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रामबाबू की शहादत पर है वसिलपुर को गर्व

Updated at : 13 May 2025 10:11 PM (IST)
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रामबाबू की  शहादत पर है वसिलपुर को गर्व

मातृभूमि की रक्षा के लिये रामबाबू की शहादत की खबर मंगलवार की सुबह जैसे-जैेसे लोगों को मिलती गयी,हर किसी का कदम उनके गांव वसिलपुर की तरफ बढ़ता गया.जिला मुख्यालय से तकरीबन पैंतीस किलोमीटर दूर बड़हरिया प्रखंड का यह गांव जो कल तक अधिकांश के लिये अनजान बना हुआ था,वह नौजवान की शहादत के चलते अचानक लोगों की जुबान पर आ गया है. .हर किसी के कदम गांव की और बढ़ने से रेला जैसी शक्ल ले ली.

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जितेंद्र उपाध्याय,सीवान. मातृभूमि की रक्षा के लिये रामबाबू की शहादत की खबर मंगलवार की सुबह जैसे-जैेसे लोगों को मिलती गयी,हर किसी का कदम उनके गांव वसिलपुर की तरफ बढ़ता गया.जिला मुख्यालय से तकरीबन पैंतीस किलोमीटर दूर बड़हरिया प्रखंड का यह गांव जो कल तक अधिकांश के लिये अनजान बना हुआ था,वह नौजवान की शहादत के चलते अचानक लोगों की जुबान पर आ गया है. .हर किसी के कदम गांव की और बढ़ने से रेला जैसी शक्ल ले ली. अपने लाल को खोने के गम में उठ रही सिसकियों की आवाज बार -बार गांव की गलियों के बीच छायी मातमी सन्नाटा को चीर रही थी.दिनभर ऐसी ही तस्वीर बनी रही.दूर से आये रिश्तेदारों से लेकर रामबाबू के दोस्तों के आने क्रम लगा रहा.अपने साथी को खोने का जहां उन दोस्तों को गम है वहीं वीरता की इस मिसाल के लिये गर्व भी.कमोबेश हर कोई ऐसा ही कह रहा था कि,रामबाबू आप दुनिया से चले गये, पर देश के लिए मर मिटने की कहानी सदियों तक सुनाई पड़ती रहेगी. वसिलपुर निवासी स्व. रामविचार सिंह के द्वितीय पुत्र रामबाबू सिंह वर्ष 2017 में भारतीय फौज का हिस्सा बने. मात्र 19 वर्ष की उम्र में रामबाबू आर्मी के आरटी ब्रिगेड में शामिल हो गये.जहां आयुध को चलाने समेत अन्य कार्य इनके काम कामकाज का हिस्सा होता है.इस बीच अपने तकरीबन सात वर्ष के सेवाकाल में विभिन्न स्थानों पर तैनाती के क्रम में मौजूदा समय में जम्मू में तैनात थे.पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना के आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त करने के अभियान में भी रामबाबू शामिल रहे.इस बीच अपने मायके धनबाद रह रही पत्नी अंजली से संपर्क बना रहा. 112 डायल की टीम गांव में लेकर आयी पहली खबर गांव वालों के मुताबिक सोमवार की शाम साढ़े चार बजे जीबीनगर थाने से डायल 112 की टीम यहां पहुंची थी.रामबाबू के घर का पता पूछते हुए उनके दरवाजे तक पहुंची.उस समय घर पर मां सुमित्रा देवी के अलावा कोई नहीं था.पास -पड़ोस के लोगों को यह कहते हुए डायल 112 की टीम चली गयी कि रामबाबू घायल या बीमार हैं.इसके बाद से यह खबर गांव में धीरे धीरे फैल गयी.उधर बताया जाता है कि तकरीबन अपराह्न साढ़े तीन बजे अंजली के पास भी आर्मी हेडक्वाटर से कॉल आया था.जिनके द्वारा घर का विवरण लिया जा रहा था.इस पर अंजली साइबर क्राइम से जुड़ा मामला समझ कर फोन काट दी.इसके बाद आर्मी हेडक्वाटर से ही रामबाबू के बड़े भाई अखिलेश के मोबाइल पर कॉल आया.इस दौरान विभाग ने पूरी जानकारी दे दी.इस दौरान वे रेलवे में अपने लोको पायलट के ड्यूटी पर झारखंड में ही थे. शहादत के चंद घंटे पहले पत्नी से हुई थी बात पारिवारिक सदस्यों के मुताबिक मोबाइल पर पत्नी अंजली से सोमवार की सुबह 10.30 बजे रामबाबू से चंद मिनट बात हुई थी.अपने ड्यूटी पर होने की जानकारी देने के साथ ही सामान्य चर्चा करने के बाद शाम को पुन: कॉल करने की बात रामबाबू ने कही थी.रामबाबू की शहादत के बाद अब पत्नी से बातचीत की वह घड़ी कभी नहीं आयेगी. अंजली के मेंहदी के रंग भी अभी नहीं पड़े थे फीके देश के लिए बहादुरी का परिचय देनेवाले रामबाबू पर सभी को गर्व है, पर अपनों को उन्हें खोने का गम भी है. यूं कहें तो शहादत से अंजली के मांग का सिंदूर धूल चुका है, पर घरवालों के मुताबिक अंजली अभी भी मनहूस खबर से अनजान है.अंजली को यह जानकारी दी गयी है कि रामबाबू बीमार हैं.उनके पिता सुभाष चंद्र शर्मा भी उसके गम के भार को देखते हुए सच बोलने को तैयार नहीं है.उधर हाल यह है कि अभी अंजली व रामबाबू के दांपत्य जीवन को शुरू किये छह माह भी नहीं हुए हैं.पिछले वर्ष 14 दिसंबर को धूमधाम से शादी हुई थी. सज धज कर बारात धनबाद गयी थी.इसके बाद से रामबाबू का ड्यूटी पर ही अधिकांश वक्त गुजरा.तकरीबन साढ़े पांच माह के इस रिश्ते की मिठास अभी परवान भी नहीं चढ़ी थी कि कालचक्र ने इसे हमेशा के लिये खत्म कर दिया.शादी की सातों श्रृंगार के साथ मेंहदी की चढ़ी रंग अभी ऐसा लग रहा है कि फीकी भी नहीं पड़ी थी कि रामबाबू को ईश्वर ने अंजली से हमेशा के लिये छीन लिया. सैन्य क्षेत्र में हैं रामबाबू के अधिकांश दोस्त ग्रामीणों का कहना है कि रामबाबू के अंदर देशभक्ति की बीज बचपन से ही पल रहे थे.जिसका नतीजा था कि उनके दोस्त भी कमोबेश वही थे.उनके गांव के करीबी मित्र प्रिंस कुमार सिंह कहते हैं कि उनके दोस्तों में गांव के नितीन कुमार, बलिंद्र कुमार,नागेंद्र सिंह तथा भेलपुर के गौतम यादव आर्मी में हैं.जबकि नरेंद्र सिंह बिहार पुलिस में तैनात हैं.खास बात यह है कि वर्ष 2017 में रामबाबू आर्मी में भर्ती हुये थे.उसके छह माह के अवधि में ही इन दोस्तों की भी सेना व सिपाही में नौकरी हुयी.जिनसे रामबाबू का दूर रहने के बाद भी जीवंत संपर्क बना रहा.अब दोस्तों के बीच रामबाबू के साथ गुजरे वक्त के किस्से ही रह गये हैं रामबाबू के घर से चंद दूरी पर ही गांव का प्राथमिक विद्यालय है.जिसके बगल में मौजूद पीपल के पेड़ की छांव के नीचे रामबाबू के साथ गुजरे पल अब दोस्तों के जुबान पर है.यहां मौजूद किराना दुकान के स्वामी विनोद सिंह कहते हैं कि गांव का हर नौजवान भले ही परदेस में रोजी रोटी के लिहाज से गया है, पर गांव आने पर यहां उनका वक्त अवश्य गुजरता है.यहीं क्रिकेट खेलने से लेकर घंटो बतकही चलती है.इस बतकही का हिस्सा रामबाबू अवश्य रहा करते थे.गांव के प्रिंस समेत अन्य युवा सबके जुबान पर रामबाबू के साथ गुजरे पल की चर्चा है.सबका कहना है कि रामबाबू सहजता व सरलता के लिये मिसाल थे.साथ ही उनके लिये देश से बड़ा कुछ भी नहीं था.इसके लिये अगर किसी के जुबान देशभक्ति को लेकर फिसल गयी तो उससे झगड़ने में भी पीछे नहीं रहे. हर आंख आतुर हैं अपने बेटे के अंतिम दर्शन को रामबाबू की शहादत की खबर मिलने के बाद अब उनके पार्थिव शरीर के गांव आने का इंतजार है.कहा जा रहा है कि बुधवार को जम्मू से विशेष विमान से रामबाबू का पार्थिव शरीर पटना लाया जायेगा.जहां दानापुर स्थित हेड क्वार्टर पर गार्ड आफ ऑनर के साथ अन्य राजकीय सम्मान की प्रक्रिया पूर्ण की जायेगी.इसके बाद बाद सड़क मार्ग से गांव पार्थिव शरीर को लाया जायेगा.जहां पुलिस सम्मान के साथ प्रशासनिक अफसरों व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार किया जायेगा. अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटा प्रशासन बड़हरिया प्रखंड के वसिलपुर गांव में बुधवार को शहीद रामबाबू का पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जायेगा.इसको लेकर एक दिन पूर्व गांव में आवश्यक तैयारी चलती रही.अंतिम दर्शन को जन सैलाब उमड़ने की उम्मीद को देखते हुए भीड़ को नियंत्रित करने की प्रशासन को सर्वाधिक चिंता है.इसको लेकर सदर एसडीओ सुनील कुमार व सदर एसडीपीओ अजय कुमार सिंह, जीबी नगर थाना प्रभारी रितेश कुमार मंडल दिनभर तैयारी चलती रही.इस दौरान गार्ड ऑफ ऑनर के लिये स्थान चयन से लेकर अंत्येष्टि स्थल तक की व्यवस्था में अफसर लगे रहे. बिहार सरकार ने की 50 लाख मदद की घोषणा जम्मू-कश्मीर बॉर्डर पर पाकिस्तानी सेना द्वारा गोलीबारी में शहीद हुए बिहार के सीवान जिले के गौतम बुद्ध नगर थाना क्षेत्र के वसिलपुर गांव के रहने वाले रामबाबू सिंह के शहादत पर मुख्यमंत्री ने शोक जताया है.वीर सपूत की शहादत पर उनके परिजनों को दुःख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना है. शहीद जवान रामबाबू सिंह के निकटतम आश्रित को राज्य सरकार की ओर से 50 लाख रूपये की सम्मान राशि दी जायेगी. साथ ही शहीद जवान रामबाबू सिंह का राज्य सरकार की ओर से पुलिस सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जायेगा. .

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