आर्केस्ट्रा की लड़कियों से हुई दोस्ती, स्मैक के गिरफ्त में आया 16 साल का लड़का, गायब होने के महीनों बाद मिला

बरामद 16 साल का लड़का
Bihar Crime: आर्केस्ट्रा की दोस्ती ने 16 साल के किशोर की जिंदगी तबाह कर दी. स्मैक की लत में फंसकर वह आठ महीने घर से लापता रहा. बिहार शरीफ में मिला बेटा जख्मों और नशे की हालत में था. मां-बाप के लिए यह दर्दनाक सदमा बन गया.
रंजीत कुमार/शेखपुरा/बिहार: जिले से सामने आई यह घटना किसी भी मां-बाप को अंदर तक झकझोर देने वाली है. आर्केस्ट्रा ग्रुप की लड़कियों से हुई दोस्ती एक 16 साल के लड़के के लिए ऐसा जाल साबित हुई, जिसमें फंसकर वह स्मैक के नशे का शिकार हो गया और घर-परिवार छोड़कर आठ महीने तक लापता रहा.
बिना बताए घर से निकल गया युवक
बताया गया कि किशोर के रिश्ते में बहनोई आर्केस्ट्रा कलाकार था, जिसके जरिए उसका आर्केस्ट्रा से जुड़ाव हुआ. इसी दौरान गलत संगत और नशे की लत ने उसे धीरे-धीरे अपनी गिरफ्त में ले लिया और वह बिना बताए घर से चला गया. बेटे के अचानक गायब हो जाने से मां-बाप हर दिन टूटते रहे और उसे जिंदा देखने की उम्मीद में दर-दर भटकते रहे.
बेटे की हालत देख दंग रह गए पिता
मंगलवार को आखिरकार सूचना मिली कि किशोर बिहार शरीफ न्यू बाईपास रोड के आसपास देखा गया है. पिता प्रमोद कुमार किसी तरह वहां पहुंचे और बेटे को पहचान लिया, लेकिन उसकी हालत देखकर वह दंग रह गए. किशोर का शरीर जख्मों से भरा था, दोनों हाथों पर ब्लेड से काटे गए दर्जनों निशान थे और गले पर भी ब्लेड से कटने के जख्म दिख रहे थे.

किसी तरह वापस आया बेटा
जब पिता उसे अपने साथ ले जाने लगे तो वहां मौजूद लोगों ने विरोध किया. हालात बिगड़ते देख 112 पर कॉल किया गया, जिसके बाद वे लोग मौके से भाग निकले. पिता किसी तरह बेटे को शेखपुरा ले आए, लेकिन परेशानी यहीं खत्म नहीं हुई.
बेटे ने मां पर किया हमला
घर पहुंचते ही किशोर बार-बार स्मैक की मांग करने लगा. नशा न मिलने पर वह आत्महत्या की धमकी देने लगा और गुस्से में उसने अपनी मां पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गई. परिजनों का कहना है कि मोबाइल पर बातचीत के दौरान किसी व्यक्ति ने किशोर से स्मैक लाकर देने की बात भी की, जिससे साफ है कि वह अब भी नशे के नेटवर्क के संपर्क में है.

पिता प्रमोद कुमार ने क्या कहा ?
इस पूरी घटना से मां-बाप पूरी तरह टूट चुके हैं. पिता प्रमोद कुमार ने बताया कि वह कपड़े की फेरी कर परिवार चलाते हैं और आठ महीने तक बेटे के लापता होने का दर्द उन्हें अंदर से खाए जा रहा था. अब बेटा मिला तो वह नशे की लत में बुरी तरह फंसा हुआ है और फिर से उसी दुनिया में जाने की जिद कर रहा है. यह घटना न सिर्फ एक परिवार की पीड़ा है, बल्कि समाज में फैलते नशे और भटकते किशोरों की एक गंभीर चेतावनी भी है.
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लेखक के बारे में
By Nishant Kumar
Nishant Kumar: निशांत कुमार पिछले तीन सालों से डिजिटल पत्रकारिता कर रहे हैं. दैनिक भास्कर के बाद राजस्थान पत्रिका के डिजिटल टीम का हिस्सा रहें. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल-इंटेरनेशनल और स्पोर्ट्स टीम में काम कर रहे हैं. किस्सागोई हैं और देश-विदेश की कहानियों पर नजर रखते हैं. साहित्य पढ़ने-लिखने में रुचि है.
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