हालात . वाहनों में भेड़, बकरी की तरह ठूंसे जाते हैं यात्री, अधिकारी बेखबर

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Feb 2016 4:59 AM

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सुपौल : ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर के तहत निर्मित एनएच 57 हो अथवा जिले की अन्य सड़कें परिवहन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण इन सड़कों पर फर्राटे भर रहे वाहनों के ओवर लोडिंग पर विराम नहीं लग पा रहा है़ सवारी वाहन के चालक यात्रियों को वाहन में भेड़-बकरियों की तरह ठूंस कर वाहनों का […]

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सुपौल : ईस्ट-वेस्ट कॉरीडोर के तहत निर्मित एनएच 57 हो अथवा जिले की अन्य सड़कें परिवहन विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के कारण इन सड़कों पर फर्राटे भर रहे वाहनों के ओवर लोडिंग पर विराम नहीं लग पा रहा है़ सवारी वाहन के चालक यात्रियों को वाहन में भेड़-बकरियों की तरह ठूंस कर वाहनों का परिचालन कर रहे है़ं स्थिति यह है कि बड़े वाहनों की बात कौन कहे, ऑटो में भी करीब एक दर्जन से अधिक यात्रियों को बिठा कर चालक चलते है़ं

सबसे दिलचस्प बात यह है कि बिहार राज्य पथ परिवहन द्वारा सहरसा से सुपौल के रास्ते दरभंगा एवं मुजफ्फरपुर तक संचालित बस में भी क्षमता से अधिक यात्रियों को चढ़ा कर ढोया जा रहा है़ स्थिति यह है कि यात्री बस के ऊपर बैठ जान जोखिम में डाल कर यात्रा कर रहे है़ं

दुर्घटना का कारण है ओवरलोडिंग
जिले की चकाचक सड़कों पर आये दिन दुर्घटनाएं घटित होती रहती है़ं ऐसा कोई भी दिन नहीं बीतता जिस दिन जिले की सड़कों पर लोग दुर्घटना का शिकार नहीं होते़ बावजूद परिवहन विभाग के अधिकारी लोगों को इस समस्या से निजात दिलाने में असफल साबित हो रहे हैं. प्रति दिन घटित होने वाले इन दुर्घटनाओं की मुख्य वजह वाहनों पर क्षमता से अधिक यात्रियों को बिठा कर सफर करवाना बताया जाता है, लेकिन प्रशासनिक उदासीनता की वजह से ओवरलोडिंग पर विराम लगने की बजाय दिन ब दिन इसमें वृद्धि ही होती जा रही है़
लोगों को भी होना होगा जागरूक
परिवहन विभाग की उदासीनता के बीच दुर्घटनाओं से बचने के लिए यात्रियों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है़ जल्दी अपने गंतव्य तक पहुंचने के चक्कर में पूर्व से खचाखच भरे वाहनों पर यात्रा करने वाले यात्री गंतव्य तक तो नहीं पहुंच पाते, उन्हें लोगों द्वारा अस्पताल पहुंचाया जाता है़ हाल के दिनों में सरकार के निर्देश पर परिवहन विभाग द्वारा जागरूकता अभियान भी चलाया गया़ नुक्कड़ नाटक आदि के माध्यम से लोगों को परिवहन नियमों की जानकारी दी गयी, लेकिन लोग सब कुछ जानते हुए भी अपनी जान को जोखिम में डाल कर यात्रा करते है़ं इस पर प्रशासन एवं पुलिस द्वारा किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जाती है़
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