गाड़ियों में लगायें हाइ सिक्युरिटी नंबर

Updated at : 01 Sep 2016 6:18 AM (IST)
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गाड़ियों में लगायें हाइ सिक्युरिटी नंबर

तैयारी. मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन पर जुर्माना के साथ विधि सम्मत कार्रवाई तय एक साल के लिए आदेश शिवहर : समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में डीएम राजकुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा कमेटी की एक बैठक आयोजित की गयी. जिसमें डीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि धारा 177 मोटर वाहन […]

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तैयारी. मोटर वाहन अधिनियम के उल्लंघन पर जुर्माना के साथ विधि सम्मत कार्रवाई तय

एक साल के लिए आदेश
शिवहर : समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में डीएम राजकुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा कमेटी की एक बैठक आयोजित की गयी.
जिसमें डीएम ने दो टूक शब्दों में कहा कि धारा 177 मोटर वाहन अधिनियम 1988 के अधीन बनाये गये नियम, विनियम या अधिसूचना के किसी उपबंध के उल्लंघन के लिए दोषी पाये जाने पर जुर्माना के साथ अन्य विधि सम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जायेगी. प्रथम अपराध पर सौ रुपये व उसके बाद के अपराध पर अधिकतम 300 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है.
डीएम ने वाहन चेकिंग अभियान को तेज करने के साथ महीना में एक बार औचक जांच का निर्देश दिया है.
उल्लंघन के मामले में शत प्रतिशत कार्रवाई का भी निर्देश दिया है. बैठक में डीएम ने कहा कि जिले में चलने वाली सभी गाड़ियों में हाई सिक्युरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य होगा. इसलिए सभी नये व पुराने वाहन मालिक गाड़ी में हाई सिक्यूरिटी नंबर लगाना सुनिश्चित करें. धारा 179 की चर्चा करते हुए कहा गया कि आदेश के उल्लंघन, बाधा उत्पन्न करने, सूचना देने से इनकार करने की स्थिति में पांच सौ रुपये जुर्माना या एक महीना सजा व दोनों हो सकती है.
बिना चालक अनुज्ञप्ति के या 18 साल से कम उम्र के बच्चों द्वारा गाड़ी चलाने की स्थिति में 500 रुपये जुर्माना या तीन माह के कारावास या दोनों हो सकती है.धारा 183 के तहत निर्धारित गति से अधिक गति से वाहन के परिचालन करने की स्थिति में 1000 से 5000 रुपये तक के अर्थ दंड का प्रावधान है.
बैठक में साफ किया गया कि बिना हेलमेट, ओवर स्पीडिंग,ड्रंकन ड्राइव, रेड लाइट जंपिंग, बिना सीट बेल्ट, वाहन चलाते समय मोबाइल के उपयोग व ओवर लोडिंग के हालत में विधि सम्मत कार्रवाई तय है. बैठक में धारा 185 का उल्लेख करते हुए बताया गया कि शराब पीकर या नशा खाकर गाड़ी चलाने पर 2000 रुपये के अर्थ दंड या पहले अपराध के लिए छह माह व बाद के अपराध के लिए दो वर्ष कारावास का प्रावधान है. बताया गया कि गृह सचिव बिहार के पत्रांक 3050 दिनांक 18 अप्रैल 2016 के द्वारा किये गये अनुरोध के आलोक में इस विभाग की अधिसूचना संख्या 1987 दिनांक 26 अप्रैल 2016 द्वारा पूरे राज्य के अपर पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, प्रभारी पुलिस निरीक्षक, थानाध्यक्ष व ओपी प्रभारियों को मोटर वाहन अधिनियम 1988 के धारा 177 व 190 के तहत विनिर्दिष्ट दंडनीय अपराधों के लिए अगले एक वर्ष के लिए शमन की शक्ति प्रदान की गयी है.
मौके पर एसपी प्रकाश नाथ मिश्र,एसडीपीओ, सदस्य सचिव सह डीटीओ चितरंजन प्रसाद,वरीय उपसमाहर्ता अनिल कुमार दास, जिला अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी चंदन कुमार, थानाध्यक्ष समेत कई मौजूद थे.
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