रून्नीसैदपुर बीडीओ, थानाध्यक्ष के खिलाफ होगी कार्रवाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना

Published at :06 Dec 2016 4:42 AM (IST)
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रून्नीसैदपुर बीडीओ, थानाध्यक्ष के खिलाफ होगी कार्रवाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना

प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी केके शाही ने की कार्रवाई मामला वर्ष 2004 में इंदिरा आवास से संबंधित सूची कोर्ट के मांगे जाने के बाद भी नहीं उपलब्ध कराये जाने का डुमरा कोर्ट : कोर्ट के आदेश की अवहेलना के मामले में रून्नीसैदपुर बीडीओ व थानाध्यक्ष के खिलाफ अब अवमाननावाद की कार्रवाई होगी. वर्ष 2004 में […]

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प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी केके शाही ने की कार्रवाई

मामला वर्ष 2004 में इंदिरा आवास से संबंधित सूची कोर्ट के मांगे जाने के बाद भी नहीं उपलब्ध कराये जाने का
डुमरा कोर्ट : कोर्ट के आदेश की अवहेलना के मामले में रून्नीसैदपुर बीडीओ व थानाध्यक्ष के खिलाफ अब अवमाननावाद की कार्रवाई होगी. वर्ष 2004 में रून्नीसैदपुर थाना के मोड़संड वार्ड दो के बाढ़ पीड़ितों को उपलब्ध कराए गए इंदिरा आवास से संबंधित सूची उपलब्ध नहीं कराये जाने को लेकर प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी केके शाही ने रून्नीसैदपुर बीडीओ व थानाध्यक्ष के खिलाफ उक्त कार्रवाई की है. साथ ही स्पष्टीकरण जारी करते हुए दस दिनों के भीतर जवाब मांगा है.
न्यायाधीश ने दोनों को संबंधित कागजात उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया है. बताते चले की वर्ष 2004 में रून्नीसैदपुर में आयी बाढ़ के दौरान सैकड़ों लोगों का घर दह गया था. सरकार द्वारा पीड़ितों को आवास उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था. सरकारी स्तर पर लोगों को लाभ भी मिला. लेकिन कुछ लोगों को लाभ से वंचित कर दिया गया था. जबकि आवास वितरण में व्यापक पैमाने पर अनियमितता भी बरती गई थी. मोड़संड वार्ड दो निवासी गीता देवी से कागजात पर निशान लेकर उसकी जगह सुनैना देवी को आवास का लाभ दे दिया गया था.
इसके खिलाफ गीता देवी ने कोर्ट में सुनैना देवी व उसके पति राम निरंजन सिंह तथा अन्य के खिलाफ हकीयत वाद दायर किया था. कोर्ट को दिए गए जवाब में विपक्षी सुनैना देवी ने बताया कि उक्त आवास उसी के नाम से आवंटित है. साल 2014 में गीता देवी ने सुनैना देवी व पांच अन्य के विरुद्ध कोर्ट में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था. मामले में कोर्ट के आदेश पर रून्नीसैदपुर थाने में कांड संख्या 478/2014 दर्ज की गई थी. मामले में पुलिस द्वारा कोर्ट में सौंपे गए अंतिम प्रपत्र में तथ्य की भूल बता मामले को समाप्त कर दिया. बाद में गीता देवी ने कोर्ट में दाखिल विरोध पत्र पर मुकदमा को जिंदा रखा. इसी बीच कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए रून्नीसैदपुर बीडीओ से मोड़संड वार्ड दो की इंदिरा आवास की सूची मांगी, लेकिन बीडीओ बेपरवाह रहे. कोर्ट द्वारा बार- बार आदेश के बाद बीडीओ द्वारा उक्त सूची मुंसिफ सीतामढ़ी सदर को भेजी गई है.
कोर्ट ने जब मुंसिफ सीतामढ़ी सदर को पत्र भेजा तो पता चला कि मामले की सुनवाई के बाद उक्त सूची वापिस रून्नीसैदपुर बीडीओ को भेज दी गयी है. इसके बाद कोर्ट ने रून्नीसैदपुर पुलिस को सर्च वारंट निर्गत कर थानाध्यक्ष को बीडीओ कार्यालय से वर्ष 2004 के इंदिरा आवास की सूची जब्त कर कोर्ट को सौंपने का आदेश दिया. बावजूद इसके रून्नीसैदपुर थाना पुलिस भी बेपरवाह रहीं.
लिहाजा मामले की सुनवाई कर रहे प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी केके शाही ने रून्नीसैदपुर बीडीओ व थानाध्यक्ष को कोर्ट के आदेश के अवहेलना के मामले में अवमाननावाद की कार्रवाई का आदेश दिया है. कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को स्पष्टीकरण जारी करते हुए दस दिनों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है. साथ ही वर्ष 2004 की मोड़संड वार्ड दो की इंदिरा आवास की सूची भी उपलब्ध कराने का आदेश दिया है. इससे संबंधित पत्र पुलिस महकमे के वरीय अधिकारियों व उच्च न्यायालय को भेजी गई है.
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