घृणित काम करने वालों का कोई मजहब नहीं
छातापुर : मुख्यालय सहित आसपास की बस्ती में रहने वाले मुसलमान भाइयों ने इस बार मुहर्रम के अवसर पर ताजिया जुलूस नहीं निकाला. गौरतलब है कि गत गुरुवार की रात चंद असामाजिक तत्वों ने विजयादशमी के मौके पर लगे मेले में महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया था. इससे आहत प्रखंड मुख्यालय के बुद्धिजीवियों ने […]
छातापुर : मुख्यालय सहित आसपास की बस्ती में रहने वाले मुसलमान भाइयों ने इस बार मुहर्रम के अवसर पर ताजिया जुलूस नहीं निकाला. गौरतलब है कि गत गुरुवार की रात चंद असामाजिक तत्वों ने विजयादशमी के मौके पर लगे मेले में महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया था. इससे आहत प्रखंड मुख्यालय के बुद्धिजीवियों ने उक्त घटना पर विरोध प्रकट किया.
ताजिया निकाले जाने पर लोगों का कहना था कि असामाजिक तत्वों द्वारा किया गया घृणित कार्य ने समाज को कलंकित किया है. जब तक प्रशासन द्वारा इस घटना में शामिल असामाजिक तत्वों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती है, तब तक वे लोग गमजदा रहेंगे. मुख्यालय निवासी मकसूद मस्सन कहते हैं कि गुरुवार की घटना समाज को कलंकित करने जैसी है.
असामाजिक तत्वों ने इस घटना को अंजाम देकर समाज को बांटने का प्रयास किया है. उनका यह मंसूबा कभी पूरा नहीं होगा. ऐसे घृणित कार्य करने वालों का कोई मजहब नहीं होता है. मो किरानी ने कहा कि यह प्रखंड प्रारंभिक दौर से ही अमन-चैन व शांति के लिए प्रेरणादायक रहा है. चंद कुंठित मानसिकता के लोगों ने सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने का प्रयास किया.
सामाजिक स्तर पर ऐसे लोगों का बहिष्कार होना चाहिए. मो साहिद ने कहा कि घृणित कार्यों को अंजाम देने वाला व्यक्ति का कोई धर्म व मजहब का नहीं होता. ऐसे लोगों को चिह्नित कर कानूनी कार्रवाई के अलावा सामाजिक स्तर से भी दंडित किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में फिर ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो. मो सुखन कहते हैं कि समाज में विद्वेष फैलाने की नीयत से ही इस घटना को अंजाम दिया गया. सिराज मौलवी ने घटना पर दुख व्यक्त करते कहा कि दोषी व्यक्तियों को निश्चित रूप से सजा मिलनी चाहिए. निर्दोष पर कार्रवाई नहीं हो, इस पर भी विशेष ख्याल रखा जाना जरूरी है.
मो सजीर ने कहा कि घटना के बाद प्रशासन शांति व्यवस्था के लिए जितना गंभीर दिखा, उतनी गंभीरता घटना से पूर्व दिखाते, तो शायद इस प्रकार की घटना को समय से पूर्व रोका जा सकता था. मो मेहीउद्दीन ने कहा कि धार्मिक आयोजनों से पूर्व थाने में शांति समिति की बैठक भले ही की जाती रही है. पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के दावे किये जाते हैं.
पर, इस घटना ने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. घटना में चाहे जो भी शामिल हों, पर भुगतना तो सभी को पड़ता है. मो नवीन कहते हैं कि सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ने की नीयत से जिसने भी इस घटना को अंजाम दिया, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. मो नुरूद्दीन ने कहा कि घटना को अंजाम देने वाले चाहे जो भी हों, इसकी निंदा की जानी चाहिए. अमन-चैन व सद्भाव के साथ जीवन व्यतीत कर रहे आम लोगों के लिए यह चिंता का विषय है कि दशकों से सामाजिक सौहार्द का मिसाल रहा क्षेत्र इस घटना से बदनाम हुआ है.
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