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समाज सुधारक निर्गुण संप्रदाय के नेतृत्वकर्ता थे संत शिरोमणि रविदास

Updated at : 06 Mar 2017 6:13 AM (IST)
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समाज सुधारक निर्गुण संप्रदाय के नेतृत्वकर्ता थे संत शिरोमणि रविदास

आयोजन. गांधी नगर भवन में मनाया गया संत रविदास जयंती समारोह शिवहर : स्थानीय गांधी नगर भवन में भारत के 15 वी शताब्दी के महान संत रविदास की 640 वां जयंती समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान डीएम राजकुमार समेत अन्य गणमान्य लोगों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण किया. वहीं कार्यक्रम का उद्घाटन […]

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आयोजन. गांधी नगर भवन में मनाया गया संत रविदास जयंती समारोह

शिवहर : स्थानीय गांधी नगर भवन में भारत के 15 वी शताब्दी के महान संत रविदास की 640 वां जयंती समारोह कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस दौरान डीएम राजकुमार समेत अन्य गणमान्य लोगों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण किया. वहीं कार्यक्रम का उद्घाटन वरीय उपसमहर्ता सह प्रभारी जेल अधीक्षक अनिल कुमार दास, प्रदेश रविदास विकास मंच के अध्यक्ष
रंजन कुमार राम, सांइस फॉर सोसाइटी के जिला अध्यक्ष अजब लाल
चौधरी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित करके किया.

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने संत शिरोमणि के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुये कहा कि संत रविदास महान समाज सुधारक, दर्शनशास्त्री, कवि व ईश्वर के अनुयायी थे. निगुर्ण संत परंपरा के चमकते नेतृत्वकर्ता, उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के अग्रणी संत थे. जिन्होंने कविता व गीत के माध्यम् से अपनी लेखनी के द्वारा समाज को अाध्यात्मिक व सामाजिक संदेश दिये. सामाजिक कुरीतियों व अस्पृश्यता पर चोट किया. पूरे विश्व ने उन्हें सम्मान दिया. किंतु भक्ति आंदोलन व शिक्षाप्रद धार्मिक भक्ति गीतों से उन्होंने उत्तरप्रदेश, पंजाब व महाराष्ट्र में अपनी अमीट छाप छोड़ी. मौके पर डीएम ने कहा कि संत रविदास हिमालय की तरह सामाजिक बुराईयों व

अस्पृश्यता के विरुद्ध खड़े रहे. जिस पर आंधी आये, तूफान आये किंतु वे अटल रहे. वे सामाजिक समरसता व भाईचारा में विश्वास रखते थे. जाति पाति के प्रवल विरोधी थे. सामाजिक विषमता को दूर करने की लड़ाई वे आजीवन लड़ते रहे. जबकि वरीय उपसमहर्ता अनिल कुमार दास ने कहा कि संत शिरोमणि रविदास अस्पृश्यता के क्रांतिकारी विरोधी थे. उन्होंने जाति व्यवस्था व सामाजिक कुरीति के विरुद्ध एक क्रांति का आगाज किया.

र्दुव्यवस्था की काली लौह शृंखला से बद्ध, निर्धनता की धधकती ज्वाला में जलती, रूढ़ियों के पत्थरों दबी मनवता के प्रति उनके मन में असीम प्यार थे. वे भेद भाव रहित भाईचारा के कड़ी से एक दूसरे से जुड़े समाज में विश्वास रखते थे. सांईस फॉर सोसाइटी के जिला अध्यक्ष अजब लाल चौधरी ने कहा कि संत रविदास ने समाज में शांति का संदेश दिया.
1450 से 1520 तक उनका कार्यकाल माना जाता है. पंडित शारदा नंद के पाठशाला में उनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई थी. बड़ी कठिनाई से उन्हें जातिवादी व्यवस्था के बीच दाखिला मिला था. किंतु बाद में उन्होंने अपनी प्रतिभा से सबको अचभिंत कर दिया था. वे मन चंगा तो कठौती में गंगा में विश्वास करते है. उनकी भक्ति, निर्भिकता, वाकपटुता की संत समाज में एक अलग पहचान थी. मौके पर अन्य कई वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि संत रविदास के अनुयायी में मीरावाई का नाम आता है. उन्होंने गाया है गुरु मिलीयो रविदास जी दीनी ज्ञान की गुटकी. 1526 में पानीपत की लड़ाई जीतेने के बाद जब बाबर दिल्ली के गद्दी पर बैठा तो एक बार वह संत रविदास से मिला और संत रविदास का मुरीद हो गया. सीओ शिवहर युगेश दास ने उनके जीवन चरित्र को रेखांकित किया.कार्यक्रम के दौरान मुखिया रामाकांत राम समेत कई ने अपने विचार व्यक्त किये.

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