पाइप टूटने से नीमी में जलसंकट

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Nov 2017 3:48 AM

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दिक्कत. सात साल में भी पानी की समस्या का निदान नहीं, लोगों में आक्रोश शेखोपुरसराय के प्रखंड मुख्यालय से सटे जलापूर्ति पंप हाउस का हाल शेखोपुरसराय : सरकार सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने को कटिबद्ध है. लेकिन शेखोपुरसराय प्रखंड में जिलापरिषद अध्यक्षा निर्मला गांव में लोग आज भी जल […]

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दिक्कत. सात साल में भी पानी की समस्या का निदान नहीं, लोगों में आक्रोश

शेखोपुरसराय के प्रखंड मुख्यालय से सटे जलापूर्ति पंप हाउस का हाल
शेखोपुरसराय : सरकार सात निश्चय योजना के तहत हर घर नल का जल पहुंचाने को कटिबद्ध है. लेकिन शेखोपुरसराय प्रखंड में जिलापरिषद अध्यक्षा निर्मला गांव में लोग आज भी जल आपूर्ति के पाइप लाइन से पानी पानी के लिए लालायित है. हालांकि की यह स्थिति प्रखंड के नीमी पंचायत के सभी गांव की है. लोग जल आपूर्ति की योजनाओं के अभाव में आज भी गिनती के चालू चापाकल अथवा पानी के साधन चलाए घरों के जरिए ही अपनी जरूरतों को पूरा करने को विवश है. दरअसल प्रखंड के नीमी गांव में ग्रामीण पाइप जलापूर्ति योजना का 2006 में ही सूबे के मुखिया नीतीश कुमार की अगुवाई में शेखपुरा से ही शिलान्यास होकर निर्माण संपन्न हुआ था.
बावजूद इस क्षेत्र के लोगों का रोना इस बात का है कि इस जलापूर्ति योजना से लोगों का प्यास नहीं बूझ सका. प्रखंड के नीमी, शेखोपुरबाजार, शेखोपुरडीह, सुगिया, चरूवामा, प्रेमचंद्र बिगहा, दरोगी बिगहा में पीएचडी विभाग द्वारा गली गली नल जल पहुंचाना था. लाखों की लागत से क्रियान्वित सात साल पुरानी इस योजना के पाइपलाइन में मामूली मरम्मती नहीं होने के कारण लोगों को इस महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. इस स्थिति को लेकर विभागीय लापरवाही साफ उजागर होता है. सबसे बड़ी विडंबना यह है कि योजना में दो बार बोरिंग भी किया गया. पानी टंकी भी बन कर तैयार है.
साथ ही पूरे क्षेत्र में पाइप भी बिछा दिया गया. पाइप बिछाने में जहां तहां रोड भी क्षतिग्रस्त हुआ. बावजूद उसका लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल सका है. बताया जाता है कि चरूवामा और नीमी पंचायत के लोगों का जलापूर्ति के इस योजना को चालू होने से जुड़ा धैर्य टूटने लगा है. इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों की माने तो क्षेत्र की घनी आबादी में विभिन्न योजनाओं से बड़ी तादाद में चापाकल गाड़े गए हैं. जिसमें काफी सीमित संख्या में चापाकल चालू अवस्था में लोगों को पीने का पानी उपलब्ध करा रहा है.नैनीताल के स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि चापाकल को मरम्मत करने के लिए भी विभाग को कई चक्कर लगाने पर मिस्त्री तो भेजा जाता है.
उसमें भी सिर्फ मिस्त्री का पैसा बचता है. बाकी सामान बाजार से ही खरीद कर लोगों को लाना पड़ता है. सामग्री है या नहीं कहने पर चापाकल बनाए बिना ही मिस्त्री वापस लौट जाते हैं. ग्रामीणों ने बताया के पीएचईडी विभाग में पिछले कई वर्षों से व्याप्त इस व्यवस्था के जरिए लूट खसोट को अंजाम तो दिया जा रहा है. बावजूद लोगों को पानी मुहैया कराने के लिए विभाग जिला प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा.
भूमि दान करने भी हुआ व्यर्थ:शेखोपुरसराय प्रखंड मुख्यालय के समीप जलापूर्ति पंप हाउस निर्माण के लिए जमीन दान देने वाले दाता धनंजय कुमार ने बताया कि विभाग के साथ साथ ना जाने कितनी बार सरकार के पास भी आवेदन देकर जागरुक करने का प्रयास भी किया. शायद वह भी व्यर्थ साबित हुआ. इस पर कोई भी अधिकारी ध्यान तक नहीं देते हैं. गांव में लोगों को पानी की सुविधा का लाभ मिल सके, उसके लिए जमीन दान देने में काफी गौरवान्वित महसूस किया, लेकिन आज की बदहाली को देखकर रोना आता है.
क्या कहते हैं प्रतिनिधि
जलापूर्ति किस अवस्था को लेकर पूर्व में भी जिलाधिकारी दिनेश कुमार एवं उप विकास आयुक्त निरंजन कुमार झा को लिखित एवं मौखिक तौर पर सूचना दी गई है. इस योजना के प्रति अगर तत्काल गंभीरता नहीं दिखाई गई, तब इसके लिए जल्दी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
निर्मला कुमारी, जिप अध्यक्ष, शेखपुरा
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