सुपौल के बजार में धड़ल्ले से बिक रही बैन चैना-मुगरी मछली, लोगों की सेहत से खिलवाड़
बैन चैना-मुगरी मछली
Supaul News: सरकार की ओर से प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद सुपौल के कई ग्रामीण हाटों में चैना-मुगरी मछली खुलेआम बिक रही है. कम कीमत के कारण लोग इसे खरीद रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बता रहे हैं.
कटैया-निर्मली (सुपौल) से इंद्रभूषण की रिपोर्ट
Supaul News: स्वास्थ्य कारणों से सरकार द्वारा प्रतिबंधित की गई चैना-मुगरी मछली पिपरा थाना क्षेत्र के कई ग्रामीण हाटों में खुलेआम बिक रही है. निर्मली बाजार, कटैया, थुमहा, रामनगर और तुलापट्टी समेत दर्जनों हाटों में इस मछली की बिक्री बेखौफ जारी है. हैरानी की बात यह है कि मत्स्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं.
प्रतिबंध के बावजूद हाटों में धड़ल्ले से बिक्री
स्थानीय हाटों में मछली बेचने वाले कई दुकानदारों ने स्वीकार किया कि वे लंबे समय से चैना-मुगरी मछली बेच रहे हैं. उनका कहना है कि इसकी कीमत अन्य मछलियों की तुलना में कम होती है, इसलिए ग्राहक भी इसे आसानी से खरीद लेते हैं. हालांकि सरकार ने इस मछली की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया हुआ है.
प्रशासन की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों का आरोप है कि प्रतिबंधित मछली की खुलेआम बिक्री विभागीय लापरवाही को उजागर करती है. लोगों का कहना है कि यदि मत्स्य विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग नियमित जांच और छापेमारी करें तो इस तरह की अवैध बिक्री पर आसानी से रोक लगाई जा सकती है. कई लोगों ने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं.
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स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जताई चिंता
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार प्रतिबंधित चैना-मुगरी मछली के सेवन से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस मछली में हानिकारक बैक्टीरिया और अन्य तत्व पाए जा सकते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग, त्वचा रोग और पेट संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. ग्रामीण इलाकों में इसकी खुलेआम बिक्री जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है.
Supaul News: ग्रामीणों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग से हाटों में औचक छापेमारी चलाने तथा प्रतिबंधित मछली बेचने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक प्रशासन सख्ती नहीं बरतेगा, तब तक लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ जारी रहेगा.
इस मामले में जिला मत्स्य पदाधिकारी, सुपौल ने कहा कि चैना-मुगरी मछली पूरी तरह प्रतिबंधित है. यदि कहीं इसकी बिक्री की सूचना मिलती है तो जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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