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चिरांद के पुरातात्विक महत्व पर जेपीयू में आज होगी संगोष्ठी

विश्व के दुर्लभ पुरातात्विक स्थलों में शामिल सारण के चिरांद के विविध पक्षों पर अकादमिक गहन विमर्श की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

छपरा. विश्व के दुर्लभ पुरातात्विक स्थलों में शामिल सारण के चिरांद के विविध पक्षों पर अकादमिक गहन विमर्श की आवश्यकता महसूस की जा रही है. इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जयप्रकाश विश्वविद्यालय ने विभिन्न संस्थानों के साथ मिलकर 17 जनवरी को एक राज्यस्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया है. संगोष्ठी का विषय, चिरांद पुरातात्त्विक साक्ष्य, लोकस्मृति और सभ्यतागत निरंतरता का विमर्श रखा गया है. विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग, इंतिहास संकलन समिति, प्रज्ञा प्रवाह की इकाई चिति एवं चिरांद विकास परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी में देश के प्रसिद्ध पुरातत्वविद्, संस्कृत साहित्य विशेषज्ञ एवं इतिहास कार शामिल होंगे. संगोष्ठी के संरक्षक जयप्रकाश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो परमेंद्र कुमार बाजपेई, सह संरक्षक प्रो अजीत कुमार, अध्यक्ष इतिहास संकलन समिति, उत्तर बिहार बनाये गये हैं. वहीं संगोष्ठी में प्रज्ञा प्रवाह के क्षेत्रीय संयोजक देवदत्त प्रसाद, चिति के अध्यक्ष प्रो लक्ष्मी नारायण, प्रो कृष्ण कन्हैया, अध्यक्ष, इतिहास विभाग, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा संगोष्ठी के वक्ता हैं. संगोष्ठी के संयोजक डॉ रितेश्वर तिवारी स्नातकोत्तर इतिहास विभाग हैं.

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