कनकनी से घरों में दुबके लोग, इस सप्ताह ऐसा ही रहेगा मौसम
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Jan 2018 4:54 AM (IST)
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हवा का प्रकोप तेज होने से ठंड के प्रभाव में होगी वृद्धि सुपौल : जिले में विगत 5-6 दिनों से शीलतहर का प्रकोप निरंतर जारी है. शीतलहरी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, तो कनकनी ने लोगों की मुश्किलें बढ़़ा दी है. जिसके कारण आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. हड्डी कंपा देने […]
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हवा का प्रकोप तेज होने से ठंड के प्रभाव में होगी वृद्धि
सुपौल : जिले में विगत 5-6 दिनों से शीलतहर का प्रकोप निरंतर जारी है. शीतलहरी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, तो कनकनी ने लोगों की मुश्किलें बढ़़ा दी है. जिसके कारण आम जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है. हड्डी कंपा देने वाली ठंढ़ के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. ठंढ़ के कहर के साथ ही कोहरे की मार भी लोगों के लिये आफत साबित हो रही है. गत चार-पांच दिनों से पारा रोज एक से दो डिग्री लुढ़कता जा रहा है. सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ हो गये हैं. तापमान में गिरावट पर धूप का पहरा समाप्त हो जाने की वजह से कनकनी और भी बढ़ गयी है. मंगलवार को जहां अधिकतम तापमान 26 एवं न्यूनतम तापमान 08 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था.
वहीं बुधवार को अधिकतम तापमान 25 डिग्री और न्यूनतम तापमान 06 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. कड़ाके की ठंढ़ के बीच पछुआ हवा के झौंके आग में घी का काम कर रहे हैं. बर्फीली हवा की वजह से ससे ज्यादा गरीब, लाचार, मजदूर व निम्न वर्ग के लोगों की मुश्किलें बढ़ गयी है. समुचित गर्म कपड़े के अभाव में उन्हें अलाव के सहारे ही समय काटना पड़ रहा है. जाड़े में हुई अप्रत्याशित वृद्धि की वजह से गर्म कपड़ों की दुकानों पर खरीदारों की खासी भीड़ देखी जा रही है. भयानक ठंढ़ के बीच प्रशासन द्वारा चौक-चौराहों व झुग्गी-झोपड़ियों में अलाव की समुचित व्यवस्था नहीं की गयी है. जिसके कारण लोगों में असंतोष व्याप्त है.
कैसे करें अपना बचाव
चिकित्सकों की मानें तो ठंड के बढ़ते प्रकोप से सबसे अधिक बच्चों और बूढ़ों को बच कर रहने की जरूरत है. सभी लोग अपने सिर से लेकर पैर तक गर्म कपड़ों से ढक कर रखे. बच्चों और बूढ़ों को सुबह और शाम में घर से बाहर नहीं निकलने दें. मधुमेह, रक्तचाप, ह्दय के रोग से पीडित व्यक्ति सुबह और शाम में घर से बाहर न निकलें. अपने स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए नियमित रूप से दवा लें तथा गर्म भोजन करें. नवजात शिशुओं का रात में विस्तर गीला होने पर बदलते रहें.
गर्म पानी पियें और अधिक तेल मशाला वाले भोजन से परहेज करें. रात में सोते समय किसी भी कीमत पर कमरे में अंगीठी या रुम हीटर जला कर ना छोड़े. बरना घुटन होने से सांस फूलने जैसी परेशानी हो सकती है. ठंड के वजह से जुकाम, खांसी, निमोनिया आदि हो सकता है. इसलिए अधिक से अधिक गर्म कपड़ों का प्रयोग करें. सुबह या शाम में घर से बाहर निकलने पर पूरे बदन को ढंक कर रखें.
क्या करें पशुपालक
इस बाबत ठंड से अपने पशुओं को बचाव करने के बाबत पूछे जाने पर पशु वैज्ञानिक डा प्रतीक ने बताया कि सुबह और शाम में किसी भी कीमत पर अपने पशुओं को गुहाल से बाहर ना निकाले. उन्हें गर्म पानी पीने के लिए दें और उनके पाचन क्रिया को ठीक रखने के लिए सुबह शाम चारा के साथ नमक भी दें. साथ ही पशुओं को ठंड से वचाव के लिए गुड़ भी दें. उनके पूरे बदन को जुट के बोरा की झुल से ढंक कर रखें. सुबह शाम गुहाल में धुंआ अवश्य करें. पशुओं को गर्मी प्रदान करने के लिए गुहाल में पुआल बिछा दें और पशुओं को पौष्टिक आहार भी चारा के साथ जरूर दें.
क्या करें किसान
इस बाबत कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि तीन जनवरी तक न्यूनतम तापमान और कम होने की संभावना है. पाला से प्रभावित होने वाले फसल को बचाने के लिए मैंकोजेव 75 प्रतिशत डब्लूपी दो ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें. आलू में झुलसा रोग से बचाने के लिए रेडकोमिल 50 प्रतिशत डब्लुपी एक ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें. सरसों में यदी हरा या काला रंग का लाही लग गया हो तो उस पर भी कृषि वैज्ञानिक के सलाह से दवा का छिड़काव करें.
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