संयम की चेतना का विकास करें

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संयम की चेतना का विकास करेंनशा मुक्त समाज के निर्माण में एक दूसरे का करें सहयोग : आचार्य महाश्रमण जीआचार्य जी ने सैकड़ों अनुयायियों का पघलिया कराया फोटो- 2,3 व4कैप्सन – प्रवचन देते आचार्य, उपस्थित श्रद्धालु व आयोजन स्थल पर बना भव्य द्वार प्रतिनिधि, सुपौलबबुजन बालिका उच्च विद्यालय में दो दिवसीय प्रवचन सभा का समापन […]

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संयम की चेतना का विकास करेंनशा मुक्त समाज के निर्माण में एक दूसरे का करें सहयोग : आचार्य महाश्रमण जीआचार्य जी ने सैकड़ों अनुयायियों का पघलिया कराया फोटो- 2,3 व4कैप्सन – प्रवचन देते आचार्य, उपस्थित श्रद्धालु व आयोजन स्थल पर बना भव्य द्वार प्रतिनिधि, सुपौलबबुजन बालिका उच्च विद्यालय में दो दिवसीय प्रवचन सभा का समापन मंगलवार को किया गया. प्रवचन कथा से पूर्व सुबह के सत्र में तेरा पंथ सभा के 11 वें आचार्य महाश्रमण जी महाराज सहित अन्य धवल सेना व साधु संतों ने मुख्यालय भ्रमण किया. इस दौरान आचार्य जी ने दर्जनों घरों में पहुंच कर सैकड़ों अनुयायियों का पघलिया कराया. भ्रमण के दौरान अहिंसा यात्रा के उद्देश्य का संदेश आचार्य जी ने प्रकट किया. पघलिया के दौरान अनुयायियों में उत्साह का माहौल बना रहा. अनुयायियों ने आचार्य जी का अभिवादन कर आशीर्वाद प्राप्त किया. बीमारियों का जड़ है नशा आचार्य जी ने प्रवचन के दौरान कहा कि नशा शारीरिक व मानसिक बीमारियों की जड़ है. बताया कि आज कल नशे की प्रवृत्ति काफी व्यापक रूप ले चुकी है. आचार्य जी ने बताया कि प्राणी अपनी स्वेच्छा से नशा सेवन का परित्याग करने के लिए प्रेरित हो. उन्होंने बताया कि नशा मुक्त समाज की परिकल्पना को साकार करने में एक दूसरे के सहयोग की आवश्यकता है. बताया कि आपसी सहयोग से ही स्वस्थ समाज का निर्माण संभव हो पायेगा. बताया कि नशे के कारण कई प्रकार के नुकसान होने की आशंका है. उन्होंने चेतना की शुद्धि का अभाव को नशे का मुख्य कारण गिनाया. कहा कि मनुष्यों को चाहिए कि वह नशे की आसक्ति से मुक्त रहें और संयम की चेतना का विकास करे.नैतिक पालन से ही जीवन होगा सार्थक आचार्य महाश्रमण जी ने बताया कि प्राणियों को अपने जीवन पर्यंत यथा संभव नैतिकता का पालन करना चाहिए. नैतिकता के पालन से ही हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं. उन्हांेने उपस्थित अनुयायियों के बीच सदभावना पर चर्चा करते हुए बताया कि प्राणियों को एक दूसरे के प्रति, समाज के प्रति सदभाव पूर्ण व्यवहार रखना चाहिए. बताया कि परिवार क सदस्यों पड़ोसियों, मित्र- संबंधी से अगर आप व्यापारी हैं तो ग्राहक से, यदि शिक्षक हैं तो छात्रों से या फिर अधिकारी हैं तो कर्मचारियों से सदैव सदभावना पूर्ण व्यवहार किया जाना ही उद्देश्य होना चाहिए. नशा है जीवन के पतन का कारण आचार्य जी ने बताया कि प्राणियों के जीवन के पतन का मुख्य कारण नशा है. कहा कि वर्तमान दौर में अनेक प्रकार के नशीले पदार्थ धड़ल्ले से उपलब्ध है. जिसके कारण कई लोग इसके गिरफ्त में आ जाते हैं. बताया कि कई प्राणी नशा के गिरफ्त में आने के बाद उसे छोड़ नहीं पा रहे हैं. बताया कि अहिंसा यात्रा में नशा मुक्ति को लेकर प्रयास जारी है. उन्होंने अनुयायियों से कहा कि आप स्वयं को नशा मुक्त होने का संकल्प ले. साथ ही अपने परिवारों को भी नशा मुक्त बनाने का प्रयास करे. तभी यह कार्य अपने आप में ठोस व उपयोगिता पूर्ण हो सकेगा. 900 मरीजों को नि:शुल्क चिकित्सा आचार्य महाश्रमण जी के आगमन पर जैन श्वेतांबर तेरा पथ सभा के सौजन्य से तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा संचालित आचार्य तुलसी महा प्रज्ञ चल चिकित्सालय द्वारा स्थानीय गांधी मैदान तीन दिवसीय नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया. जहां नौ सौ मरीजों का विशेषज्ञों द्वारा स्वास्थ्य जांच किया गया. साथ ही संबंधित मरीजों को मुफ्त दवा व चश्मा सहित अन्य चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराया गया. तीन दिवसीय शिविर के आयोजन में बाबू लाल डोसी, रौशन लाल लोढ़ा, चौघडि़या परिवार, शंभु कुमार जैन का सराहनीय योगदान रहा. साथ ही आयोजित कार्यक्रम में उमेद जैन, अनिल जैन, जितेंद्र जैन, रवि कुमार जैन आदि का सराहनीय योगदान रहा.

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