सीवान में पति-पत्नी और दो बेटियों की एक साथ जली चिताएं, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे हादसे हुई दर्दनाक मौत

Published by : karunatiwari Updated At : 18 May 2026 8:31 AM

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घटनास्थल की तस्वीर

Siwan News: (अभय पांडेय) सिसवन थाना क्षेत्र के ग्यासपुर गांव में रविवार को मातमी सन्नाटा पसरा रहा.

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Siwan News: (अभय पांडेय) सिसवन थाना क्षेत्र के ग्यासपुर गांव में रविवार को मातमी सन्नाटा पसरा रहा. गांव की गलियों में रोज की चहल-पहल की जगह चीख-पुकार और लोगों की नम आंखें दिखाई दे रही थीं. यूपी के पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर हुए भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले मनीष श्रीवास्तव, उनकी पत्नी और दो बेटियों के शव जब पैतृक गांव पहुंचे, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया.

शव पहुंचते ही गांव में मचा कोहराम

रविवार दोपहर करीब 3:30 बजे जैसे ही चारों शव ग्यासपुर गांव पहुंचे, वहां मौजूद लोगों की आंखें भर आईं. मृतक मनीष श्रीवास्तव के घर के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई.परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। एक दिन पहले तक हंसता-खेलता परिवार अब हमेशा के लिए बिछड़ चुका था. जब चारों की अर्थियां उठीं, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं. ग्रामीणों की जुबां पर बस यही शब्द थे कि “ईश्वर को शायद यही मंजूर था.” मनीष, उनकी पत्नी और दोनों बेटियों के लिए अलग-अलग चिताएं सजाई गईं। चारों को मुखाग्नि मनीष के बड़े भाई जीवन लाल श्रीवास्तव ने दी. अंतिम दर्शन के दौरान परिजन और रिश्तेदार फफक पड़े. स्थानीय लोगों में मुन्ना मिश्रा, रुपेश मिश्रा, चंदन समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया.

बेटे-बहू और पोतियों का शव देख टूट गए वृद्ध माता-पिता

चार शवों को एक साथ देखकर मनीष के वृद्ध माता-पिता पूरी तरह टूट गए. बेटे, बहू और दोनों पोतियों को खो चुके प्रेम लाल श्रीवास्तव और उनकी पत्नी शीला देवी का रो-रोकर बुरा हाल था. परिजन बताते हैं कि वृद्ध दंपति बार-बार यही कह रहे थे, “मेरे बेटा-बहू और पोतियों को कहां ले जा रहे हो, मुझे भी इनके साथ जला दो.” यह दृश्य देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। जो लोग परिवार को करीब से नहीं जानते थे, वे भी अंतिम विदाई देने गांव पहुंचे.

16 वर्षों से फरीदाबाद में रह रहा था परिवार

जानकारी के अनुसार, मनीष श्रीवास्तव पिछले करीब 16 वर्षों से अपने परिवार के साथ हरियाणा के फरीदाबाद में रह रहे थे. वह ओखला स्थित एक निजी कंपनी में नौकरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे. ग्रामीणों ने बताया कि मनीष का गांव आना-जाना कम ही होता था. रिश्तेदारी में शादी-विवाह या अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों के दौरान ही वह गांव आते थे.

जानें कैसे हुआ भीषण हादसा

बताया गया कि मनीष श्रीवास्तव चार दिन पहले फरीदाबाद से अपने मामा के घर छपरा जिले के मढ़ौरा आए थे, जहां उनके नाना का ब्रह्मभोज था. इस कार्यक्रम में उनके माता-पिता भी शामिल हुए थे. ब्रह्मभोज समाप्त होने के बाद शनिवार को मनीष अपने माता-पिता को लेकर छपरा पहुंचे. वहां से उन्होंने माता-पिता को सार्वजनिक वाहन से गांव भेज दिया, जबकि खुद पत्नी और दोनों बेटियों के साथ कार से फरीदाबाद के लिए रवाना हो गए. इसी दौरान यूपी के कंधरापुर थाना क्षेत्र में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर माइलस्टोन 238 के पास उनकी कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़े राजस्थान नंबर के ट्रक से जा टकराई. बताया जा रहा है कि कार की रफ्तार करीब 135 किलोमीटर प्रति घंटा थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए. इस दर्दनाक हादसे में कार में सवार सभी पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई.

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लेखक के बारे में

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करुणा तिवारी बिहार के आरा, वीर कुंवर सिंह की धरती से आती हैं। उन्होंने पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की। 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है। अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं, ताकि सशक्त और प्रभावी पत्रकारिता के माध्यम से समाज तक सच्चाई पहुंचा सकें।

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