सीवान : अपनों के बीच ही बेगाने हुए शहीद हरेकृष्ण राम
Updated at : 26 Jul 2019 7:30 AM (IST)
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सीवान :कारगिल युद्ध को 20 साल गुजर गए हैं. जब यह युद्ध छिड़ा तब सैकड़ों वीर जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे. हम बात कर रहे हैं हसनपुरा प्रखंड के महुवल-महाल निवासी हरे कृष्ण राम की जो 5 जुलाई 1999 को कारगिल में दुश्मनों से लोहा […]
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सीवान :कारगिल युद्ध को 20 साल गुजर गए हैं. जब यह युद्ध छिड़ा तब सैकड़ों वीर जवानों ने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे.
हम बात कर रहे हैं हसनपुरा प्रखंड के महुवल-महाल निवासी हरे कृष्ण राम की जो 5 जुलाई 1999 को कारगिल में दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हो गये थे. देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों को न्योछावर करने वाले शहीद आज अपनों के बीच ही बेगाने हो गए हैं. हाल यह है कि शहादत के 20 वर्ष बाद ही कारगिल शहीद व हसनपुरा प्रखंड के महुअल महाल निवासी हरे कृष्ण राम भुला दिये गये. प्रतिमा स्थल आज भी उपेक्षित नजर आती है.
12 जुलाई 1999 को तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने शहीद के पैतृक निवास महुवल-महाल पहुंचकर उनके परिजनों का ढांढस बढ़ाया. गांव में बिजली, स्वास्थ्य केंद्र खोलने व समाधि स्थल पर प्रतिमा लगाने की घोषणा धरी रह गयी. एक-दो वर्षों तक तो बड़े पदाधिकारी या जनप्रतिनिधि कारगिल दिवस, स्वतंत्र दिवस एवं गणतंत्र दिवस पर फूल माला चढाकर औपचारिकता पूरी की. परंतु अब तो औपचारिकता भी नहीं रही.
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