हाइ स्पीड व ओवरलोडेड वाहन मौत के सौदागर
Author Prabhat khabar digital desk
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सीवान : जिले की मुख्य सड़कों पर सरपट दौड़ रही हाइ स्पीड व ओवरलोडेड गाड़ियां मौत का सौदागर बन रही हैं. आला अधिकारियों के नाक के नीचे प्रतिदिन दौड़ रही इन गाड़ियों को देख सभी मौन रहते हैं. किसी बड़े हादसे के बाद इन अधिकारियों की क्षणिक आंख खुलती है, फिर अगले हादसे का इंतजार […]
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सीवान : जिले की मुख्य सड़कों पर सरपट दौड़ रही हाइ स्पीड व ओवरलोडेड गाड़ियां मौत का सौदागर बन रही हैं. आला अधिकारियों के नाक के नीचे प्रतिदिन दौड़ रही इन गाड़ियों को देख सभी मौन रहते हैं. किसी बड़े हादसे के बाद इन अधिकारियों की क्षणिक आंख खुलती है, फिर अगले हादसे का इंतजार करते हुए बंद हो जाती है.
सोमवार को सीवान-गोपालगंज मुख्य पथ पर हुए बस हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी है. इस सड़क हादसे में जहां सात लोगों की मौत हो गयी, वहीं दो दर्जन से अधिक लोग घायल हो गये. जान गंवानेवालों में अधिकतर गोपालगंज जिले के थे.
कमाई के चक्कर में करते हैं ओवरलोडिंग : सरकार द्वारा टैक्स बढ़ोतरी के बाद कमर्शियल गाड़ियों पर आेवरलोडिंग का सिलसिला चल पड़ा है. सोमवार को जिस बस से हादसा हुआ वह 30 सीटर बस थी.
बस में सवार यात्रियों का कहना था कि बस खचाखच भरी थी. जितने लोग बस में सीट पर बैठे थे, तकरीबन उतने ही लोग बस में खड़े थे. यह हाल सिर्फ इसी बस का नहीं है परंतु उन सभी का है जिसका कमर्शियल उपयोग हो रहा है.
जांच के नाम पर परिवहन विभाग द्वारा सिर्फ कोरम पूरा कर दिया जाता है. मैरवा-सीवान, सीवान-गोपालगंज, सीवान-मशरख, सीवान-पचरूखी, सीवान-सिसवन तथा सीवान-आंदर व सीवान बड़हरिया मुख्य मार्ग पर ओवरलोडेड गाड़ियों को आसानी से देखा जा सकता है. इतना ही नहीं बसे की छत पर भी यात्रियों को बैठे हुए देखा जा सकता है.
फिटनेस की समय से नहीं हो रही जांच
दुर्घटना का एक और बड़ा कारण कमर्शियल गाड़ियों के फिटनेस की जांच समय से नहीं होना भी शामिल है. फिटनेस में उन बिंदुओं की जांच की जाती है, जो सुरक्षा मानकों के लिए जरूरी है. सोमवार को जिस बस से हादसा हुआ उसके फिटनेस की समय सीमा इसी महीने बीत चुकी थी. हालांकि गाड़ी का इंश्योरेंस वर्ष 2020 तक था.
पटना से पहुंची टीम ने की जांच
मंगलवार को पटना से पहुंची रोड सेफ्टी की टीम ने घटनास्थल की जांच की. एमवीआइ अर्चना कुमारी ने बताया कि विभाग के पदाधिकारी मणि ठाकुर ने उन सभी बिंदुओ की जांच की, जो हादसे के कारण हो सकते हैं. हालांकि विभाग के पदाधिकारी ने भी हादसे का कारण हाइ स्पीड ही बताया. टायर फटने के बाद चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख पाया था.
हाइ स्पीड पर नहीं है लगाम
ओवरलोडेड के साथ- साथ गाड़ियों के हाइ स्पीड पर भी विभाग लगाम लगाने में विफल है. पहले जहां गाड़ियों की अधिकतम स्पीड 40 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर 60 किलो मीटर प्रति घंटा कर दिया गया है. इसका ध्यान चालक नहीं रख रहे हैं.
सड़क बनने के बाद बस हो या कोई अन्य गाड़ियां इससे अधिक स्पीड से दौड़ते आसानी से देखा जा सकता है. सोमवार को जिस बस ने हादसा किया, उसकी स्पीड भी अधिक था. यात्रियों की माने तो बसे की स्पीड अधिक नहीं होती तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश बेअसर
सड़क हादसों की लगातार बढ़ती संख्या पर कोर्ट ने चिंता जताते हुए सात बिंदुओं की गाइड लाइन दिसंबर माह में जारी की है. इसमें मालवाहक वाहनों में सवारी नहीं ढोना सहित अन्य बिंदुओं पर गाइडलाइन जारी की गयी है.
आदेश में मालवाहक वाहन में ओवरलोड या सवारी पाये जाने की स्थिति में लाइसेंस निरस्त करने की बात कही गयी है लेकिन अभी बराती सीजन में सारे नियम- कायदे का माखौल उड़ता नजर आ रहा है. बरातियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए ऐसे वाहनों का धड़ल्ले से उपयोग हो रहा है परंतु विभाग कार्रवाई करने में विफल साबित हो रहा है.
क्या कहते हैं पदाधिकारी
सड़कों की स्थिति अच्छी होने के बाद ओवर स्पीडिंग से हादसे बढ़े हैं. विभाग ससमय जांच कर कार्रवाई कर रहा है. विभाग अभियान चलाकर कमर्शियल सहित अन्य गाड़ियों के फिटनेस की जांच जल्द ही शुरू करेगा.
गाड़ियों की उम्र औसतन 15 वर्ष
विभाग के अनुसार गाड़ियों की अधिकतम उम्र 15 वर्ष निर्धारित की गयी है. यदि विभाग की बातों पर गौर करें तो 20 वर्ष तक गाड़ियों का उपयोग अमूमन किया जाता है.
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