डैमेज क्वार्टर में रहती हैं एएनएम स्कूल की छात्रा

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डैमेज क्वार्टर में रहती हैं एएनएम स्कूल की छात्रा फोटो नंबर- 15 भवन की खतरनाक गैलरी, 16 गंदा पानी देने वाला चापाकल, 17 ध्वस्त वर्ग कक्ष, 18 जर्जर कमरे की हाल दिखाती प्राचार्या वर्ष-2011 में भवन निर्माण विभाग खाली करने का दे चुकी है नोटिसडर के साये में जी रही नामांकित 50 छात्राएंखुले में स्नान […]

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डैमेज क्वार्टर में रहती हैं एएनएम स्कूल की छात्रा फोटो नंबर- 15 भवन की खतरनाक गैलरी, 16 गंदा पानी देने वाला चापाकल, 17 ध्वस्त वर्ग कक्ष, 18 जर्जर कमरे की हाल दिखाती प्राचार्या वर्ष-2011 में भवन निर्माण विभाग खाली करने का दे चुकी है नोटिसडर के साये में जी रही नामांकित 50 छात्राएंखुले में स्नान करती हैं छात्राएं प्रतिनिधि, सीतामढ़ी. भवन निर्माण विभाग द्वारा डैमेज क्वार्टर घोषित किये जाने के बाद भी एएनएम का प्रशिक्षण ले रही 50 से अधिक छात्राएं अपनी जिंदगी को दाव पर लगा कर अपनी पढ़ाई पूरी कर रही हैं. डैमेज क्वार्टर में बुनियादी सुविधाओं का भी घोर अभाव है. आधुनिक युग में भी एएनएम की छात्राएं लालटेन युग में जी रही है. वही छात्राएं खुले में चापाकल पर स्नान करने को मजबूर है. शुद्ध पेयजल का अभावनगर के एएनएम प्रशिक्षण विद्यालय की छात्रा भूत बंगला बन चुके खंडहरनुमा भवन मे डर के साये में पढ़ने को मजबूर हैं. यहां तक कि छात्राओं को न पीने का साफ पानी मिल रहा है और न पढ़ने के लिए बिजली मिल रही है. छात्रा हर पल डर के साये में स्कूल में रहती हैं व पढ़ाई करती हैं. वर्ग कक्ष का हाल देख हर कोई हैरान हो जाए. भवन का यह हाल है कि कोई भी व्यक्ति भवन के अंदर प्रवेश करने से डर जाए.एक भी कमरा पढ़ने व रहने लायक नहीं प्रभात खबर की टीम उक्त विद्यालय का हाल जानने पहुंची. वहां मौजूद विद्यालय की प्राचार्या निर्जला कुमारी व ट्यूटर आशा कुमारी के अलावा जिला स्वास्थ्य समिति के मंत्री रामाशंकर सिंह ने स्कूल के एक -एक कमरे का हाल बताते हुए कहा कि भवन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका है. आधा भवन खंडहर बन चुका है, तो आधे मकान का छत गिरने लगा है. विकल्प नहीं होने के कारण डर के साये में स्कूल की करीब 50 छात्राओं को यहां रह कर पढ़ना मजबूरी बन गयी है. स्कूल का एक भी कमरा नहीं है, जिसमें छात्राएं निर्भीक होकर पढ़ सके व रह सके. यहां तक कि पीने को साफ पानी तक नसीब नहीं हो रहा है.बगैर नोटिस दिए काट दिया बिजली विगत कुछ दिनों से बिजली विभाग द्वारा बिल बकाया रहने के कारण बगैर नोटिस दिये बिजली काट दिया गया है. तब से स्कूल की छात्राओं की परेशानी और भी बढ़ गयी है. बताया कि स्कूल के फंड में 60 हजार रुपये आया है. बिल भुगतान के लिए कोषागार को विपत्र भेजा जा चुका है.अब तक लाखों की चोरी बताया कि भवन के खंडहरनुमा हो जाने के बाद से स्कूल में चोरी की घटना आम हो गयी है. केवल इसी वर्ष की बात करें, तो लाखों की चोरी कर ली गयी है. गत फरवरी माह में भूकंप के दौरान छुट्टी हो जाने पर चोरों द्वारा सेंधमारी कर स्कूल से 7 कंप्यूटर समेत अन्य सामानों की चोरी कर ली गयी थी. इसी माह में रसोइ का सामान चोरी कर ली गयी थी. वहीं गत 16 नवंबर को छठ पूजा के दौरान छुट्टी होने पर चोरों ने फिर से सेंधमारी कर एलडीए व डीवीडी समेत अन्य सामानों की चोरी कर ली गयी.खुले में स्नान करने को मजबूर है छात्रा स्कूल में कुल 4 चापाकलों में से दो पहले से ही खराब हैं. शेष बचे दो चापाकलों में से एक का पाइप फट चुका है व दूसरे से गंदा पानी निकल रहा है. बिजली कटने के बाद से छात्राओं को उसी चापाकल पर खुले में स्नान करना पड़ता है. भवन का अधिकांश कमरे की छत धीरे-धीरे गिर रहा है. अब भवन का कोई ऐसा कमरा नहीं बचा है, जिसका छत नहीं ढ़ह रहा है. एक कमरे का छत ढ़हता है, तो दूसरे कमरे में जाना पड़ता है. मरने से बाल-बाल बच गयी थी दर्जनों छात्रा प्राचार्या ने बताया कि कुछ साल पहले एक वर्ग कक्ष में छात्राएं पढ़ाई कर रही थी. क्लास खत्म होने पर जैसे ही छात्राएं बाहर निकली, ठीक एक मिनट बाद उक्त कमरे का छत धराशायी हो गया. संयोग ही था कि छात्राएं बाल-बाल बच गयी, नहीं तो एक काला इतिहास बन गया होता.वर्ष 2011 में मिला था विभाग का नोटिस बताया कि वर्ष 2011 में ही भवन निर्माण विभाग द्वारा भवन को खाली कर देने का नोटिस दे दिया गया था, जिसके बारे में स्थानीय डीएम के अलावा सीएस, विभागीय कार्यपालक निदेशक व राज्य स्वास्थ्य समिति को लिखा गया था, परंतु भवन निर्माण की दिशा में आज तक कोई कदम नहीं उठाया गया है. वर्ष 1976 में भवन निर्माण कराया गया था. उसके बाद से आज तक जिर्णोद्धार नहीं कराया गया. टेंडर के अभाव में नहीं हुआ भवन निर्माण बताया कि भवन निर्माण के लिए सवा करोड़ रुपये आया हुआ था, जिसका आज तक टेंडर नहीं निकाला गया. फलस्वरूप आज छात्राओं को जानवरों से भी बदतर हालात में रह कर पढ़ाई करनी पड़ रही है. विभाग व जिला प्रशासन के द्वारा स्कूल के भवन निर्माण की दिशा में यदि शीघ्र ही कोई आवश्यक कार्रवाई नहीं की गयी, तो कभी भी किसी भी अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

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