वंचितों की दावेदारी में दलित साहित्य की भूमिका विषय पर हुई चर्चा

Published at :01 Jun 2018 6:27 AM (IST)
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वंचितों की दावेदारी में दलित साहित्य की भूमिका विषय पर हुई चर्चा

सुपौल : जिला मुख्यालय स्थित डिग्री महाविद्यालय के सभागार में गुरुवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिला लोक शिक्षा समिति के मुख्य कार्यक्रम समन्वयक उपेंद्र प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में सहायक निदेशक जनशिक्षा मो गालिब खान विशिष्ट अतिथि के रुप में मौजूद थे. कार्यक्रम का शुभारंभ कलाकारों द्वारा संगीतमय प्रस्तुति […]

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सुपौल : जिला मुख्यालय स्थित डिग्री महाविद्यालय के सभागार में गुरुवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जिला लोक शिक्षा समिति के मुख्य कार्यक्रम समन्वयक उपेंद्र प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में सहायक निदेशक जनशिक्षा मो गालिब खान विशिष्ट अतिथि के रुप में मौजूद थे. कार्यक्रम का शुभारंभ कलाकारों द्वारा संगीतमय प्रस्तुति के साथ किया गया. उक्त कार्यक्रम में वंचितों की दावेदारी में दलित साहित्य की भूमिका के विषय पर कई वक्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किये. सभा को संबोधित करते हुए मुख्य समन्वयक श्री मंडल ने कहा कि दलित साहित्य यात्रा एक प्रतिवाद का छोटा सा स्वरूप है, जो तथ्यपरक व अर्थपूर्ण कदम है. वर्तमान परिवेश में सामाजिक बदलाव जिस प्रकार अपने हक व अधिकार के लिए अंगराई ले रही है. इस परिस्थिति में वहुजन समाज के बीच उनके पुरखों, साहित्यकारों व समर्थकों द्वारा रचित साहित्य को सार्वजनिक किये जाने की आवश्यकता है. ताकि इस बहुजन समाज के शिक्षितों, युवाओं, नौकरी पेशा व समूह के लोगों का एक सामाजिक व वैचारिक परिप्रेक्ष्य मजबूत हो. श्री मंडल ने कहा कि आज के तारीख में भारत का दलित समाज उस स्थिति में नहीं है, जो बीती सदियों के दशकों में था.

कई वक्ताओं ने कहा कि हमारा समाज उपलब्ध सीमित अवसरों का लाभ उठा कर अपने अधिकार के लिये सामाजिक हस्तक्षेप को प्रयासरत हैं. आज हमारा समाज देश-दुनिया, ज्ञान विज्ञान को समझता है. इन विषयों पर सजग और सक्रिय रहता है. कारू खिरहर, वेंगटा चमार, चुहड़मल, राजा शहलेष, ज्योति बापूफुले, सावित्री बाई, भीमराव अंबेडकर इस शृंखला के कुछ सशक्त हस्ताक्षर है. जिन्होंने वर्णवादी, मनुवादी व्यवस्था को चुनौदी है और एक विकल्प का रास्ता भी दिया. सवाल है कि क्या इस स्थिति को यह बहुजन समाज स्वीकार कर ले या एक सशक्त तरीके से विभिन्न स्वरूपों में इसका प्रतिवाद करें. मौके पर अवधेश जी, रेशमा प्रसाद, अवधेश कुमार, सोनी जी, श्याम जी, शिव नारायण, मुर्तुजा, विरेंद्र प्रसाद आदि ने भी संबोधित किया. कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया.
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