तटबंध पर सिरकी तानकर जिंदगी जी रहे बाढ़ पीड़ित
Updated at : 17 Jul 2019 2:24 AM (IST)
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मवेशियों के लिए चारा व जलावन की किल्लत बनी घोर समस्या रूनीसैदपुर : प्रखंड के बागमती तटबंध के अंदर बसे गांवों के बाढ़ प्रभावित लोगों स्थिति गंभीर बनी हुई है. ऐसे लोग नारकीय जीवन व्यतीत करने को विवश हैं. बागमती के जल स्तर में उछाल से शनिवार की शाम घरों में पानी प्रवेश कर जाने […]
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मवेशियों के लिए चारा व जलावन की किल्लत बनी घोर समस्या
रूनीसैदपुर : प्रखंड के बागमती तटबंध के अंदर बसे गांवों के बाढ़ प्रभावित लोगों स्थिति गंभीर बनी हुई है. ऐसे लोग नारकीय जीवन व्यतीत करने को विवश हैं.
बागमती के जल स्तर में उछाल से शनिवार की शाम घरों में पानी प्रवेश कर जाने से सैकड़ों लोग बागमती तटबंध पर शरण लेने को मजबूर हैं. इब्राहिमपुर, बघौनी, शिवनगर, भरथी, मानपुर जाउंआ, रायपुर, रमनगरा, तिलकताजपुर, रक्सिया व मधौल की स्थिति काफी भयावह बनी हुई है. पशुओं के लिए चारे के लाले पड़े हुए हैं. पीने को पानी का अभाव है. लोग दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं.
खाना बनाने के लिए जलावन की समस्या उत्पन्न हो गयी है. एक ही सिरकी के नीचे मवेशियों के साथ जीवनयापन करने को मजबूर बाढ़ पीड़ितों का दर्द उनके चेहरे से झलक रहा है. कुल मिलाकर बाढ़ से बेघर बाढ़ पीड़ित जानवरों सी जिंदगी जीने को मजबूर है. तेज धूप में बाढ़ पीड़ित पॉलीथिन के नीचे सिर छुपाने को मजबूर हैं.
तिलकताजपुर पंचायत के वार्ड संख्या एक से आठ तक वार्ड संख्या-नौ के मुशहरी व सहनी टोला, रामनगरा व भरथी के लोग पिछले रविवार से हीं तटबंध पर शरण लिये हुए है. बाढ़ पीड़ितों की शिकायत है कि प्रशासन की ओर से उन्हें किसी भी तरह की राहत सामग्री अब तक उपलब्ध नहीं करायी गयी है.
तिलकताजपुर वार्ड संख्या-नौ निवासी दहाऊर मांझी की पत्नी रामरती देवी, शत्रुघ्न सहानी की पत्नी रजिया देवी व स्व शिव शंकर भगत की पत्नी मु सुनीता देवी तटबंध पर शरण लिये हुए हैं. उन्होंने बताया कि उन्हें अब तक प्रशासन की ओर से कोई राहत सामग्री उपलब्ध नहीं करायी गयी है. पोलीथिन तक अभी तक नहीं मिल पाया है. भोजन की समस्या गंभीर बनी हुई है. शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है.
वही भरथी गांव निवासी रमेश सिंह, दीपक कुमार व रणजीत सिंह ने बताया कि बागमती तटबंध के अंदर बसे भर्ती गांव में पिछले शनिवार की शाम बागमती के जल स्तर में आयी उछाल के कारण घरों में पानी घुस गया वह किसी तरह अपना जीवन यापन करने को विवश हैं, बहुत लोग तटबंध पर शरण ले रखे हैं.
तटबंध पर जलावन की भी कमी है. किसी भी तरह की सरकारी सहायता लोगों को अब तक मुहैया नहीं करायी गयी है. बाढ़ पीड़ितों के दर्द से यह साफ झलक रहा है कि बाढ़ को लेकर प्रशासन की ओर से पूर्व की तैयारी नहीं की गयी थी.
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