पशु अस्पताल से भी बदतर स्थिति है पीएचसी की

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सरायगढ़: सरकार द्वारा लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है. प्रयास भी किये जा रहे हैं. पर, धरातल पर इसमें सुधार होता नजर नहीं आ रहा है. इसका जीता जागता प्रमाण पीएचसी भपटियाही है. पीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है. या ऐसा कहें कि बीमार लोगों के […]

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सरायगढ़: सरकार द्वारा लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है. प्रयास भी किये जा रहे हैं. पर, धरातल पर इसमें सुधार होता नजर नहीं आ रहा है. इसका जीता जागता प्रमाण पीएचसी भपटियाही है. पीएचसी में स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है. या ऐसा कहें कि बीमार लोगों के इलाज के लिए स्थापित यह अस्पताल खुद बीमार है. इस्ट वेस्ट कॉरीडोर के तहत निर्मित एनएच 57 एवं एसएच 76 के निर्माण के बाद इस पीएचसी का महत्व और अधिक बढ़ जाता है. पर, स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस पीएचसी में सुविधा बढ़ाने के बजाय दिन ब दिन कटौती ही की जा रही है. नतीजा है कि पीएचसी में जान बचाने के लिए जाने वाले लोगों की जान हमेशा संकट में घिरी रहती है.
बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव : करीब सवा लाख लोगों को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु स्थापित इस पीएचसी में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. टूटे व जजर्र बेड इस पीएचसी की पहचान बन गये हैं. न तो बेड पर गद्दा और न ही चादर उपलब्ध रहता है. नतीजतन मरीजों को जजर्र बेड अथवा फर्श पर लिटा कर उपचार किया जाता है. प्रसव कक्ष का ऑक्सीजेनेरेटर, सेक्शन मशीन व वार्मर महीनों से खराब पड़ा है. स्ट्रेचर के अभाव में मरीजों को गोद में उठा कर कक्ष तक पहुंचाया जाता है.
चिकित्सक व कर्मियों के कई पद हैं खाली : पीएचसी में चिकित्सकों के सात पद सृजित हैं.

पर, पांच चिकित्सक ही पदस्थापित हैं. इनमें से डॉ राम निवास प्रसाद जहां कुनौली पीएचसी से प्रतिनियुक्त किये गये हैं, वहीं प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ आरपी सिन्हा का पदस्थापन निर्मली में है और त्रिवेणीगंज में प्रतिनियुक्ति पर हैं. इस वजह से पीएचसी के कर्मियों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं रहता. स्त्री रोग व हड्डी रोग विशेषज्ञ के नहीं रहने से भी मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. कंपाउंडर, ड्रेसर, फार्मासिस्ट, भंडारपाल आदि के कई पद महीनों से रिक्त पड़े हैं. एनएच 57 एवं एसएच 76 पर प्रतिदिन सड़क हादसे में लोग जख्मी होते रहते हैं. पर, चिकित्सक व कर्मियों के अभाव के कारण घायलों का समुचित उपचार नहीं हो पाता है.

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