Sitamarhi : बारिश की चाह में आसमान की ओर लगी हैं टकटकी, जमीन में दरार देख फट रहा किसानों का कलेजा

Updated at : 12 Jul 2025 6:14 PM (IST)
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Sitamarhi : बारिश की चाह में आसमान की ओर लगी हैं टकटकी, जमीन में दरार देख फट रहा किसानों का कलेजा

चारों पहर किसानों की आखें आसमान की ओर पानी की बूंद गिरने की उम्मीद में टकटकी लगाये बैठी हैं.

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पुपरी.

बारिश नही होने से किसानों का बुरा हाल है. चारों पहर किसानों की आखें आसमान की ओर पानी की बूंद गिरने की उम्मीद में टकटकी लगाये बैठी हैं. अब स्थिति यह है कि खेत में दरार देख कर किसानों का कलेजा भी फट रहा है. बताया जाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में धान रोपने का समुचित समय है. सावन मास होने के कारण इस महीने के अंत तक किसान धान रोपनी करने की बात कहते हैं. परंतु बारिश नहीं होने से किसान चिंतित व परेशान हैं. बिना बारिश के बोर्डिंग व पपिंग सेट के सहारे खेत में लगायें गये बिचड़ा पानी के इंतजार में सूख रहे है. धान रोपनी का यही समुचित समय है. किंतु स्थिति यहीं है कि अभी तक 25 फीसदी रोपनी भी नहीं हो सकी है. जो हुआ भी है. वह बारिश नहीं होने के कारण जल रहा है. किसानों ने बारिश नहीं होने के बावजूद जून के पहले व दूसरे सप्ताह में धान का बिचड़ा लगाया. जो सामान्य तौर पर 20 से 25 दिनों में बिचड़ा रोपने लायक हो जाती है. जुलाई का आधा माह समाप्त होने पर है. इस हिसाब से बिचड़ा का उम्र करीब डेढ़ महीने की हो गई है. जो रोपनी करने की स्थिति में भी धान की उत्पादकता दर में कमी तय है. किसान मौसम विभाग के अनुमानों के सहारे अभी भी आशान्वित हैं. किसान इस बार अच्छे मानसून का अनुमान में लगा रखा था. जो निराशा में बदल गई. विगत वर्ष इस समय तक करीब 50 फीसदी से ज्यादा रोपनी हो चुकी थी. इस वर्ष यह आंकड़ा 25 फीसदी भी नहीं पहुंच पाया है. यानी अधिकांश क्षेत्र अभी भी (खाली) परती है. विगत कुछ दिनों से मानसून की सक्रियता बढ़ने से किसानों की आशा0 बढ़ी थी. लेकिन बरसात नहीं होने से निराशा छाती जा रही है. कृषि विभाग प्रतिदिन हालात पर नजर बनाए हुए हैं. स्थानीय जनप्रतिनिधि व किसान मनोज कुमार चौधरी, सरोवर चौधरी, रणधीर कुमार, अवधेश चौधरी व अरविंद कुमार अमित ने सरकार से सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं.

–पंप सेट से भी पानी निकलना हो रहा मुश्किल

रीगा. धान की रोपनी का अधिकांश समय सुखाड़ में बित गया. आषाढ़ माह की बारिश से धान की रोपनी होती है. लेकिन इस बार पूरे आषाढ़ माह में प्रकृति ने किसानों के साथ धोखा किया है. अभी तक 70% खेतों में धान की रोपनी निजी पंप सेट से किसान कर चुके हैं. किसान संजीव कुमार चौधरी, पंकज कुमार व कौशल किशोर सिंह आदि ने बताया कि जो किसान धान की रोपनी कर लिए हैं, उनके खेतों में दरारें देखने को मिल रही है. पौधा धीरे-धीरे गर्मी से सूख रहा है. इन किसानों ने कहा कि प्रकृति के बेरुखी से किसान परेशान है. उससे ज्यादा परेशानी सरकार के घोषणा से होती है. सुखाड़ की स्थिति में कोई सरकारी अनुदान नहीं मिल पाता है. कभी-कभी अगर अनुदान का बटवारा होता भी है तो कृषि विभाग के कर्मचारी लोग लोभवश चहेते लोगों को अनुदान दे देते है. वर्तमान समय में खेतों की स्थिति अत्यंत भयावह है. किसानों का कहना है कि जमीन के अंदर में पानी भी कम हो गया है. पंप सेट से भी पानी का निकलना बहुत कठिन हो गया है.. आने वाले दिनों में किसान खेती कैसे करेंगे लगातार इसकी चिंता बढ़ती जा रही है.

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