सीवान में नगर परिषद कर्मियों की हड़ताल, 260 टन कचरा सड़कों पर जमा

नगर परिषद कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करते कर्मी
सीवान में नगर परिषद कर्मियों की बेमियादी हड़ताल के दूसरे दिन सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप रही. दो दिनों में करीब 260 टन कचरा जमा हो गया. बारिश से लोगों की परेशानी बढ़ी.
विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट सीवान: नगर परिषद कर्मियों की बेमियादी हड़ताल का असर शुक्रवार को दूसरे दिन और गंभीर हो गया. दोपहर में हुई बारिश ने शहरवासियों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी. नगर परिषद के अनुसार, शहर से प्रतिदिन करीब 130 टन कचरा उठाया जाता है. सफाई कार्य लगातार दो दिनों से पूरी तरह बंद रहने के कारण करीब 260 टन कचरा शहर की सड़कों, बाजारों और मुहल्लों में जमा हो गया है. बारिश के बाद सड़कों पर फैले कूड़े से दुर्गंध फैलने लगी और लोगों को आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
घर-घर कचरा उठाव बंद, मुहल्लों में लगे कूड़े के ढेर
बिहार लोकल बॉडीज इम्प्लाइज फेडरेशन के आह्वान पर नियमितीकरण समेत तीन सूत्री मांगों को लेकर नगर परिषद कर्मियों की बेमियादी हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रही. सुबह से ही घर-घर कचरा संग्रहण पूरी तरह बंद रहा. कचरा उठाने वाली गाड़ियां नहीं निकलने के कारण लोगों ने घरों के बाहर ही कचरा जमा कर दिया. इससे शहर के कई मुहल्लों में गंदगी का अंबार लग गया.
बारिश के कारण स्थिति और खराब हो गयी. कूड़े के ढेर में पानी जमा होने से दुर्गंध फैलने लगी. राहगीरों और दुकानदारों को गंदगी के बीच आवाजाही करनी पड़ी. लोगों का कहना है कि यदि हड़ताल जल्द समाप्त नहीं हुई तो शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है.
प्रमुख चौक-चौराहों पर कचरे का अंबार
हड़ताल का सबसे अधिक असर शहर की सफाई व्यवस्था पर देखने को मिला. बड़हरिया स्टैंड, गौशाला रोड, महादेवा रोड, वीएम उच्च विद्यालय के सामने, सदर अस्पताल के सामने, नया बाजार, शांतिवट वृक्ष, डीएवी मोड़, चिकटोली मोड़, थाना रोड और स्टेशन मोड़ समेत कई प्रमुख स्थानों पर कचरे का अंबार लगा रहा.
बाजारों और मुख्य सड़कों पर पूरे दिन कचरा नहीं उठाये जाने से लोगों को दुर्गंध और गंदगी के बीच आवाजाही करनी पड़ी. बारिश के बाद कई जगहों पर कूड़ा सड़क पर फैल गया, जिससे राहगीरों के साथ-साथ वाहन चालकों को भी परेशानी हुई.
कर्मियों ने जुलूस निकालकर किया प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नारेबाजी
हड़ताल के दौरान नगर परिषद कर्मियों ने शहर के विभिन्न इलाकों में जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया. संगठन का आरोप है कि कई बार आंदोलन और वार्ता के बावजूद सरकार की ओर से केवल आश्वासन दिया गया, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया गया.
कर्मियों ने कहा कि मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष किया जा रहा है. इसके बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने के कारण उन्हें बेमियादी हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है.
नगर परिषद कार्यालय में भी कामकाज ठप
हड़ताल का असर नगर परिषद कार्यालय के कामकाज पर भी देखने को मिला. सभी विभागों के कर्मचारी कामकाज छोड़कर आंदोलन में शामिल रहे. अधिकांश कमरों में ताले लटके रहे.
नगर परिषद कार्यालय पहुंचे लोगों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, होल्डिंग टैक्स भुगतान, भवन नक्शा स्वीकृति समेत अन्य जरूरी सेवाओं का लाभ नहीं मिल सका. कई लोग काम नहीं होने के कारण वापस लौट गये. इससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
बारिश के बीच संक्रमण और बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर परिषद कर्मियों की हड़ताल लंबी चली तो बरसात के मौसम में संक्रमण और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. जगह-जगह जमा कचरे से दुर्गंध फैलने के साथ मच्छरों और अन्य कीटों का प्रकोप भी बढ़ने की आशंका है.
लोगों ने नगर परिषद और जिला प्रशासन से जल्द से जल्द सफाई व्यवस्था बहाल कराने और शहर में जमा कचरे का उठाव कराने की मांग की है.
नियमितीकरण समेत तीन प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन
यूनियन नेता अमित कुमार गोंड ने कहा कि नगर निकाय कर्मी वर्षों से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक केवल आश्वासन ही मिलता रहा है. उन्होंने कहा कि वर्षों से कार्यरत सफाई कर्मियों, दैनिक वेतनभोगी, संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मियों का नियमितीकरण उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है.
उन्होंने आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त कर नगर निकाय के माध्यम से सीधे वेतन भुगतान करने तथा राज्य सरकार के कर्मचारियों की तर्ज पर एसीपी, एमएसीपी सहित सभी सेवागत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी रखी.
अमित कुमार गोंड ने स्पष्ट कहा कि जब तक सरकार इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक नगर परिषद कर्मियों की बेमियादी हड़ताल जारी रहेगी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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