साहब, अब यहां लगता है डर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :18 Dec 2014 9:20 AM (IST)
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सुपौल : हत्या के दो महत्वपूर्ण कारणों में एक भूमि विवाद बहरहाल कानून व्यवस्था के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है. इस मामले में पुलिस से अधिक प्रशासनिक महकमा जिम्मेवार है. हालांकि भूमि विवाद को पेंचीदा बनाने में पुलिस की भी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है. भूमि विवाद के मामले में पुलिस […]
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सुपौल : हत्या के दो महत्वपूर्ण कारणों में एक भूमि विवाद बहरहाल कानून व्यवस्था के लिए सिरदर्द साबित हो रहा है. इस मामले में पुलिस से अधिक प्रशासनिक महकमा जिम्मेवार है. हालांकि भूमि विवाद को पेंचीदा बनाने में पुलिस की भी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता है. भूमि विवाद के मामले में पुलिस के हाथ बंधे तो प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ खुले हैं.
हैरानी की बात यह है कि भूमि विवाद के निबटारे के लिए जिन अधिकारियों को अधिकार दिये गये हैं उनके लिए अधिकार के साथ-साथ मामले के निबटारे के लिए समय सीमा भी तय की गयी है, लेकिन तय समय सीमा के अंदर अंचलाधिकारी से लेकर डीएम तक के यहां विवाद का निबटारा नहीं हो पाता है. इसकी वजह यह है कि अधिकारियों के इर्द -गिर्द बिचौलिये का कब्जा होता है और बिना सुविधा शुल्क का भुगतान किये विवाद का निबटारा नहीं हो पाता है. थाना स्तर पर भूमि विवाद के लिए सप्ताह में एक दिन अंचलाधिकारी की उपस्थिति में जनता दरबार लगाने का आदेश है, लेकिन यह केवल कागजों तक सीमित है. ऐसे में हताश व परेशान लोग कानून को अपने हाथ में लेने से नहीं चूकते हैं.
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