बिहार में लागू हुई रैयती भूमि क्रय नीति, डीएम और प्रमंडलीय आयुक्त को मिला यह पावर

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जमीन मापी की तस्वीर (AI फोटो)

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Bihar Revenue Department: बिहार में रैयती भूमि क्रय नीति लागू कर दी गई है. इसके लागू होने के बाद डीएम 100 करोड़ रुपये जबकि प्रमंडलीय आयुक्त 100 करोड़ से अधिक की जमीन का अधिग्रहण कर सकेंगे. इसके लिए डीएम और प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है.

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Bihar Revenue Department: बिहार में लोगों की जरूरत और उनके उपयोग के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर एक कमेटी बनाई गई है. कई परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की जरूरत पड़ती है. ऐसे में इसके लिए खर्च होने वाली राशि के अनुसार डीएम और प्रमंडलीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी राजस्व विभाग की ओर से बनाई गई है.

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100 करोड़ की जमीन डीएम कर सकेंगे अधिग्रहण

जानकारी के मुताबिक, बिहार में डीएम 100 करोड़ रुपये जबकि प्रमंडलीय आयुक्त 100 करोड़ रुपये से अधिक की जमीन का अधिग्रहण कर सकेंगे. इसे लेकर बिहार रैयती भूमि क्रय नीति 2026 लागू कर दी गई है. इस नीति में परियोजना में लागत के मुताबिक, उसकी कैटेगरी बनाई गई है.

इस तरह खरीदी जा सकेगी जमीन

वैसी परियोजनाएं जिसमें परियोजना के लिए क्रय की जाने वाली जमीन की कीमत 100 करोड़ रुपये तक है, इसके लिए जिलास्तरीय रैयती भूमि क्रय समिति बनाई गई है. इसका अध्यक्ष डीएम को बनाया गया है. डीएम के अलावा इस समिति में जिला भू-अ पदाधिकारी, भवन या पथ निर्माण के कार्यपालक अभियंता, उपविकास आयुक्त और जिला वन/कृषि पदाधिकारी भी सदस्य हैं.

जानकारी के मुताबिक, जिस संस्थान या फिर विभाग के लिए जमीन अधिग्रहण किया जाएगा, उनकी तरफ से नामित अधिकारी ही सदस्य सचिव होंगे. जिला स्तर पर बनाई गई समिति की जमीन खरीदने के लिए प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त को भेजेंगे. इसके बाद उस प्रस्ताव पर मंजूरी प्रमंडलीय आयुक्त 15 दिन में देंगे.

लेकिन जिस भी परियोजना के लिए 100 करोड़ रुपये से अधिक का जमीन अधिग्रहण करना हो, उसके लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है. इस कमेटी में समाहर्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी, जिला अवर निबंधक, भवन या पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता सदस्य होंगे. इस स्थिति में प्रमंडलीय समिति की ओर से जमीन खरीदने के लिए संबंधित विभाग को प्रस्ताव भेजना होगा, जिस पर मंजूरी दी जाएगी.

क्या है नई नीति का उद्देश्य?

बताया जा रहा है कि परियोजनाओं के समय पर पूरा करने के लिए विभाग की ओर से यह नीति लाई गई है. विभाग की तरफ से जारी अधिसूचना में यह बताया गया है कि कई बार केंद्र या फिर राज्य सरकार के विभागों या निकायों का उनकी परियोजनाओं के लिए रैयती जमीन की जरूरत पड़ती है. ऐसी स्थिति में जमीन अधिग्रहण में कई बार काफी ज्यादा समय लग जाता है. इस समय को बचाने और तय समय में परियोजना के पूरा होने को लेकर नई नीति लाई गई है.

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