सहरसा के चैनपुर का प्राचीन मां काली मंदिर, जहां श्रद्धा के साथ पूरी होती है हर मनोकामना
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 10 Jun 2026 8:49 AM
चैनपुर का प्राचीन मां काली मंदिर
Aaj Ka Darshan : कोसी क्षेत्र में एक ऐसा शक्ति पीठ है जहां हर दिन भक्तों का तांता लगा रहता है. सहरसा के चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर की धार्मिक महत्ता, इतिहास और आस्था की कहानी जानिए. नवरात्र, अमावस्या और काली पूजा पर यहां उमड़ती है श्रद्धालुओं की भारी भीड़.
सहरसा से विनय कुमार मिश्र की विशेष रिपोर्ट.
Aaj Ka Darshan : सहरसा जिले के चैनपुर स्थित प्राचीन मां काली मंदिर वर्षों से श्रद्धा, शक्ति साधना और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. कोसी क्षेत्र समेत आसपास के कई जिलों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर मां काली की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. मंदिर की प्राचीनता, यहां की धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक वातावरण इसे क्षेत्र के प्रमुख शक्ति स्थलों में शामिल करते हैं.
मां काली की भक्ति से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
चैनपुर का यह प्राचीन मंदिर लंबे समय से स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र रहा है. हालांकि अब यहां दो काली मंदिर मौजूद हैं, लेकिन पुराना मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है. स्थानीय लोगों के अनुसार यहां मां काली की पूजा विशेष विधि-विधान और परंपराओं के साथ की जाती है. यही कारण है कि दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं.
मंदिर में प्रवेश करते ही महसूस होती है आध्यात्मिक शांति
मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव होता है. सुबह और शाम होने वाली आरती में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं. घंटियों की गूंज, मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देती है. श्रद्धालु यहां परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं.
नवरात्र और अमावस्या पर उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब
नवरात्र, काली पूजा और अमावस्या के अवसर पर मंदिर का नजारा बेहद भव्य हो जाता है. इन विशेष अवसरों पर हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. पूरे दिन पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है. शाम की महाआरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं.
विशेष अवसरों पर मां काली का भव्य श्रृंगार किया जाता है और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न होती है. दीपावली और काली पूजा के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जो क्षेत्र की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाते हैं.
श्रद्धा के साथ पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र
चैनपुर स्थित मां काली मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि स्थानीय पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां आने वाले श्रद्धालु मंदिर की प्राचीन परंपराओं, धार्मिक मान्यताओं और शांत वातावरण का अनुभव करते हैं. हाल के वर्षों में श्रद्धालुओं की सुविधा और साफ-सफाई को लेकर भी कई कार्य किए गए हैं, जिससे यहां आने वाले लोगों को बेहतर व्यवस्था मिल रही है.
मां के दरबार से खाली नहीं लौटता कोई भक्त
स्थानीय लोगों का दृढ़ विश्वास है कि मां काली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. यही विश्वास हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को इस प्राचीन मंदिर तक खींच लाता है. मां काली की कृपा और मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण इसे कोसी क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक बनाता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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