हड़ताल के दौरान 1.24 करोड़ का भुगतान! 35 पंचायतों में वित्तीय गड़बड़ी की होगी जांच

Author Karuna Tiwari|Edited by karunatiwari
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समाहरणालय की तस्वीर

Siwan News: हड़ताल के दौरान 1.24 करोड़ का भुगतान! 35 पंचायतों में वित्तीय गड़बड़ी की होगी जांच, सीवान जिले में पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान वित्तीय लेन-देन का बड़ा मामला सामने आया है।

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Siwan News: (विवेक कुमार की रिपोर्ट) सीवान जिले में पंचायत सचिवों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के दौरान वित्तीय लेन-देन का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि हड़ताल अवधि में भी ई-पंचायत बिहार और ई-ग्रामस्वराज पोर्टल पर डीएससी (डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट) का उपयोग कर योजनाओं का भुगतान किया गया। इस दौरान करीब 1.24 करोड़ रुपये की राशि 35 पंचायतों में जारी हुई। मामले को गंभीर मानते हुए पंचायती राज विभाग ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

पंचायती राज विभाग ने जारी किया आदेश

पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के पत्रांक 37 दिनांक 06 अप्रैल 2026 के अनुसार 08 अप्रैल 2026 से जिले के सभी पंचायत सचिव अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इसके बावजूद कई पंचायतों में वित्तीय भुगतान किए जाने की सूचना विभाग को मिली है।

विभाग ने इसे सेवा नियमों के विरुद्ध और गंभीर अनुशासनहीनता माना है। आदेश में कहा गया है कि हड़ताल अवधि में किए गए सभी भुगतान की विस्तृत जांच कर रिपोर्ट तैयार की जाए।

35 पंचायतें जांच के दायरे में

जांच के दायरे में जिले के कई प्रखंडों की कुल 35 पंचायतें शामिल हैं। इनमें आंदर प्रखंड के असांव, खेढ़ाय और जमालपुर, बड़हरिया के लकड़ी, चौकी हसन और भलुआड़ा, बसंतपुर के बैजु बरहोगा, राजपुर, कन्हौली और मोलनापुर पंचायत शामिल हैं।

इसके अलावा दरौली के कुंमटी भितौली, गोरेयाकोठी के गोरेयाकोठी और बरहोगा पुरुषोत्तम, हुसैनगंज के हथौड़ा, लकड़ी नबीगंज के लकड़ी और बसौली, महाराजगंज के बलिया, मैरवा के सवेतापुर और बभनौली, नौतन के गंभीरपुर, खलवा और मुरारपट्टी, पचरूखी के सरौती, जसौली और पपौर, सिसवन के रामपुर तथा जीरादेई प्रखंड के बढ़ेया, छोटका मांझा, हसुआ, नरेंद्रपुर, सकरा और चंदौली पंचायतों का नाम शामिल है।

विभाग ने माना गंभीर वित्तीय अनियमितता

जानकारी के अनुसार इन पंचायतों में विभिन्न विकास योजनाओं के तहत हड़ताल अवधि में भुगतान किए गए। कुल वित्तीय लेन-देन करीब 1.24 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है।

विभागीय आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि हड़ताल के दौरान डीएससी साइन कर भुगतान करना न सिर्फ नियमों के खिलाफ है, बल्कि इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जाएगा।

दोषियों पर हो सकती है बड़ी कार्रवाई

विभाग ने सभी मामलों की बारीकी से जांच कर यह पता लगाने का निर्देश दिया है कि किन परिस्थितियों में भुगतान किए गए और इसमें किन अधिकारियों या कर्मियों की भूमिका रही।

अगर जांच में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित पंचायत सचिवों पर बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत अनुशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

डोंगल और डीएससी जमा कराने का निर्देश

विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि हड़ताल पर गए या अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित पंचायत सचिवों के डोंगल और डीएससी तत्काल संबंधित प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी के पास जमा कराए जाएं। इसका उद्देश्य भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकना बताया गया है।

फिलहाल जिला प्रशासन स्तर पर सभी भुगतान और योजनाओं की समीक्षा शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।

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लेखक के बारे में

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करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.

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