सुगिया को नहीं मिल रही बिजली
Updated at : 02 Mar 2017 4:35 AM (IST)
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उदासीनता बिजली विभाग की ढुलमुल कार्रवाई ने बढ़ाया ग्रामीणों में रोष , नहीं िमल रहा लाभ शिवहर : बात करीब आठ वर्ष पहले की है जब बिजली सिर्फ कटसरी गांव तक जलती थी. लेकिन सुगिया परदेशिया गांव को बिजली नसीब नहीं थी. उस समय सुगिया और परदेशिया के ग्रामीणों के सहयोग से गांव के लोगों […]
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उदासीनता बिजली विभाग की ढुलमुल कार्रवाई ने बढ़ाया ग्रामीणों में रोष , नहीं िमल रहा लाभ
शिवहर : बात करीब आठ वर्ष पहले की है जब बिजली सिर्फ कटसरी गांव तक जलती थी. लेकिन सुगिया परदेशिया गांव को बिजली नसीब नहीं थी. उस समय सुगिया और परदेशिया के ग्रामीणों के सहयोग से गांव के लोगों ने चंदा इक्कठा कर उक्त दोनों गांव में बिजली लाने के लिए बिजली विभाग से संपर्क किया गया.
उस वक्त सुगिया और परदेशिया के ग्रामीणों में खुशी परवान पर था कि उनके गांव में भी बिजली की रोशनी जगमगायेगी. किंतु विभागीय ठेकेदार ने अपना काम निपटाने के लिए ग्रामीणों से छल किया.11 हजार वाल्ट की तार घने जंगल के होते हुए सुगिया परदेशिया में बिजली का तार बिछा दिया गया. बिजली सप्लाई भी हुई. वर्ष 2014 आते आते गुणवत्ता विहीन बिजली विभाग के तार जगह -जगह टूटने लगे. बिजली आपूर्ति की समस्या उत्पन्न होने गयी. ग्रामीण मिस्त्री को बुलाकर बिजली का काम करवाते रहे.
बतातें चले कि कटसरी झा टोला के बांसवाड़ी होते हुए 11 हजार वाल्ट का तार गया हुआ है .करीब 2015 के मार्च अप्रैल की महीना था बहुत तेज धूप और हवा चलती थी. उस वक्त कटसरी झा टोला में 11 हजार वाल्ट को तार टूट कर बांसवाड़ी में गिर गयी और आग लग गयी. हवा की तेज रफ्तार होने के कारण आग तेजी से गांव की तरफ बढ़ने लगी. उस वक्त ग्रामीण और अग्निशमक गाड़ी की मदद से आग पर काबू पा लिया गया और बिजली विभाग से निवेदन किया गया कि पोल दूसरे जगह से ले जाये लेकिन बिजली विभाग आश्वासन देकर अपने फर्ज की इति श्री कर लिया.
उसके कुछ दिन बाद 11 हजार वाॅल्ट का तार कटसरी झा टोला के केला के खेत में तार टूट कर गिर गया. किसानों का केला बगीचा जल गया. उसके बाद भी आश्वासन का सब्जबाग दिखाकर विभाग फर्ज से मुंह मोड़ लिया.
इसी बीच वर्ष 2016 का सफर शुरू हुआ. बरसात के मौसम में कटसरी गांव में एक बार फिर कपल सहनी के घर के दरवाजे पर बंधी मवेशी के बगल में तार जा गिरा . मवेशी बाल बाल बच गये. उसके बाद कुछ ग्रामीणों ने बिजली ऑफिस में जाकर इसकी जानकारी दी. विभाग ने तार बदलने का आश्वासन दिया. कार्यपालक अभियंता तक आश्वासन ही आश्वासन देते रहे. ग्रामीणों की समस्या आज भी यथावत है. ग्रामीण दहशत के साये में जीने को विवश हैं उन्हें चिंता बनी रहती है कहीं तार गिरकर उनके जान माल का नुकसान न कर दें. ग्रामीण सतीश झा, सुमित मिश्रा, कपल सहनी, भिखर सहनी, रौशन झा, हीरा देवी, आदि ने बिजली विभाग की उक्त कार्यशैली को कहानी जुबानी बयां करते हुए चेतावनी दिया कि अगर जान माल की क्षति हुई तो इसकी पूरी जिम्मेवारी बिजली विभाग व जिला प्रशासन की होगी.
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