बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे चंद्रशेखर विकल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Feb 2017 5:42 AM
शिवहर : स्थानीय गुरुकुल में साहित्यकार कवि चंद्रशेखर विकल की तिसरी पुण्य तिथि मनायी गयी. इस दौरान मौजूद जिले के साहित्यकार कवियों व बुद्धिजीवियों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. मौके पर वक्ताओं ने कहा कि कवि, गीतकार, आकाशवाणी व दूरदर्शन कलाकार, भूमिजा पत्रिका के संपादन के साथ हिंदी साहित्य सम्मेलन व […]
शिवहर : स्थानीय गुरुकुल में साहित्यकार कवि चंद्रशेखर विकल की तिसरी पुण्य तिथि मनायी गयी. इस दौरान मौजूद जिले के साहित्यकार कवियों व बुद्धिजीवियों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. मौके पर वक्ताओं ने कहा कि कवि, गीतकार, आकाशवाणी व दूरदर्शन कलाकार, भूमिजा पत्रिका के संपादन के साथ हिंदी साहित्य सम्मेलन व हनुमान अाराधना मंडल के जिला अध्यक्ष समेत विभिन्न रूपों में उनकी भूमिका सराहनीय रही. वे बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी व बहुमुखी प्रतिभा संपन्न थे. कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए साइंस फॉस सोसाइटी के जिला
अध्यक्ष अजब लाल चौधरी ने कहा विकल में यथा नाम तथा गुण का भाव चरितार्थ होता है कभी कविता के रूप में तो कभी गीत संगीत के रूप में भाव का प्रकटीकरण उन्हें असीम आनंद देता था. गीत संगीत उन्हें अज्ञात लोक में ले जाती थी. जहां वे अलौकिक सुख व परम विश्रांति का अनुभव करते थे. कार्यक्रम में देशबंधु शर्मा ने उनकी कल्पना नामक कविता की चर्चा करते हुए कविता के कुछ अंश का उल्लेख किया. उनकी कविता है अपलक देखता हूूं, शुकवर्णी परिधान में सिमटी. सौंदर्य की साक्षात प्रतिमूर्ति, कंचन अाभूषणों से सुसज्जित. मंथर गति से भाव लिए अर्चना का आ रही कल्पना. उनके जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विकल ने स्वयं एक वैदेही पत्रिका भी निकाली थी. वे हनुमान आराधना में रत रहते थे.
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