प्रभात अभियान -04, बदहाल रेल- यात्री परेशान

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प्रभात अभियान -04, बदहाल रेल- यात्री परेशान फोटो – 1कैप्सन – बंद पड़ा आरक्षण टिकट काउंटर प्रतिनिधि, सुपौलसुपौल रेलवे स्टेशन पर जहां यात्री सुविधा का घोर अभाव है, वहीं रिजर्वेशन काउंटर की समुचित सुविधा की कमी का खामियाजा रेल यात्रियों को उठानी पड़ती है. स्टेशन पर मौजूद एक मात्र रिजर्वेशन काउंटर, सीमित सेवा अवधि तथा […]

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प्रभात अभियान -04, बदहाल रेल- यात्री परेशान फोटो – 1कैप्सन – बंद पड़ा आरक्षण टिकट काउंटर प्रतिनिधि, सुपौलसुपौल रेलवे स्टेशन पर जहां यात्री सुविधा का घोर अभाव है, वहीं रिजर्वेशन काउंटर की समुचित सुविधा की कमी का खामियाजा रेल यात्रियों को उठानी पड़ती है. स्टेशन पर मौजूद एक मात्र रिजर्वेशन काउंटर, सीमित सेवा अवधि तथा रविवार को आरक्षण काउंटर बंद रहने से यात्रियों की समस्या और भी अधिक जटिल हो जाती है. दूरगामी ट्रेनों के लिए टिकट पाना यात्रियों के लिए यहां हमेशा टेढ़ी खीर साबित होता है. आलम यह है कि टिकट के लिए बेकरार यात्री कई दिनों तक यहां मशक्कत करते नजर आते हैं. बावजूद कुछ भाग्यशाली लोगों को ही गंतव्य के लिए टिकट उपलब्ध हो पाता है. दशहारा, दीवाली व छठ जैसे महापर्व के मौके पर त्योहार में घर आने व जाने वालों की भीड़ उमड़ती है. स्वाभाविक तौर पर इन दिनों टिकट के लिए लंबी कतार लगती है. यह दीगर बात है कि कोशिश में विफल यात्री या तो सहरसा स्टेशन का रुख करते हैं या फिर बिचौलियों के शिकार हो जाते हैं. इन सब के बीच रेल विभाग सुपौल रेलवे स्टेशन व यात्रियों के प्रति उदासीन बना हुआ है. इसके कारण लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है.छह घंटे ही खुलता है आरक्षण काउंटर जिला मुख्यालय का रेलवे स्टेशन होने के बावजूद यहां आरक्षण काउंटर मात्र छह घंटे तक ही खुलता है. करीब एक लाख की आबादी वाले इस शहर में सुबह 08:00 बजे से अपराह्न 02:00 बजे तक खुलने वाले आरक्षण काउंटर से टिकट पाना आसान नहीं होता. सीमित समयावधि की वजह से दूर-दराज के यात्री जब तक शहर पहुंचते हैं, आरक्षण वाली खिड़की बंद हो चुकी होती है. स्थानीय नागरिकों द्वारा समस्या के बाबत जीएम व डीआरएम जैसे उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया. उन्होंने सुधार का आश्वासन भी दिया, लेकिन समय के साथ ही स्टाफ की कमी के बहाने लोगों की मांगों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है.टिकट कटाना जंग लड़ने के बराबरगौरतलब है कि हालिया दिनों में रेल विभाग ने तत्काल टिकट के समय में बदलाव किया है. सामान्य श्रेणी के लिए रिजर्वेशन प्राप्त करने का समय आठ के बजाय दस एवं एसी क्लास के लिए 11 बजे निर्धारित किया गया है. एक मात्र रिजर्वेशन काउंटर रहने की वजह से आम तौर पर शुरुआती एक दो टिकट ही कन्फर्म हो पाते हैं. मात्र एक-दो मिनट के इस खेल में कतार में पहले व दूसरे नंबर पर खड़े यात्रियों की ही मुरादें पूरी होती हैं. बाकी लोगों को सिर्फ मायूसी ही हाथ लगती है. नतीजा है कि कतार में पहला व दूसरा स्थान प्राप्त करने के लिए यात्री एक दिन पूर्व से ही वहां डेरा डाल देते हैं. रविवार को नहीं होता है आरक्षणसुपौल रेलवे स्टेशन का रिजर्वेशन काउंटर रविवार को बंद रहता है. इसके कारण इस दिन यात्रियों को टिकट के लिए सहरसा रेलवे स्टेशन का रुख करना पड़ता है. जो न सिर्फ महंगा साबित होता है. बल्कि काफी जद्दोजहद भी करनी पड़ती है. रेल यात्रियों द्वारा इस बाबत कई बार रविवार को आरक्षण काउंटर खुला रखने की मांग की गयी. बताया भी गया कि सोमवार को सहरसा से गरीब रथ जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन चलती है. इसके तत्काल टिकट के लिए रविवार को ही प्रयास करना पड़ता है. पर, विभाग यहां भी स्टाफ की कमी के बहाने समस्या से विमुख है.आरक्षण काउंटर पर बिचौलिये हावीस्थानीय रेलवे स्टेशन पर आरक्षण का एक मात्र काउंटर रहने की वजह से टिकट के लिए मारामारी यहां आम बात हो चुकी है. इसका फायदा बिचौलिये उठा रहे हैं. टिकट न पाने से निराश यात्री अभिषेक, राजेश मेहता, शंभु कुमार, गुड्डू आदि ने बताया कि एक दिन पूर्व से ही बिचौलिये के आदमी कतार में पहला व दूसरा स्थान सुरक्षित कर लेते हैं. बाद में उन्हीं बिचौलियों द्वारा मुंह मांगी कीमत पर टिकट बेचा जाता है. टिकट के लिए बेताब व जरूरतमंद यात्री ऐसे दलालों से ऊंचे दाम पर टिकट लेने को विवश होते हैं.

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