सीवान: पिंजरे में कैद पक्षियों को खरीदकर आजाद करते हैं सीवान के सचिन राज, जानें उनकी अनोखी कहानी

पिंजड़ों से पक्षियों को आजाद करते सचिन राज
सीवान के सचिन राज पिंजरे में कैद पक्षियों को खरीदकर खुले आसमान में आजाद कर देते हैं. बरौनी रिफाइनरी में मैकेनिकल इंजीनियर सचिन का पक्षी प्रेम बना मिसाल.
सीवान: पिंजरे में कैद पक्षियों की बेचैन फड़फड़ाहट हर किसी को दिखाई नहीं देती, लेकिन कुछ दिल ऐसे भी होते हैं जो बेजुबानों की खामोश पुकार सुन लेते हैं. सीवान शहर के तरवारा मोड़ निवासी सचिन राज ऐसे ही संवेदनशील इंसान हैं, जिनका पक्षियों के प्रति प्रेम अब महज शौक नहीं, बल्कि उनकी पहचान और जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है. बरौनी रिफाइनरी में मैकेनिकल इंजीनियर के पद पर कार्यरत सचिन जब भी पिंजरे में बंद पक्षियों को बिकते देखते हैं, उन्हें आजाद कराने की कोशिश करते हैं.
पिंजरे में पक्षी दिखे तो खरीद लेते हैं
सचिन राज बताते हैं कि जब भी वह किसी को पिंजरे में बंद पक्षियों को बेचते हुए देखते हैं, उनका मन बेचैन हो जाता है. वह बिना देर किये उन पक्षियों को खरीद लेते हैं और उन्हें खुले आसमान में उड़ने के लिए आजाद कर देते हैं.
पिंजरे का दरवाजा खुलते ही पक्षी पंख फैलाकर आसमान की ओर उड़ जाते हैं. इस पल को देखकर सचिन के चेहरे पर जो संतोष दिखाई देता है, वही उनके इस अनोखे प्रयास का सबसे बड़ा पुरस्कार है.
‘पहले शौक था, अब आदत बन गयी’
सचिन राज कहते हैं, “यह पहले सिर्फ एक शौक था, लेकिन अब मेरी आदत बन गयी है. किसी बेजुबान को आजाद होते देख जो सुकून मिलता है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. पक्षियों को खुले आसमान में उड़ते देखकर मन को शांति मिलती है और लगता है कि मैंने किसी जीव के जीवन में खुशी का एक पल जोड़ दिया.”
उनका कहना है कि पक्षियों को आजाद करना उनके लिए किसी औपचारिक अभियान का हिस्सा नहीं है. जब भी मौका मिलता है, वह अपनी क्षमता के अनुसार पिंजरे में कैद पक्षियों को खरीदकर उन्हें मुक्त कर देते हैं.
पक्षियों को आजादी देने के साथ समाज को संदेश
सचिन राज की यह पहल केवल पक्षियों को पिंजरे से मुक्त करने तक सीमित नहीं है. उनका यह प्रयास समाज को जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील होने का संदेश भी देता है.
उनका मानना है कि संवेदनशीलता और करुणा केवल इंसानों तक सीमित नहीं होनी चाहिए. हर जीव को स्वतंत्र और सुरक्षित जीवन जीने का अधिकार है. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जहां लोग अक्सर अपने आसपास की परेशानियों पर भी ध्यान नहीं दे पाते, वहीं सचिन का यह छोटा-सा प्रयास जीव प्रेम और इंसानियत की बड़ी मिसाल पेश करता है.
खुले आसमान में उड़ते पक्षियों में देखते हैं सुकून
जब पिंजरे से आजाद होकर पक्षी खुले आसमान में उड़ते हैं तो सचिन के लिए वह पल बेहद खास होता है. उनके अनुसार, पक्षियों की आजादी देखकर उन्हें जो मानसिक संतोष मिलता है, वह किसी अन्य उपलब्धि से कम नहीं.
सचिन राज की कहानी यह संदेश देती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े अभियान की जरूरत नहीं होती. किसी बेजुबान जीव के प्रति दिखाई गयी छोटी-सी करुणा भी इंसानियत की बड़ी तस्वीर पेश कर सकती है.
पक्षियों के खुले आसमान में उड़ने के साथ सिर्फ उनके पंख नहीं फैलते, बल्कि यह विश्वास भी मजबूत होता है कि दया, करुणा और जीव प्रेम आज भी समाज में जिंदा हैं.
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