परिवार संग आमरण अनशन पर शिक्षक
Updated at : 18 Apr 2017 5:28 AM (IST)
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विरोध. बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ व जदयू नेता ने भी दिया समर्थन शेखपुरा : शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और बरखास्तगी के खिलाफ पिछले कई माह से न्याय के लिए दर-दर की ठोकर खा रहा शिक्षक राम ललन ने अपने परिवार के साथ अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है. शहर के समाहरणालय से […]
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विरोध. बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ व जदयू नेता ने भी दिया समर्थन
शेखपुरा : शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और बरखास्तगी के खिलाफ पिछले कई माह से न्याय के लिए दर-दर की ठोकर खा रहा शिक्षक राम ललन ने अपने परिवार के साथ अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया है. शहर के समाहरणालय से सटे चांदनी चौक पर आमरण अनशन में शिक्षक की पत्नी शोभा देवी, 80 वर्षीय पिता अर्जुन सिंह और मैट्रिक की छात्रा निशा कुमारी भी न्याय के लिए सोमवार को आमरण अनशन पर बैठी.
मौके पर प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नरेश शास्त्री के अलावा जदयू नेता राजकुमार वर्मा भी समर्थन में अनशन पर बैठे. अनशन पर बैठे शिक्षक ने आरोप लगाते हुए कहा कि जिले में 84 लोग एक वर्षीय शारीरिक प्रशिक्षण प्राप्त किये शिक्षक अपनी सेवा दे रहे हैं. लेकिन, जिले में अकेले शिक्षक के रूप में उन पर एक वर्षीय शारीरिक शिक्षक के प्रशिक्षण का आरोप लगाते हुए बरखास्त कर दिया गया. उन्होंने चेवाड़ा के बीडीओ, बीइओ व डीपीओ स्थापना के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए पुनर्नियोजन की मांग की. पीड़ित शिक्षक ने बताया कि सात दिसंबर, 2016 में उन्हें बरखास्त किया गया है. उन्होंने यह भी बताया कि एक वर्षीय शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले शिक्षकों को अवैध करार देने के लिए सरकार ने 2015 में नियमावली लाया. लेकिन वह 1991-92 के सत्र में शारीरिक प्रशिक्षण को पूरा करते हुए 1995 में योग्यता हासिल की और 10 साल पूर्व शिक्षक के रूप में उत्क्रमित मध्य विद्यालय बेलखुंडी में अपना योगदान दिया. पीड़ित परिवार ने शिक्षा विभाग के
अधिकारियों पर आरोप लगाया कि पिछले ढाई साल से वेतन के लिए दर-दर की ठोकर खा रहे हैं.
शिक्षक राम लगन का परिवार आर्थिक रूप से इतना कमजोर हो चुका है कि वह न्याय पाने के लिए न्यायिक व्यवस्था का भी लाभ नहीं ले सकता. ऐसी स्थिति में जब जिला स्तर पर प्रशासनिक महाकमा, क्षेत्र के जनप्रतिनिधि और संगठन के आंदोलन को भी अनसुनी कर दी गयी, तब न्याय के लिए आमरण अनशन का आखिरी फैसला लिया. मौके पर संघ के जिलाध्यक्ष नरेश शास्त्री के अलावा अनिल कुमार, संजय कुमार, मुकेश कुमार सिंह, मिथिलेश कुमार, राजनीति सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे.
संघ के नेताओं ने कहा कि शिक्षा विभाग अराजकता और भ्रष्टाचार में डूबा है. विभाग के अधिकारी लगातार शिक्षकों को बेवजह दंडित कर आर्थिक दोहन के लिए अपनी मंशा को पूरा कर रहे हैं. विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और शिक्षक रामललन के पुनर्नियोजन की मांग को लेकर आमरण अनशन में संगठन भी अपनी मजबूत भागीदारी निभा रहा है.
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