इलाज के बाद भी इंसाफ नहीं, बकाया न देने पर 10 घंटे तक रोका गया शव, मंत्री को करना पड़ा हस्तक्षेप

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मृतक अमित यादव का फाइल फोटो

Siwan News: इलाज के बाद भी इंसाफ नहीं, बकाया न देने पर 10 घंटे तक रोका गया शव, मंत्री को करना पड़ा हस्तक्षेप. सीवान जिले के लकड़ी नवीगंज थाना क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद पटना के एक निजी नर्सिंग होम पर गंभीर आरोप लगे हैं।

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Siwan News: (जितेंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट) सीवान जिले के लकड़ी नवीगंज थाना क्षेत्र में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद पटना के एक निजी नर्सिंग होम पर गंभीर आरोप लगे हैं। इलाज के दौरान हुई मौत के बाद अस्पताल प्रशासन द्वारा बकाया राशि न मिलने पर युवक के शव को करीब 10 घंटे तक रोककर रखने का मामला सामने आया है।

जानकारी के अनुसार, 7 मई को गोपालपुर (डमछो) निवासी संतोष यादव के 22 वर्षीय पुत्र अमित यादव अपनी बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान गोपालपुर नहर मार्ग पर सड़क पर गिरे पेड़ से उनकी बाइक टकरा गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। साथ में मौजूद अमरजीत कुमार यादव भी हादसे में घायल हुआ, जिसकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है।

घटना के बाद डायल 112 पुलिस की टीम ने दोनों घायलों को लकड़ी नवीगंज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से गंभीर स्थिति में अमित यादव को सीवान रेफर किया गया। बाद में उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 14 मई को उनकी मौत हो गई।

इलाज के बाद बकाया को लेकर विवाद, शव रोके जाने का आरोप

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल का करीब डेढ़ लाख रुपये बकाया होने के कारण शव को जारी नहीं किया गया और उसे लगभग 10 घंटे तक रोके रखा गया। इस दौरान परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया।

मंत्री के हस्तक्षेप से बदली तस्वीर, परिजनों को सौंपा गया शव

मामले की सूचना बिहार सरकार के एक कैबिनेट मंत्री को दी गई, जिसके बाद उनके निजी सचिव अस्पताल पहुंचे और हस्तक्षेप कर स्थिति को शांत कराया। इसके बाद परिजनों द्वारा कुछ राशि (करीब 60 हजार रुपये) जमा करने पर शव सौंप दिया गया।

गांव में मातम, विभागीय लापरवाही पर उठे सवाल

शुक्रवार सुबह जैसे ही शव गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। मृतक अमित यादव दो भाइयों में छोटा था और अविवाहित था। परिवार में माता-पिता और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

वहीं ग्रामीणों ने इस हादसे के लिए वन विभाग और गंडक विभाग को जिम्मेदार ठहराते हुए गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आंधी-तूफान के बाद सड़क पर गिरे पेड़ की सूचना देने के बावजूद उसे नहीं हटाया गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ।

ग्रामीणों के अनुसार, कार्रवाई और एफआईआर के डर से कोई भी व्यक्ति पेड़ हटाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। फिलहाल घटना को लेकर क्षेत्र में आक्रोश और शोक दोनों का माहौल है।

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करुणा तिवारी

लेखक के बारे में

By करुणा तिवारी

करुणा तिवारी पिछले 8 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और टीवी तथा डिजिटल मीडिया दोनों में व्यापक अनुभव रखती हैं. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन बिहार (Doordarshan Bihar) से की, जहां समाचारों की प्रस्तुति, रिपोर्टिंग और जनसरोकार से जुड़े विषयों पर काम करते हुए उन्होंने पत्रकारिता की मजबूत नींव तैयार की. इसके बाद उन्होंने डिजिटल मीडिया की ओर कदम बढ़ाया और बदलते न्यूज़ इकोसिस्टम के अनुरूप खुद को लगातार विकसित किया.

वर्तमान में करुणा तिवारी प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वह बिहार की राजनीति, अपराध, प्रशासन, शिक्षा, रोजगार, मौसम,पर्यटन और समसामयिक मुद्दों पर तथ्यपरक, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित समाचार एवं फीचर लेख तैयार करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर केवल सूचना तक सीमित न रहे, बल्कि पाठकों को उसका व्यापक संदर्भ और प्रभाव भी समझा सके.

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