रामलीला में सीता खोज और लंका दहन का भावपूर्ण मंचन

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रामलीला में सीता खोज और लंका दहन का भावपूर्ण मंचन

हनुमान के पराक्रम ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

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इंद्रपुरी.

चकन्हा पंचायत के बडीहा गांव में आयोजित नौ दिवसीय रामलीला कार्यक्रम के सातवें दिन मंगलवार की शाम यूपी से आये कलाकारों ने सीता खोज और लंका दहन की आकर्षक झांकी प्रस्तुत की. मंचन के दौरान दिखाया गया कि सीता खोज के क्रम में जब हनुमान जी रावण की रसोई में प्रवेश करते हैं, तो रावण की जूठी थाली में रखा दही देखकर उन्हें यह आभास हो जाता है कि रावण की मृत्यु निकट है. लंका दहन प्रसंग में हनुमान जी रावण को धर्म और नीति का उपदेश देते हैं. इसी दौरान अपने पुत्र की मृत्यु का स्मरण होते ही रावण क्रोध से भर जाता है और हनुमान की पूंछ में आग लगाने तथा बध करने का आदेश देता है. इस पर हनुमान जी मन ही मन विचार करते हैं कि जब मनुष्य पर नाश आता है, तो पहले उसका विवेक समाप्त हो जाता है. रावण की बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है. मंचन में यह संवाद दर्शाया गया कि हनुमान जी स्वयं सोच रहे थे कि लंका जलाने के लिए माचिस कहां से लाऊं, लेकिन रावण स्वयं ही उनकी पूंछ में आग लगाकर लंका दहन की व्यवस्था कर रहा है. अंत में हनुमान जी श्री राम का स्मरण कर अपनी पूंछ बढ़ाते हैं और संपूर्ण लंका को जला देते हैं. इस दृश्य पर पूरा पंडाल जय श्री राम के नारों से गूंज उठा. कार्यक्रम में 20 सूत्री सदस्य सह भाजपा नेता आनंद कुमार पांडेय, श्री रामायण प्रचारक मंडल मिर्जापुर के संचालक राजेश चौरसिया, अध्यक्ष उपेंद्र कुमार सहित कलाकार प्रमोद कुमार, नीलू कुमारी, भावेश पांडेय, अक्षय पांडेय, शशि भूषण पांडेय, टुनटुन दुबे, मनु सिंह समेत सैकड़ों ग्रामीण दर्शक उपस्थित रहे.

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