बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका : डॉ विनोद कुमार सिंह
बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के प्रावधानों को लेकर अपनी बात रखते डॉ विनोद कुमार सिंह
बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के प्रस्तावित प्रावधानों पर सवाल उठ रहे हैं, जिससे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और शिक्षकों के अधिकारों पर असर पड़ने की आशंका है. प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा है कि इस नए कानून से शिक्षकों और कर्मचारियों के अधिकारों पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है.
Bihar State University Act 2026: बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के प्रस्तावित प्रावधानों से उच्च शिक्षा व्यवस्था में विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है. अवधूत भगवान राम महाविद्यालय, सासाराम के प्राचार्य डॉ विनोद कुमार सिंह ने नये कानून के प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसके लागू होने से शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून को लेकर प्रदेशभर के शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी विरोध जता रहे हैं तथा विभिन्न स्तरों पर आंदोलन भी किया जा रहा है.
स्नातक शिक्षा और डिग्री कॉलेजों के प्रशासनिक नियंत्रण पर उठे सवाल
डॉ विनोद कुमार सिंह ने कहा कि सरकार बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 को समाप्त कर नया कानून लाने की प्रक्रिया में है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत स्नातक स्तर की शिक्षा और डिग्री कॉलेजों के प्रशासनिक नियंत्रण को राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग के अधीन किये जाने का प्रावधान बताया जा रहा है. इसके अलावा प्रोफेसरों की नियुक्ति, स्थानांतरण और पदस्थापन से जुड़े अधिकार भी राज्य सरकार के दायरे में आने की बात कही जा रही है.
शिक्षकों और कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित होने की आशंका
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित कानून के तहत कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों को सरकारी सेवा शर्तों के दायरे में लाये जाने की संभावना है. इससे राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने और राजनीतिक दलों की सदस्यता से जुड़े अधिकारों पर भी असर पड़ सकता है. चुनाव लड़ने की स्थिति में नौकरी से इस्तीफा देने जैसी शर्तों की चर्चा भी की जा रही है.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कानून लाने का सरकार का तर्क
प्राचार्य ने कहा कि सरकार का तर्क है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा के नियामकीय ढांचे को सरल, पारदर्शी और समसामयिक बनाने के उद्देश्य से नया कानून तैयार किया जा रहा है. इसके लिए विभिन्न राज्यों के विश्वविद्यालय अधिनियमों का अध्ययन किये जाने की बात कही गयी है.
हालांकि, डॉ विनोद कुमार सिंह ने कहा कि कानून लागू करने से पहले शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है. उन्होंने व्यापक चर्चा और विमर्श के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी करने की आवश्यकता बतायी.
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By Prabhat Khabar News Desk
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