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मुकुल रॉय को विधायक के रूप में अयोग्य घोषित करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक

पश्चिम बंगाल चुनाव 2021 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने मुकुल रॉय को दलबदल मामले में सुप्रीम राहत मिली है. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने बंगाल के दिग्गज राजनेता को विधानसभा सदस्य के रूप में अयोग्य ठहराने वाले हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है. कोर्ट में मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु के वकील और भाजपा नेताओं के वकीलों ने क्या-क्या दलीलें दीं, यहां पढ़ें.

पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें उन्हें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के बाद पश्चिम बंगाल विधानसभा के विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था.

दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित हुए थे मुकुल रॉय

हाईकोर्ट ने 13 नवंबर, 2025 को दलबदल विरोधी कानून के तहत मुकुल रॉय को अयोग्य घोषित किया था. वह 2021 के बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा के टिकट पर निर्वाचित होने के बाद सत्तारूढ़ टीएमसी में शामिल हो गये थे.

चीफ जस्टिस की पीठ ने जारी किया अंतरिम आदेश

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने मुकुल रॉय के बेटे सुभ्रांशु रॉय की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया. याचिका में कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गयी थी. पीठ ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के फैसले का क्रियान्वयन स्थगित रखा जाये.

शुभ्रांशु रॉय की वकील ने कोर्ट में दी ये दलील

शुभ्रांशु रॉय की वकील प्रीतिका द्विवेदी ने कहा कि वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय बीमार हैं. वकील ने दावा किया कि हाईकोर्ट ने अपनी सीमित न्यायिक समीक्षा शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक विधायक को अयोग्य घोषित करने का आदेश देकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है.

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हाईकोर्ट ने बंगाल विधानसभा के स्पीकर के फैसले को पलटा था

उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने अयोग्यता की अर्जियों को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि मुकुल रॉय के कथित दलबदल को दर्शाने के लिए प्रस्तुत सोशल मीडिया पोस्ट साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत प्रमाणित नहीं थे. हाईकोर्ट ने विधानसभा के स्पीकर के फैसले को पलटते हुए कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के अंतर्गत कार्यवाही में धारा 65बी का सख्ती से पालन करना जरूरी नहीं है.

शुभेंदु अधिकारी और अंबिका रॉय के वकील ने शुभ्रांशु की याचिका का किया विरोध

उधर, भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी और अंबिका रॉय के वकील गौरव अग्रवाल ने कहा कि मुकुल रॉय ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था. बाद में वह विपक्षी पार्टी में शामिल हो गये. यह दलबदल के समान है. उन्होंने मुकुल रॉय के बेटे द्वारा याचिका दायर करने पर आपत्ति जतायी.

चीफ जस्टिस ने भाजपा नेताओं की दलील पर कही ये बात

शुभेंदु अधिकारी और अंबिका रॉय के वकील की आपत्ति पर चीफ जस्टिस की अध्यक्षतावाली पीठ ने कहा कि अगर वह गंभीर स्थिति में हैं, तो परिवार का कोई सदस्य याचिका क्यों नहीं दायर कर सकता? उन्हें भी प्रतिवादी के रूप में जोड़ा गया है. सीजेआई ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की प्रामाणिकता साबित करनी होगी. उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार वीडियो का भी हवाला दिया.

पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल कुछ ही महीनों में समाप्त होने वाला है. वह विधायक पद के लिए दोबारा चुनाव लड़ते हैं, तो आप आवेदन दें, हम देखेंगे कि क्या करना है.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ

हाईकोर्ट ने किया था संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल

दलबदल विरोधी कानून का सहारा लेते हुए हाईकोर्ट ने पहली बार दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी निर्वाचित सदस्य को अयोग्य घोषित करने के लिए अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल किया था.

कृष्णानगर उत्तर विधानसभा सीट से जीते थे मुकुल रॉय

मुकुल रॉय मई 2021 में कृष्णानगर उत्तर विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर विधानसभा के लिए चुने गये थे. उसी वर्ष जून में विधायक रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी की उपस्थिति में वह सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गये थे.

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Mithilesh Jha
Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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