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36 घंटे में 110 एमएम से अधिक हुई बारिश

Updated at : 29 Sep 2024 9:00 PM (IST)
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36 घंटे में 110 एमएम से अधिक हुई बारिश

धान की फसल को लेकर चिंतित किसानों को तीन दिनों से रुक रुक कर हो रही झमाझम बारिश से राहत मिल गई है. .धान के लिए अनुकूल मौसम मिलने से फसल लहलहा उठी है.मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक विगत 36 घंटे में 110 एमएम बारिश हुई है. इससे खेतों में लगी धान की फसल में हरियाली लौट आई है.

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सीवान. धान की फसल को लेकर चिंतित किसानों को तीन दिनों से रुक रुक कर हो रही झमाझम बारिश से राहत मिल गई है. .धान के लिए अनुकूल मौसम मिलने से फसल लहलहा उठी है.मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक विगत 36 घंटे में 110 एमएम बारिश हुई है. इससे खेतों में लगी धान की फसल में हरियाली लौट आई है.जिला कृषि कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार इस खरीफ सीजन में जिले के 124495.94 हेक्टेयर में खरीफ का लक्ष्य निर्धारित किया गया था.वही धान के लिए 100268.69 हेक्टेयर लक्ष्य रखा गया है. मौसम की बेरुखी के बावजूद भी किसानों ने हार नही मानी और लक्ष्य के विरुद्ध शत प्रतिशत खेतों में धान की बुआई किया है. लेकिन मौसम की बेरुखी के कारण अब धान का पौधा खराब होने के कगार थे.मौसम विभाग के मुताबिक सितम्बर माह में सामान्य वर्षापात 146 एमएम होती है.इस बार 22 सितंबर तक मात्र 42 एमएम ही बारिश हुई थी. अब बारिश की भरपाई हो गयी है. किसानों का कहना है कि यह बारिश फसलों के लिए बहुत फायदेमंद है. धान की फसल को भरपूर पानी नहीं मिलने से रोग लगने का खतरा बढ़ गया था.रोग के प्रकोपों से फसल को निजात मिलेगी. हस्त नक्षत्र की बारिश फसलों के लिए वरदान हस्त नक्षत्र की बारिश फसल के लिए उपयोगी होती है.कृषि विशेषज्ञ डॉ मनोज कुमार गिरी कहते है कि हस्त नक्षत्र की बारिश से जहां धान के पकने तक में नमी बनी रहती है.वहीं रबी के फसलों के लिए भी लाभदायक होती है.हस्त नक्षत्र से ही ठंड की शुरुआत मानी जाती है. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी हस्त नक्षत्र की बारिश काफी महत्वपूर्ण होती है.हथिया नक्षत्र में हुई बारिश से धान की फसलों में लगने वाले रोगों से काफी छुटकारा मिला है. बदलते मौसम में सेहत का रखे ख्याल बदलते मौसम में मौसमी बीमारियों का कोप बढ़ जाता है.ऐसे में लोगों को सेहत के प्रति सतर्क रहना आवश्यक है. चिकित्सकों का कहना है कि इस तरह के मौसम में बच्चों व बुजुर्गों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए. मौसम बदलने पर सबसे अधिक संक्रमण का खतरा बच्चों व बुजुर्गों को ही रहता है. इनमे सर्दी, खांसी और बुखार के मामले तेजी से बढ़ते है. चिकित्सक डॉ संजय गिरि ने बताया कि हाल के दिनों में लोग मौसमी बीमारियों के चपेट में आ रहे हैं. सरकारी अस्पतालों से अधिक भीड़ निजी अस्पतालों में हो रही है. बारिश से सड़कों पर भरा पानी, आवागमन में परेशानी जिले के कई बाजारों में हल्की बारिश होने पर सड़क पर पानी लग जाता है. जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण ऐसी समस्या उत्पन्न होती है.जिससे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.सड़क पर जल जमाव से जिलावासी परेशान दिखे. जिले के अधिकांश सड़कों के किनारे नाला का निर्माण किया गया है.लेकिन आउटलेट सही नहीं होने के कारण बारिश का पानी सड़कों पर ही कई-कई दिनों से जमा रह जाता है.

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