की प्रारंभिक शिक्षा दी थी़
लेकिन पंडित रघु झा के सानिध्य ने उन्हे संगीत की ऊंचाई प्रदान की़ पंडित युगेश्वर झा तब तबले पर उनका संगत करते थे़ तब शिक्षा विभाग के सचिव पद से सेवानृवित उनके पिता सुखदेव ठाकुर लोगों के अनुरोध पर स्कूल के प्रचार्य पद पर आसीन थे़
करीब 1000 से अधिक गीत गा चुकी श्री मती सिन्हा ने अपने यादगार पलों को साझा करते बताया कि ससुर की कमाई दिहले… उनकी पहली गीत थी़ बताया कि राजश्री प्रोडक्सन के मालिक ताराचन्द बड़जात्या ने जब मौका दिया तो असद भोपाली के लिखे गीत- कहे तो से सैयां… की रिकाडिंग यादगार पल था़ दरअसल एच एम वी में सबका उनका ट्रिब्यूट विद्यापति श्रद्धांजलि आई थी तो बड़जात्या जी को पसंद आया था़ इसमें मुरली मनोहर स्वरूप जी का संगीत एवं पंडित नरेन्द्र शर्मा की हिन्दी कमेंटरी थी, ताकि हिन्दी भाषी क्षेत्र में महाकवि कालीदास को लोग समझ पायें.
उन्होंने मैंने प्यार किया फिल्म में गायें थीम सांग को भी याद किया़ श्री मती सिन्हा ने लोक गायिकी के प्रति अपने झुकाव के संबंध में बताया कि लोक गीत भारत की परंपरा व धरोहर है़ बताया कि देश के साथ ही विदेशों में भी उनके लोक गीतों को पसंद किया जाता है़ कहा कि जमाना बदला है़ बेटियां अब सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है बताया कि संगीत की दिशा में उन्हें पिता का आशीर्वाद मिला़ शादी के बाद पति ने भी भरपूर सहयोग किया़ लेकिन उस जमानें में ससुराल पक्ष खासकर सास का विरोध था कि घर की औरत कैसे स्टेज पर गायेगी़ लेकिन बाद में लोगों ने जब उन्हें मेरे गाये गीत जगदम्बा घर में दियरा बायर ऐली हे…
जैसे गीत सुनाये तो फिर मेरी सास मान गयी़ अब तो उनके पुत्र अंशुमान व पुत्री वंदना भी संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे है़ वंदना ने मिथिला मखान नामक फिल्म में गाया भी है़ अंशुमान भी संगीत से पीएचडी कर रहे है़ उन्होंने महिलाओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि अगर आप ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं है़ नारी सशक्ति करण के सवाल पर कहा कि आज बराबरी की बात होती है़ महिलाओं को सामान अधिकार मिलना भी चाहिए़ लेकिन उन्हें मर्यादा का भी ख्याल रखना आवश्यक है़
क्योंकि मर्यादा की अपनी खुबसुरती होती है़ गौरतलब है कि श्री मती सिन्हा सोमवार को जिला स्थापाना दिवस समारोह के अवसर पर गांधी मैदान में अपना गायन प्रस्तुत करेंगी़
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