डीएवी पीजी कॉलेज में पठन-पाठन ठप

Updated at : 14 Mar 2026 10:06 PM (IST)
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डीएवी पीजी कॉलेज में पठन-पाठन ठप

स्थानीय डीएवी पीजी कॉलेज में प्राचार्य के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आंदोलनरत शिक्षकों ने शनिवार को महाविद्यालय परिसर में धरना दिया. जिसके चलते शिक्षण कार्य ठप रहा. उधर प्राचार्य ने शिक्षकों के आंदोलन को अनावश्यक करार देते हुए दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाया है.

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प्रतिनिधि, सीवान. स्थानीय डीएवी पीजी कॉलेज में प्राचार्य के खिलाफ उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आंदोलनरत शिक्षकों ने शनिवार को महाविद्यालय परिसर में धरना दिया. जिसके चलते शिक्षण कार्य ठप रहा. उधर प्राचार्य ने शिक्षकों के आंदोलन को अनावश्यक करार देते हुए दबाव की राजनीति करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के तय नियमावली का पालन कराना हमारा कार्य है. इस बीच दोपहर बाद कैंपस में पहुंचे एमएसली अफाक अहमद ने शिक्षकों के आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया. दोनों पक्षों के टकराव के बीच शैक्षणिक कार्य बाधित रहा. क्लासें नहीं चली और छात्रों को वापस लौटना पड़ा. इधर धरना के दौरान हाथों में पोस्टर लिए शिक्षक प्राचार्य के विरूद्ध नारे लगा रहे थे. वहीं दूसरी ओर छात्र संगठन आइसा व एमएलसी अफाक अहमद महाविद्यालय पहुंच शिक्षकों को समर्थन देते हुए धरना में शामिल हुए. शुक्रवार को शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर विरोध जताते हुए शैक्षणिक कार्य किया था. प्राचार्य व शिक्षकों के बीच जारी गतिरोध पर शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने से महाविद्यालय आलोचना के केंद्र में आ गया है और लोग विश्वविद्यालय प्रशासन से तत्काल हल निकालने की मांग कर रहे हैं. शिक्षकों को समर्थन देने पहुंचे एमएसली अफाक अहमद ने शिक्षकों के अधिकारों को बहाल करने और प्राचार्य की मनमानी पर रोक लगाने के लिए कुलपति से बात की. सारण स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान पार्षद प्रो वीरेंद्र नारायण यादव ने दूरभाष से शिक्षकों को संबोधित किया. उन्होंने शिक्षकों की मांगो पर अविलंब कार्रवाई करने के लिए कुलपति से बात करने और राज्यपाल से मिलने की बात कही. धरना का नेतृत्व डॉ धनंजय यादव ने किया. क्या है मामला- शिक्षक महिला शिक्षिकाओं को प्रत्येक महीना दो दिनों का स्पेशल अवकाश की स्वीकृति बहाल करने की मांग कर रहे है. अ इसके अलावे प्रो केपी गोस्वामी, डॉ प्रकृति राय, डॉ रामानुज कौशिक, डॉ निर्भय कुमार राम की ड्यूटी पर रहने के बावजूद वेतन कटौती की राशि को विमुक्त करने, प्राचार्य द्वारा शिक्षकों के साथ मर्यादित व्यवहार गरिमापूर्ण सुनिश्चित करने, प्रो प्रभाकर निषाद की प्रोजेक्ट कार्य को अविलंब शुरू करवाने, सेवानिवृत शिक्षक प्रो नूर साहब की सेवानिवृत्ति लाभ दिलवाने के लिए के लिए कागजात को अविलंब अग्रसारित करने व इग्नू और एनसीसी में प्राचार्य के अनावश्यक हस्तक्षेप पर रोक लगाने की मांग कर रहे है. धरना में डॉ सत्येंद्र कुमार सिंह, डॉ अली इमाम, प्रो पवन कुमार, प्रो कृष्णकांत प्रसाद, प्रो केपी गोस्वामी, डॉ सुधीर राय, प्रो शमशाद अहमद खान, डॉ अरविंद कुमार, प्रो दीपिका श्रीवास्तव, प्रो प्रकृति राय, प्रो सुरुचि उपाध्याय, प्रो रामानुज कौशिक, प्रो प्रभाकर निषाद, प्रो मंजूर आलम, प्रो नसीम अंसारी, प्रो नावेद अंजुम, प्रो पंकज कुमार, डॉ विशा शर्मा, डॉ अरविंद कुमार यादव, प्रो अब्दुल्ला, प्रो रवींद्रनाथ पाठक व डॉ सीबी सिंह उपस्थित रहे. दलित प्राचार्य को बर्दाश्त नहीं कर रहे शिक्षक प्राचार्य डॉ रामानंद राम ने जहां अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, वहीं कहा कि 84 वर्ष बाद कोई दलित महाविद्यालय का प्राचार्य बना है, जिसे शिक्षक बर्दाश्त नहीं रहे हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जिस मनमानी का आरोप शिक्षक लगा रहे हैं, वे खुद मनमानी करना चाह रहे है. जिस पर रोक लगाने के बाद उनलोगों ने ऐसी स्थिति उत्पन्न किया है. प्राचार्य ने कहा कि मेरे कार्यकाल से पूर्व किसी शिक्षक के आने जाने का कोई समय नहीं था, आज भी वे पांच बजे के बजाय चार बजे व इससे पूर्व जाने की मंशा रखते हैं. जिस पर रोक लगा दी गयी है. विशेष अवकाश का कोई प्रावधान नहीं है. इस संबंध में अगर विश्वविद्यालय पत्र जारी करता है तो मुझे अवकाश देने में कोई दिक्कत नहीं है. कुछ शिक्षक पढाने की बजाय महाविद्यालय में ही ठेकेदारी करा रहे थे, जिसपर रोक लगा दी गयी है. पहले बायोमेट्रिक से हाजिरी नहीं बनती थी, अब बन रही है. ऐसे में शिक्षकों पर नकेल कस गया है, जिससे वे आहत हैु. शिक्षक दबाव बनाने की राजनीति कर रहे हैं.

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