35 पंचायतें हैं बाढ़ से प्रभावित

Updated at : 17 Jul 2019 6:44 AM (IST)
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35 पंचायतें हैं बाढ़ से प्रभावित

सुपौल : तटबंध के भीतर बाढ़ की स्थिति एवं कोसी पीड़ितों के प्रति जिला प्रशासन गंभीर है. तटबंध के भीतर बाढ़ में फंसे लोगों को निकाला जा रहा है. वहीं बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का वितरण भी किया जा रहा है. यह बातें जिला पदाधिकारी महेंद्र कुमार ने मंगलवार को समाहरणालय स्थित टीसीपी […]

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सुपौल : तटबंध के भीतर बाढ़ की स्थिति एवं कोसी पीड़ितों के प्रति जिला प्रशासन गंभीर है. तटबंध के भीतर बाढ़ में फंसे लोगों को निकाला जा रहा है. वहीं बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का वितरण भी किया जा रहा है. यह बातें जिला पदाधिकारी महेंद्र कुमार ने मंगलवार को समाहरणालय स्थित टीसीपी भवन में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कही.

डीएम श्री कुमार ने बताया कि जिले में बाढ़ प्रभावित कुल पंचायतों की संख्या 35 है. जिसमें 14 पूर्ण एवं 21 आंशिक रूप से प्रभावित हैं. करीब 85 गांवों में रह रहे 82 हजार की आबादी बाढ़ से पीड़ित है.
275 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं. पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिये प्रशासन द्वारा रेस्क्यू अभियान चलाया गया. जिसके तहत 26 हजार 258 लोगों को निकाला गया. बाढ़ पीड़ितों के लिये 14 कैंप एवं 14 सामुदायिक रसोई चलाया जा रहा है. जहां अभी करीब 30 हजार 233 विस्थापित रह रहे हैं. हालांकि तटबंध के भीतर पानी घटने के बाद लोग वापस गांव की ओर लौट रहे हैं. प्रशासन द्वारा दो स्वास्थ्य केंद्र तटबंध पर चलाये जा रहे हैं.
82 गांव पानी से घिरे हैं. सरकारी स्तर पर 242 नाव का परिचालन किया जा रहा है. बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्री का भी वितरण किया जा रहा है. अब तक पीड़ितों के बीच 129.32 क्विंटल चूड़ा, 17.22 क्विंटल चीनी, 10 हजार 191 माचिस, 12 हजार 191 मोमबत्ती एवं 05 हजार 550 पॉलीथिन सीट का वितरण किया गया है. इसके अलावा 06 हजार 600 फूड पैकेट भी बांटे गये हैं.
अब तक दो की हुई है मौत
डीएम ने बताया कि अब तक 02 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है. प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक सुपौल प्रखंड के 08, किसनपुर के 09, सरायगढ़-भपटियाही के 04, निर्मली के 08, मरौना के 02 एवं बसंतपुर के 04 पंचायत बाढ़ से प्रभावित हैं. बताया कि तटबंध के भीतर बाढ़ की स्थिति के मद्देनजर जिला प्रशासन पूरी तरह चौकस है. तटबंध की लगातार निगरानी की जा ही है. अभियंताओं की टीम मुस्तैद है. तटबंध पर होमगार्ड की तैनाती की गयी है. मौके पर एसपी मृत्युंजय कुमार चौधरी भी मौजूद थे.
सरकारी सहायता की मांग को लेकर बाढ़ पीड़ितों ने प्रखंड कार्यालय में किया हंगामा
निर्मली. मरौना प्रखंड क्षेत्र स्थित बेलही पंचायत वार्ड एक और दो के सैकड़ों ग्रामीण ने प्रखंड मुख्यालय परिसर में मंगलवार को जमकर हंगामा किया. बाढ़ से पीड़ित बेलही पंचायत के महिला व पुरुष ने प्रखंड मुख्यालय परिसर पहुंच कर जमकर हंगामा किया और पदाधिकारी के खिलाफ नारेबाजी की. आक्रोशित ग्रामीणों कहना है था कि बिहुल नदी और बलान नदी में बाढ़ आने से तीन से चार दिन से उनलोगों के घर में पानी घुसा हुआ है.
घर भी गिर रहे है. घर में रखा अनाज भीग गये हैं. बच्चे भूखे हैं. लेकिन आज तक हमलोगों को देखने के लिए कोई भी जनप्रतिनिधि या पदाधिकारी सुधि लेना मुनासिब नहीं समझा. लोगों ने सरकारी राहत अविलंब मुहैया कराने की मांग किया. लोगो को प्रखंड विकास पदाधिकारी मणिमाला कुमारी ने शांत कराया और हरसम्भव सहायता देने की बात कही. इसके बाद आक्रोशित बाढ़ पीड़ित शांत हो सके.
पानी के दबाव से डायवर्सन टूटने के कगार पर, लोगों ने की मरम्मत करने की मांग
त्रिवेणीगज : एक बड़ी आबादी को मुख्यालय क्षेत्र से जोड़ने वाली मचहा सड़क मार्ग में चिलौनी नदी पर पुल ध्वस्त हो जाने के उपरांत लोगों को आवागमन की सुविधा बहाल करने के उद्देश्य से बनाए गये डायवर्सन पानी की बढ़ोतरी के बाद टूटने के कगार पर है.
मचहा सड़क मार्ग में चिलौनी नदी नदी पर बने 07 पाया वाला क्षतिग्रस्त पुल करीब तीन साल पूर्व नदी में अत्यधिक पानी बढ़ने व पानी के बढ़ते दबाव को नहीं झेल सका और ताश के पत्तों की तरह धाराशायी हो गया था. उसके बाद लोगों को मुख्यालय क्षेत्र तक आने-जाने में हो रही परेशानी को देखते हुए विभागीय स्तर पर ध्वस्त पुल के समीप नदी में डायवर्सन का निर्माण कराया गया.
लेकिन डायवर्सन निर्माण के साल भर बाद ही बरसात के मौसम में नदी के जलस्तर बढ़ते ही पानी के दबाव पर ध्वस्त हो गया. पुन: दूसरी बार आवागमन बहाल करने के लिये डायवर्सन का निर्माण कराया गया. नदी के जलस्तर में वृद्धि होने के कारण डायवर्सन में कई जगह कटाव लग गया और क्षतिग्रस्त होकर ध्वस्त होने के कगार पर है.
मालूम हो कि उक्त सड़क से त्रिवेणीगंज प्रखंड क्षेत्र के मचहा, मयूरवा, कुशहा गांव समेत मधेपुरा जिला के सीमावर्ती गांव गड़हा, लाही, बरियाही, बथान परसा आदि गांव के लोग रोजमर्रा के सामानों की खरीदारी करने व अपने तैयार फसलों को मुख्यालय बाजार के मंडियों में बेचने के उद्देश्य से इसी मार्ग से आवागमन करते हैं.
डायवर्सन में जगह-जगह कटाव होने व ध्वस्त होने की प्रबल संभावना के साथ ही लोगों में आवागमन की चिंता बढ़ गयी है. यदि उक्त डायवर्सन ध्वस्त होता है तो बड़ी आबादी के लोगों को मुख्यालय स्थित बाजार क्षेत्र तक डपरखा कोसी कॉलोनी होते बाजार क्षेत्र आना-जाना होगा और करीब तीन किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी.
मचहा गांव के ग्रामीण मो आलम, मो यासीन, मो फहीम, मो बुचाय, फेकु यादव, दीप नारायण चौधरी, विरेंद्र सरदार, पंसस विनोद यादव, कपलेश्वर यादव, भागवत प्रसाद यादव, फगुनी साह आदि ने क्षतिग्रस्त हो रहे डायवर्सन को अविलंब दुरुस्त करवाने की मांग की है. ताकि लोगों का आवागमन सुलभ हो सके.
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