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सीबीजी प्लांट से पराली से बनने वाली गैस की आपूर्ति शुरू

Updated at : 02 Sep 2024 10:06 PM (IST)
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सीबीजी प्लांट से पराली से बनने वाली गैस की आपूर्ति शुरू

बीते दो साल से सैकड़ों एकड़ भूमि में लगी धान की फसल के अवशेष यानी पराली को एकत्रित कर उससे सीएनजी बनाने की परिकल्पना से बने सीबीजी प्लांट में आखिर उत्पादन शुरू हो गया और पहली आपूर्ति भेज दी गयी.

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संतोष चंद्रकांत, बिक्रमगंज. बीते दो साल से सैकड़ों एकड़ भूमि में लगी धान की फसल के अवशेष यानी पराली को एकत्रित कर उससे सीएनजी बनाने की परिकल्पना से बने सीबीजी प्लांट में आखिर उत्पादन शुरू हो गया और पहली आपूर्ति भेज दी गयी. कंपनी के ओनर इंजीनियर उत्कर्ष ने बताया कि पुआल, गोबर, नेपियर घास और सड़ी-गली सब्जी और उसके डंठल से बनने वाली इस सीएनजी गैस की पहली आपूर्ति दावथ के मालियाबाग में सीएनजी पंप को की गयी. इसी के साथ उत्पादन और आपूर्ति को लेकर सारी अड़चनें अब दूर हो गयी हैं. अब लगातार उत्पादन जारी रहेगा और आपूर्ति भी जारी रहेगी. यह प्लांट बिक्रमगंज अनुमंडल मुख्यालय से सटे घुसियांखुर्द गांव में बना है. इंजीनियर उत्कर्ष ने बताया कि उत्पादन के लिए अब तक जितना भी कच्चा मटेरियल रखा गया था, वह एक महीने की खुराक है. लेकिन इस वर्ष धान की कटाई के बाद एक साल का मटेरियल इकट्ठा कर लिया जायेगा, ताकि उत्पादन पर इसका प्रतिकूल असर नहीं पड़े. उन्होंने बताया कि वैसे तो यह प्लांट जनवरी 2024 में ही बन कर पूरी तरह तैयार हो गया था, लेकिन कुछ कानूनी व कुछ तकनीकी अड़चनों से उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई, लेकिन अब सब सामान्य हो गया है. निश्चित ही आने वाले दिनों में इस क्षेत्र के लोगों के लिए बेहतर मौका आयेगा. अब धान के डंठल जलेंगे नहीं, बल्कि वह मुनाफा देंगे.

इंजीनियर ने बताया कि सीएनजी गैस के उत्पादन के लिए कच्चे माल के तौर पर हम किसानों के खेतों में बेकार पड़े पुआल, मवेशियों के गोबर, नेपियर घास, सड़ी-गली सब्जियाें और उसके डंठल का उपयोग किया जायेगा. प्लांट के शुरू होने से आसपास के लोगों में काफी खुशी देखी जा रही है. इससे सैकड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है. इस प्लांट की क्षमता के अनुसार अब पूरे शाहाबाद के किसानों को खेतों में पराली जलाने की नौबत नहीं आयेगी, क्योंकि उनके पुआल का उपयोग प्लांट में हो जायेगा. इसका मूल्य भी किसानों को मिलेगा.

अब तक पुआल को खेतों में जलाते थे किसान

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ रामाकांत सिंह बताते हैं कि इस प्लांट के लगने से न सिर्फ प्लांट बेहतर काम करेगा, बल्कि किसानों को भी इसका समुचित लाभ मिलेगा. साथ ही पर्यावरण को होने वाले नुकसान से भी मुक्ति मिलेगी. जल जीवन हरियाली को बेहतर परिणाम मिलेगा. इससे पहले अधिकतर किसान अपने खेतों में पराली को जला देते थे. इससे प्रदूषण फैलता था, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता था और लोगों की सेहत भी बिगड़ रही थी. इसी समस्या का तोड़ निकालते हुए इंजीनियर उत्कर्ष ने यह प्लांट लगाया है.

पराली से ऐसे उत्पादित हो रही गैस

सीबीजी बायोगैस प्लांट के ओनर इंजीनियर उत्कर्ष ने बताया कि यहां रोजाना 20 हजार किलो पराली और 10 किलो ग्राम गोबर से लगभग तीन हजार किलो कप्रेस्ड बायो गैस उत्पादन किया जा रहा है. इस ईंधन का उपयोग सीएनजी से चलने वाले वाहनों में किया जाता है. हमारे इस प्रोडक्ट को खरीदने का एग्रीमेंट इंडियन ऑइल ने किया है. सीबीजी प्लांट में सीएनजी गैस के साथ-साथ जैविक खाद भी तैयार की जा रही है. इसकी मांग भारी मात्रा में है. अभी जो हमारे पास रॉ मटेरियल है, उसे दो से तीन सौ रुपये प्रति बीघे की दर से खरीदा गया है. उन्होंने बताया कि इसमें लगी अधिकतर मशीनरी विदेशी हैं, जिन्हें जर्मनी, बेल्जियम और इटली से आयातित किया गया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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