गहरे खाई में डूबने से बालक की मौत

Published at :22 Aug 2017 6:00 AM (IST)
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गहरे खाई में डूबने से बालक की मौत

मरौना : नदी थाना क्षेत्र अंतर्गत कदमहा पंचायत के वार्ड नंबर 04 में एक गहरे खाई में डूबने से बालक की मौत हो गयी. जिसकी पहचान सूर्य नारायण साह के 12 वर्षीय पुत्र आनंद कुमार के रूप में की गयी है. मृतक के परिजनों ने बताया कि आनंद कुमार मूक बधिर था. वह दिन भर […]

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मरौना : नदी थाना क्षेत्र अंतर्गत कदमहा पंचायत के वार्ड नंबर 04 में एक गहरे खाई में डूबने से बालक की मौत हो गयी. जिसकी पहचान सूर्य नारायण साह के 12 वर्षीय पुत्र आनंद कुमार के रूप में की गयी है. मृतक के परिजनों ने बताया कि आनंद कुमार मूक बधिर था. वह दिन भर लोगों के साथ काम किया और कहीं घुमने के लिए निकल गया. शाम तक नहीं लौटने पर उसकी काफी खोजबीन की गयी. लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला. अगले दिन सोमवार की सुबह घर से कुछ दुरी पर एक खाई में उसकी लाश मिली. घटना की खबर सुनकर नदी थाना पुलिस घटना स्थल पर पहुंच कर शव को कब्जे में ले लिया और उसे पोस्टमार्टम के लिये सुपौल भेज दिया.

वीरेंद्र सदा ने बताया कि विभिन्न गांवों के बाढ़ पीड़ित परिवार कोसी तटबंध पर शरण लिये हुए हैं. कुछ परिवार माल-मवेशी के साथ खुले आसमान के नीचे हैं. यहां आदमी और पशु में अंतर मिट सा गया है. बाढ़ पीड़ितों की स्थिति हृदय विदारक है. पीड़ितों के समक्ष रोटी-भात के साथ ही जिंदगी बचाने की गंभीर समस्या है. सरकारी सहायता के नाम पर कुछ लोगों के बीच अनाज, मोमबत्ती आदि का वितरण किया गया है. वहीं बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिन्हें अब तक एक लेमनचूस तक मयस्सर नहीं हो सका है. वैसी स्थिति में पीड़ित परिवार जैसे तैसे जीवन यापन करने को विवश हैं. चंदरगढ़, बेला आदि गांवों का अवलोकन करने के बाद पता चलता है कि आंकड़ों का पहाड़ा पढ़ रहा है प्रशासन और कागज पर हो रही है कसरत. पीड़ितों ने एक स्वर से कहा कि पहुंचा सकते हैं तो पहुंचा दीजिए डीएम साहब के पास खबर कि यहां कुछ भी ठीक-ठाक नहीं है. विस्थापितों ने बताया कि मुंह देख कर राहत वितरित की जा रही है. जनप्रतिनिधि व अधिकारी हमारी बीच जय-जय, तुम्हारी भी जय के सिद्धांत पर चल रहे हैं. जनप्रतिनिधियों द्वारा पदाधिकारी से मिलकर सिर्फ अपने परिवार व सगे-संबंधियों के बीच राहत वितरित करवायी जा रही है. पीड़ितों ने बताया कि बच्चा जब दूध के लिये रोता है तो कलेजा मुंह को आता है. आखिर पानी के सहारे बच्चा कब तक रहेगा. बहरहाल, आज की तारीख में जमीनी सच्चाई यही है कि हर बार राहत के इंतजामों के बारे में दिलासा दिया जाता है. लेकिन जब कोसी फुफकार मारती है तो सरकार व प्रशासन के दावों को आधार नहीं मिल पाता.
राहत को लेकर जिला प्रशासन काफी गंभीर है. शिविरों में पांच वर्ष तक के बच्चों को दूध उपलब्ध कराया जा रहा है. बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच वितरण के लिये सूखा खाद्यान्न की पैकिंग की जा रही है.
बैद्यनाथ यादव, डीएम, सुपौल
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