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कैदियों तक पहुंची सुमन की योग पाठशाला

Updated at : 20 Jun 2024 11:35 PM (IST)
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कैदियों तक पहुंची सुमन की योग पाठशाला

यूं ही कोई सुमन नहीं बन जाता.कल तक घर के चौखट तक सिमटी रहनेवाली सुमन अब योग की पाठशाला चलाती हैं. भागदौड़ भरी जिंदगी में योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की सुमन हमेशा अपील करती हैं.उनकी यह कोशिश शहर के चंद मोहल्लों तक ही सिमटी नहीं रही.पिछले चार वर्षों से सुमन की सीवान के मंडल कारागार में योग की पाठशाला चलती है.जहां कैदियों को योगासन कराने के साथ ही हर योग क्रिया का सेहत के साथ जुड़े रिश्तों को भी बताती हैं.

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जितेंद्र उपाध्याय सीवान.यूं ही कोई सुमन नहीं बन जाता.कल तक घर के चौखट तक सिमटी रहनेवाली सुमन अब योग की पाठशाला चलाती हैं. भागदौड़ भरी जिंदगी में योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने की सुमन हमेशा अपील करती हैं.उनकी यह कोशिश शहर के चंद मोहल्लों तक ही सिमटी नहीं रही.पिछले चार वर्षों से सुमन की सीवान के मंडल कारागार में योग की पाठशाला चलती है.जहां कैदियों को योगासन कराने के साथ ही हर योग क्रिया का सेहत के साथ जुड़े रिश्तों को भी बताती हैं. 21 जून, अर्थात अंतरराष्ट्रीय योग दिवस.पहली बार 2015 में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरूआत हुयी.11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र के 177 सदस्यों ने योग दिवस मनाने को अपनी मंजूरी दी थी..इसी योग क्रिया से जुड़ी हैं शहर के आनंद नगर की रहनेवाली सुमन गुप्ता. वरिष्ठ अधिवक्ता रामएकबाल गुप्ता की धर्मपत्नी सुमन पिछले एक दशक से योग को अपने जीवन का हिस्सा बना चुकी है.कॉलेज के दिनों में ही योग के प्रति झुकाव का नतीजा है कि गायत्री पीठ हनुमान मंदिर से वर्ष 2012-13 में ही योग क्रिया से जुड़ गयी. देश में प्राकृतिक चिकित्सालय के रूप में विख्यात गोरखपुर आरोग्य मंदिर से जुड़कर योग पद्धति को अपनाया. वर्ष 2021-22 में महर्षि दयानंद वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट से योग विद्या से जुड़ी डीवाइटी का प्रशिक्षण हासिल की. सुमन गुप्ता कहती हैं कि कभी पढ़ाई के साथ घरेलु जीवन बिताया करती थी. पति रामएकबाल गुप्ता की प्रेरणा से मैंने योग क्रिया को अपने तक सिमटे रखने के बजाय,एक व्यापक समाज से जोड़ने का संकल्प लिया.अब यह संकल्प एक व्यापक फलक में स्थान ले चुका है.शहर के कई हिस्सों में योग क्रिया के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिये शिविर में हिस्सा लेती हूं.इसके अलावा जेल प्रशासन के आग्रह पर मंडल कारा में बंद कैदियों के बीच भी योग शिविर आयोजित कर जीवन में योग क्रिया की जरूरत को बताती हूं.यह कार्य पिछले वर्ष 2021 से कर रही हूं.खास बात यह है कि इन शिविरों को नि:शुल्क आयोजित करती हूं.बिना किसी अर्थ की इच्छा लिये ऐसे कार्य को सेवा का माध्यम बनाने से जो शकुन मिलता है,वह कही अन्य नहीं.

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