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सरयू का जल स्तर कम होने से राहत

Updated at : 17 Aug 2024 9:16 PM (IST)
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सरयू का जल स्तर कम होने से राहत

सरयू नदी के जल स्तर में जहां तेजी से कमी हो रहा है. निचले इलाकों में घुसे बाढ़ का पानी तेजी से निकल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ से मकानों, झोपड़ियों, पशुओं, फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है. जल संसाधन विभाग के जेइ सुनील कुमार पंडित ने बताया कि शनिवार को सरयू नदी का जल स्तर 60.91 मीटर था. जो तीन दिनों में सबसे निचले स्तर पर आ गया है.

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गुठनी. सरयू नदी के जल स्तर में जहां तेजी से कमी हो रहा है. निचले इलाकों में घुसे बाढ़ का पानी तेजी से निकल रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ से मकानों, झोपड़ियों, पशुओं, फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है. जल संसाधन विभाग के जेइ सुनील कुमार पंडित ने बताया कि शनिवार को सरयू नदी का जल स्तर 60.91 मीटर था. जो तीन दिनों में सबसे निचले स्तर पर आ गया है. उन्होंने बताया कि विभाग गोगरा तटबंध से लेकर सिसवन तक लगातार नजर रखे हुए हैं. उन्होंने कहा कि सरयू का जल स्तर लगातार कम होता चला जायेगा. ग्रामीण बदबूदार पानी और उसके दुर्गंध से परेशान सरयू नदी के जल स्तर भले ही कम हो गया है. लेकिन पानी कम होने के बाद ग्रामीण इलाकों में बदबूदार पानी और उसके दुर्गंध से ग्रामीण परेशान है. ग्रामीणों की माने तो पानी सूखने के बाद दुर्गंध आ रही है. ग्रामीणों का कहना है की इससे संक्रमित बीमारियां गांव में तेजी से फैल सकती हैं. वही गांव में बाढ़ के बाद मलेरिया, टाइफाइड, खांसी, सर्दी और बुखार से लोग परेशान नजर आ रहे हैं. ग्रामीणों ने स्थानीय अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के कर्मियों से बाढ़ ग्रस्त इलाकों में सफाई अभियान चलाने की अपील किया है. दर्जनों घरों में गया था बाढ़ का गंदा पानी सरयू नदी में आई बाढ़ से जहां दो दर्जन से अधिक घरों को नुकसान पहुंचा है. जिससे लगे पानी से लोगों को काफी असुविधा हो रही हैं. उनके घरों के अंदर लगे पानी से जहां बदबू, कीचड़, पानी, जलजमाव, विषैले जानवर, सांप घूम रहे हैं. वहीं ग्रामीणों को चिंता इस बात की है कि किसी तरह के संक्रमण फैलने से उनको और परिजनों को काफी असुविधा होगी. स्थानीय लोगों को सता रही है खेती की चिंता सरयू नदी के बढ़े जल स्तर के कारण आगामी खेती पर भी इसका काफी असर पड़ेगा. किसानो को चिंता इसकी है कि खेतों में बोते समय गेहूं, सरसों, आलू, गोभी, लहसुन, मुल्ली, प्याज की खेती काफी पिछड़ जाएगी. वही निचले इलाकों में जलजमाव के बाद गेहूं की फसल बोना असंभव सा लगता है. जिससे कई किसानों के सामने भुखमरी की स्थिति भी आ जाएगी. स्थानीय लोगों को चिंता इस बात की भी सता रही है की खेतों में लगे पानी से लगने वाले फसलें भी सड़ जायेंगी जिससे किसानों को घाटा लगेगा. कार्यपालक पदाधिकारी मदन चंद्र चौधरी ने बताया कि सरयू का जलस्तर में लगातार कमी हो रहा है. बावजूद हमारी टीम लगातार नजर बनाई हुई हैं. हमने आज भी गोगरा तटबंध से लेकर सिसवन तक नजर रखे हुए हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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