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शिक्षक के अभाव में साइंस विषय की नहीं होती है पढाई

Updated at : 11 Jan 2018 5:23 AM (IST)
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शिक्षक के अभाव में साइंस विषय की नहीं होती है पढाई

खबर l राजो सिंह प्लस टू उच्च विद्यालय शेखोपुरसराय में बदहाल है शिक्षण व्यवस्था शेखोपुरसराय (शेखपुरा) : जिले में उच्च शिक्षा के लिए आज भी छात्र-छात्राओं को निजी संस्थानों का ही सहारा लेना पड़ता है. शेखोपुरसराय प्रखंड क्षेत्र के राजो सिंह टेन प्लस टू उच्च विद्यालय में लगभग एक हजार छात्र-छात्राएं नामांकित है. उन्हें पढ़ाने […]

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खबर l राजो सिंह प्लस टू उच्च विद्यालय शेखोपुरसराय में बदहाल है शिक्षण व्यवस्था

शेखोपुरसराय (शेखपुरा) : जिले में उच्च शिक्षा के लिए आज भी छात्र-छात्राओं को निजी संस्थानों का ही सहारा लेना पड़ता है. शेखोपुरसराय प्रखंड क्षेत्र के राजो सिंह टेन प्लस टू उच्च विद्यालय में लगभग एक हजार छात्र-छात्राएं नामांकित है. उन्हें पढ़ाने के लिए विद्यालय में शिक्षकों का घोर अभाव है. विदित हो कि टेन प्लस टू उच्च विद्यालय में साइंस विषय का एक भी शिक्षक है ही नहीं है. विद्यालय में एक शिक्षक पर लगभग 150 छात्र-छात्राएं हैं. जबकि साइंस विषय के एक भी शिक्षक नहीं है.
इंटरमीडिएट में नामांकित हैं कुल 266 छात्र छात्राएं : प्रखंड के राजो सिंह टेन प्लस टू उच्च विद्यालय में 11वीं एवं 12 में वर्ग में कुल 266 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. जिसमें 87 छात्र-छात्राएं गत महीने होने वाली अपनी फाइनल परीक्षा को लेकर फॉर्म भरा है. अब देखना यह है कि इन विद्यार्थियों को बिना पढ़े अपने विषय में कैसे पास करेंगे.
इस संबंध में जब वहां उपस्थित कुछ छात्र-छात्राओं से ने बताया कि साइंस के साथ-साथ आर्ट्स विषय के लिए विषयवार शिक्षक नहीं रहने से पढ़ाई में बाधा हुई है. जिसे पूरा करने के लिए ट्यूशन का सहारा लिया गया है. लेकिन पढ़ाई के लिए रकम इसके एवज में खर्च करना पड़ रहा है. शिक्षकों की कमी के कारण वर्तमान व्यवस्था में गरीबों को शिक्षा पाना संभव ही नहीं प्रतीत हो रहा है.
विद्यालय में इन विषयों के ही है शिक्षक
टेन प्लस टू विद्यालय में मात्र चार विषय के ही शिक्षक हैं. जिसमें भूगोल, इतिहास, संस्कृत और उर्दू के ही शिक्षक उपलब्ध हैं. बाकी विषय के शिक्षक नहीं रहने के चलते विद्यार्थियों को पढ़ाई में परेशानी हुई है. टेन प्लस टू और माध्यमिक वर्ग के कुल छात्र-छात्राओं की संख्या लगभग एक हजार है. जिसके लिए विद्यालय में न तो प्रयोगशाला है और न ही कंप्यूटर की व्यवस्था की गयी है. इसके साथ ही हजार विद्यार्थियों के साथ शिक्षक के लिए विद्यालय में एकमात्र चापाकल एक शौचालय है. जिसे छात्र-छात्राओं को इस से भारी परेशानी उठानी पड़ती है.
लेखापाल और आदेशपाल नहीं: इस विद्यालय में न तो लेखापाल हैं न ही आदेशपाल हैं. शिक्षक ही विद्यालय में क्लर्क का भी काम निबटा रहे हैं. जिसमें छात्र-छात्राओं को पढ़ाई बाधित रहती है.
क्या कहते हैं अधिकारी
जिले में शिक्षकों की कमी को देखते हुए तत्काल प्रतिनियुक्ति की दिशा में पत्राचार किया जा रह है. विद्यालय में बुनियादी कमी को भी व्यवस्थित की जायेगी.
डॉ तकीउद्दीन, जिला शिक्षा अधिकारी, शेखपुरा.
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