मांझी. सरकार की महत्वाकांक्षी सामुदायिक शौचालय योजना की बदहाली को लेकर मांझी ब्लॉक सुखिंयो में है. स्वच्छ भारत मिशन के तहत गरीबों, राहगीरों और आगंतुकों की सुविधा के लिए हर पंचायत में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया गया था, लेकिन रखरखाव की अनदेखी ने इस योजना की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है. हालत यह है कि अधिकांश शाचालय उपयोग के लायक नहीं बचे हैं और लोग उनमें जाना तक पसंद नहीं कर रहे. प्रखंड की कुल 25 पंचायतों में सामुदायिक शौचालयों का निर्मांण कराया गया था. किसी किसी पंचायत में एक एक सामुदायिक शौचालय बनाया गया है.अब प्रखंड से दो पंचायत कट कर एक नगर पंचायत बन गया है.नगर पंचायत में कोई सामुदायिक शौचालय नही है. एक है तो बेकार पड़ा हुआ है. योजना का मुख्य उद्देश्य खुले में शौच की प्रवृत्ति पर रोक लगाना और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को बढावा देना था.
कहीं दरवाजे टूटे, तो किसी को बना दिया गोदाम
स्थानीय लोगों के अनुसार कई पंचायतों में बने शौचालयों के दरवाजे टूट चुके हैं, कहीं पानी की सुविधा नहीं है तो कहीं गंदगी और दुर्गध का आलम है.कई पंचायतों के कुछ स्थानों पर शौचालय पूरी तरह बंद पड़े हैं. लेकिन कई जगह इन्हें गोदाम या निजी उपयोग बदल दिया गया है. इससे योजना का मुल उदेश्य ही खत्म होता नजर आ रहा हैं. पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा जिन लोगों को शौचालयों की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी, उन्होंने या तो जिम्मेदारी निभायी ही नहीं या फिर शौचालयों को अपनी निजी ””””संपत्ति की तरह इस्तेमाल करने लगे. नियमित साफ-सफाई पानी और मरम्मत की स्थायी व्यवस्था नहीं की गयी.आम लोगों और राहगीरों को हो रही परेशानी
बाजार, बस स्टैंड, पंचायत भवन और अन्य सार्वजनिक स्थलों के पास बने शौचालयों के बंद रहने से खासकर महिलाओं, बुजुर्गं और बाहर से आने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि यदि शौचालयों की समुचित देखरेख होती, तो यह योजना आज आम जनता के लिए बेहद उपयोगी साबित होती. मांझी नगर पंचायत की अध्यक्ष विजया देवी ने बताया कि नगर पंचायत क्षेत्र में जो सामुदायिक शौचालय हैं. उनकी नियमित रूप से साफ सफाई करायी जाती है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

