बगैर पढ़ाई के बच्चे देंगे परीक्षा लापरवाही. लाखों नौनिहालों का भविष्य अंधेरे में

Published at :30 Nov 2016 4:24 AM (IST)
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बगैर पढ़ाई के बच्चे देंगे परीक्षा लापरवाही. लाखों नौनिहालों का भविष्य अंधेरे में

डुमरा (सीतामढ़ी) : शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते जिले के लाखों नौनिहालों का भविष्य दावं पर लग गया है. शैक्षणिक सत्र 2016-2017 में नौ महीने बीतने को है, लेकिन न किताब मिली और नहीं बच्चों को पाठ्यक्रम की ही जानकारी मिली. हैरत की बात यह की बगैर शिक्षा ही बच्चों की मूल्यांकन परीक्षा की […]

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डुमरा (सीतामढ़ी) : शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते जिले के लाखों नौनिहालों का भविष्य दावं पर लग गया है. शैक्षणिक सत्र 2016-2017 में नौ महीने बीतने को है, लेकिन न किताब मिली और नहीं बच्चों को पाठ्यक्रम की ही जानकारी मिली. हैरत की बात यह की बगैर शिक्षा ही बच्चों की मूल्यांकन परीक्षा की तैयारी की जा रहीं है.

इतना ही नहीं तीन माह बाद बच्चों की वार्षिक परीक्षा भी होनी है. जाहिर है बच्चों को बगैर पढ़ाई, परीक्षा देने की चुनौती होगी. सरकार व शिक्षा विभाग भले ही व्यवस्था को मजबूत करने के दावे करती है, लेकिन जिले में शिक्षा व्यवस्था की जो तस्वीर है, वह काफी खराब है. स्कूलों में शिक्षक व संसाधनों की कमी आम बात है, लेकिन किताबों की कमी जाहिर करती है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. किताब के अभाव में स्कूल गये बच्चे टाइम पास करते है. बच्चों को बगैर किताब स्कूल जाने की मजबूरी है, जितने बच्चे मजबूर है उससे कहीं अधिक मजबूर व परेशान शिक्षक भी है.
कुछ स्कूलों में शिक्षक पुराने किताब से बच्चों को पढ़ा रहे है, तो कुछ स्कूलों में शिक्षक जैसे-तैसे पढ़ा कर बस पढ़ाई का कोरम पूरा कर रहे है. जिले के सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक नामांकित बच्चों की संख्या 7 लाख 97 हजार 123 है. इनमें महज 3 लाख 33 लाख 297 बच्चों को ही किताबें मिल सकी है. शेष 4 लाख 63 हजार 826 बच्चों को अब तक किताबें नहीं मिल सकी है. हैरत की बात यह कि पहली व दूसरी कक्षा के एक भी बच्चों को किताबें नहीं मिल सकी है. तीसरी से आठवीं तक के बच्चों को किताबें मिली भी है तो पूरे सेट में नहीं. कुछ स्कूलों को तीसरी व चौथी कक्षा की किताबें मिली है तो कुछ स्कूलों को छठी व सातवीं कक्षा की ही किताबें मिल सकी हैं. ध्यान देने वाली बात यह भी है कि सरकारी स्कूल के वर्ग एक से आठ तक के बच्चों की किताब बाजार में नहीं बिकती है.
4,63,826 बच्चे पुस्तकविहीन
जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़नेवाले कुल 7,97,123 बच्चों में से 3,33,297 बच्चों को ही किताबें मिल सकी है, शेष 4,63,826 बच्चे पुस्तक विहीन है. शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों पर गौर करे तो पहली व दूसरी कक्षा के बच्चों को एक भी किताबें नहीं मिल सकी है. तीसरी कक्षा के कुल 119108 बच्चों में से 78898 बच्चों को किताबें मिली है. इसी तरह चौथी कक्षा के 113273 में 76521, पांचवी कक्षा के 109388 में 72312, छठी कक्षा के 84655 में 52163, सांतवी कक्षा के 74530 में 50717 व आठवीं कक्षा के कुल 66618 बच्चों में से 2682 बच्चों को ही किताबें मिल सकी है.
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