मां चली गई, गांव ने मुंह मोड़ा… बेटियों ने दिया कंधा, अब श्राद्ध के लिए समाज से लगा रहीं इंसानियत की गुहार
Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 30 Jan 2026 10:36 PM
मां को कंधा देतीं बेटियां
Bihar News: छपरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें देखा जा रहा है कि दो बेटियों अपनी मां को कंधा दे रही हैं. एक बेटी मुखाग्नि भी दी. अब श्राद्ध के लिए दोनों समाज से मदद की गुहार लगा रही हैं.
Bihar News: यह सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि समाज के सामने खड़ा एक कड़वा और असहज सवाल है. क्या गरीबी इंसान को इतना अकेला कर देती है कि उसकी मौत पर भी कोई साथ देने नहीं आता? छपरा जिले के मढ़ौरा प्रखंड के जवईनियां गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें देखा जा रहा है कि दो बेटियां अपनी मां की अर्थी को कंधा दे रही हैं. यह घटना सामाजिक संवेदनहीनता की उसी सच्चाई को उजागर करती है, जिस पर अक्सर पर्दा डाल दिया जाता है.
मां की मौत ने दोनों बेटियों को तोड़ दिया
20 जनवरी को जवईनियां गांव निवासी स्वर्गीय रविन्द्र सिंह की पत्नी बबीता देवी का पटना में इलाज के दौरान निधन हो गया. इससे करीब डेढ़ साल पहले परिवार के मुखिया रविन्द्र सिंह की भी मौत हो चुकी थी. पिता के जाने के बाद परिवार पहले ही आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहा था. किसी तरह उस समय क्रिया-कर्म की रस्में निभा दी गईं. लेकिन मां की मौत ने दोनों बेटियों को पूरी तरह तोड़ दिया.
न कोई रिश्तेदार पहुंचा, न ही गांव के लोग
मां के निधन के बाद न कोई रिश्तेदार पहुंचा, न ही गांव के लोग आगे आए. शव घंटों घर के दरवाजे पर पड़ा रहा. कंधा देने वाला कोई नहीं था. मजबूर होकर दो बेटियों ने ही मां की अर्थी को कंधा दिया. वही बेटियां मुखाग्नि भी दीं. बेटों का फर्ज निभाते हुए उन्होंने मां को अंतिम विदाई दी.
दर-दर भटकती रहीं दोनों बहनें
इस दौरान गांव की गलियों में दोनों बहनें दर-दर भटकती रहीं. हाथ जोड़कर लोगों से मदद की गुहार लगाती रहीं. लेकिन संवेदनाएं जैसे पत्थर बन चुकी थीं. काफी देर बाद दो-तीन लोग किसी तरह पहुंचे, तब जाकर चार कंधों पर अर्थी उठ सकी और अंतिम संस्कार हो पाया. यह दृश्य गांव और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी पर गहरा सवाल छोड़ गया.
मुखाग्नि देने वाली बेटी ने क्या बताया?
मां को मुखाग्नि देने वाली बेटी मौसम सिंह ने बताया इलाज में जो थोड़े-बहुत पैसे थे, सब खत्म हो चुके हैं. अब रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है. सबसे बड़ी चिंता मां के श्राद्ध संस्कार को लेकर है. न पैसे हैं, न ही कोई सहयोग देने वाला.
परंपरागत सोच आज भी बेटियों द्वारा श्राद्ध और क्रिया-कर्म को पूरी तरह स्वीकार नहीं करती. ऐसे में ये दोनों बहनें परंपरा और मजबूरी के बीच फंसी हैं. उनका समाज और रिश्तेदारों से सिर्फ एक ही आग्रह है- कोई आगे आए, मां के श्राद्ध में सहयोग करे, ताकि उसकी आत्मा को शांति मिल सके.
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By Abhinandan Pandey
अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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