पंचायतों के तकनीकी सहायकों के प्रमाण-पत्रों की होगी जांच, सत्यापन तक नहीं लिया जाएगा काम

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तकनीकी सहायकों के प्रमाण-पत्रों की होगी जांच, सत्यापन जरूरी

प्रतीकात्मक तस्वीर

Siwan News : पंचायतों में कार्यरत तकनीकी सहायकों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की जांच के आदेश जारी किए गए हैं. फर्जी पाए जाने पर होगी कार्रवाई, साथ ही सेवा अवधि का भी विस्तार किया गया है.

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सीवान से विवेक कुमार सिंह की रिपोर्ट Siwan News : पंचायतों में कार्यरत तकनीकी सहायकों की नियुक्ति में फर्जी शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पंचायती राज विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि जिले में कार्यरत तकनीकी सहायकों के शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों का संबंधित संस्थानों से सत्यापन कराया जाए. सत्यापन पूरा होने तक किसी भी तकनीकी सहायक से कार्य नहीं लिया जाएगा.

फर्जी प्रमाण-पत्र मिलने पर होगी कार्रवाई

पंचायती राज विभाग के निदेशक नवीन कुमार सिंह ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया है. पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यदि जांच के दौरान किसी तकनीकी सहायक का शैक्षणिक प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

नियमित नियुक्ति तक बढ़ाई गई सेवा अवधि

विभाग ने तकनीकी सहायकों और लेखापाल-सह-आईटी सहायकों की सेवा अवधि भी एक अप्रैल 2026 से बढ़ाने का निर्णय लिया है. नियमित नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने तक दोनों पदों पर कार्यरत कर्मियों की सेवाएं जारी रहेंगी.

विभाग के अनुसार पंचायतों में केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग की योजनाओं के अलावा पंचायत सरकार भवन, मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना और मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना समेत कई विकास कार्य संचालित हो रहे हैं. इन योजनाओं के तकनीकी संचालन, निगरानी, मापी, अभिलेख संधारण और लेखा-जोखा में तकनीकी सहायक तथा लेखापाल-सह-आईटी सहायक की महत्वपूर्ण भूमिका है.

संतोषजनक कार्य करने वालों को ही मिलेगा सेवा विस्तार

विभाग ने स्पष्ट किया है कि सेवा विस्तार का लाभ केवल उन्हीं कर्मियों को मिलेगा, जिनका कार्य संतोषजनक पाया जाएगा. संबंधित जिलाधिकारी उनके कार्यों की समीक्षा के बाद ही सेवा विस्तार का आदेश जारी करेंगे. तकनीकी सहायकों की सेवा पंचायती राज अभियंत्रण संगठन के गठन अथवा 16वें वित्त आयोग या सप्तम राज्य वित्त आयोग की पुरस्कार अवधि पूरी होने तक, जो पहले होगा, जारी रहेगी. वहीं लेखापाल-सह-आईटी सहायकों की सेवा नियमित निम्नवर्गीय लिपिकों की नियुक्ति या संबंधित आयोग की अवधि समाप्त होने तक बढ़ाई गई है.

2018 में हुई थी संविदा पर नियुक्ति

गौरतलब है कि वर्ष 2018 में मुख्यमंत्री ग्रामीण गली-नाली पक्कीकरण निश्चय योजना और मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के लिए राज्यभर में 2,096 तकनीकी सहायकों तथा 2,095 लेखापाल-सह-आईटी सहायकों की संविदा पर नियुक्ति की गई थी. वर्तमान में पंचायतों में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं के प्रभावी संचालन और निगरानी में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए विभाग ने नियमित नियुक्ति होने तक इनकी सेवाएं जारी रखने का निर्णय लिया है.

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