कौन सुनेगा, किसे सुनाउं अपनी दर्द भरी कहानी

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कौन सुनेगा, किसे सुनाउं अपनी दर्द भरी कहानीफोटो. एसइ-1 फुलकहां झलसी देवी स्थान के पास धान देखकर माथे पर हाथ रखकर सोंचता किसानशिवहर . धान की खेती पर चुहानी तक का अनाज खर्च कर चुके किसानों की पीड़ा कौन सुनेगा? कोठी का सारा अनाज पटवन, खाद ,बीज पर खर्च कर चुके किसान अपनी दर्द भरी […]

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कौन सुनेगा, किसे सुनाउं अपनी दर्द भरी कहानीफोटो. एसइ-1 फुलकहां झलसी देवी स्थान के पास धान देखकर माथे पर हाथ रखकर सोंचता किसानशिवहर . धान की खेती पर चुहानी तक का अनाज खर्च कर चुके किसानों की पीड़ा कौन सुनेगा? कोठी का सारा अनाज पटवन, खाद ,बीज पर खर्च कर चुके किसान अपनी दर्द भरी कहानी किसे सुनायें? कौन उनके घाव पर मरहम लगायेगा ? धान के वाली में दाना नहीं आने से आज उनके मन में यह सवाल तैरता नजर आ रहा है. जिले में सैकड़ों एकड़ जमीन में रोपे गये धान की फसल में आज दाना नहीं आया है. अनावृष्टि के कारण धान का खेत जहां सिंचित नहीं हो पाया वहीं पैसे के अभाव में किसान पटवन की व्यवस्था नहीं करा सके. इससे उनकी धान की फसल मारी गयी. धान की फसल सूखकर पीला हो गयी है. दाना नहीं आने से मजदूर भी धान काटने से कतरा रहे हैं. अगर दाना है भी तो रोग से काला हो गया है. आज उनका सारा सपना बिखर के रह गया है. खेतों में जाकर जब वे धान की वाली में दाना नहीं पा रहे हैं तो उनकी तकलीफ और भी बढ़ जा रही है. फुलकाहां मोहर यादव टोला के किसान निहोरा राय व उनकी पत्नी सुमित्रा बताती हैं कि उनके दो एकड़ जमीन में रोपे गये धान में बाली ही नहीं आई है. दस कट्ठा जमीन जुगुल पांडेय से 28 हजार में जड़पेशगी ली थी. सोचा था कि धान की खेती अच्छी होगी. लेकिन बारिश नहीं होने से सारा सपना टूट गया है. हालत यह है कि दो एकड़ धान की खेती करने के बाद भी एक महीने तक परिवार का भोजन चलाना मुश्किल होगा. बताया कि सात संतानों में से तीन की शादी हो गयी है. उम्मीद थी कि इस बार धान की खेती के मुनाफे से एक और बेटी की शादी कर लेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. उन्होंने कहा कि जब तक सामर्थ्य था तब तक तीन बार खेतों में पटवन कराया. गांव में सरकारी सिंचाई सुविधा नहीं है. अपना पंपिंग सेट और बोरिंग भी नहीं. ऐसे में दूसरे के पंपिंग सेट से 130 रुपये प्रति घंटे की दर से किराया देकर पटवन कराया था. जब घर का सारा अनाज खत्म हो गया तो सोचा सरकार से डीजल अनुदान तो मिलेगा ही . तो उस राशि में कुछ कर्ज लेकर पैसा मिलाकर पटवन करा लेंगे. किंतु डीजल अनुदान वितरण की बात विधानसभा चुनाव की भेंट चढ़ गयी. फुलकाहां निवासी रामबाबू सिंह, विजय सिंह, महबूब आलम, जितेन्द्र कुमार, रामनिहोरा ठाकुर, बहुआरा गांव निवासी गणेश महतो आदि का कहना है कि धान के फसल में दाना नहीं आने से किसान हलकान हैं. वे अपनी तकलीफ किसे सुनायें ये उनकी समझ में नहीं आ रहा है.

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