पूर्वोत्तर रेलवे का टिकट जांच अभियान बना घाटे का सौदा

Published at :16 May 2016 6:21 AM (IST)
विज्ञापन
पूर्वोत्तर रेलवे का टिकट जांच अभियान बना घाटे का सौदा

टीटीइ, टीसी की है कमी, टिकट जांच का कार्य भगवान भरोसे आमदनी अठनी, खर्चा रुपया. यह हाल है पूर्वोत्तर रेलवे के टिकट जांच अभियान का. रेलवे के द्वारा टिकट जांच के लिए गठित टीम पर पांच से सात लाख रुपये खर्च होता है और आमदनी 70 से 80 हजार रुपये की होती है. यात्री प्रधान […]

विज्ञापन

टीटीइ, टीसी की है कमी, टिकट जांच का कार्य भगवान भरोसे

आमदनी अठनी, खर्चा रुपया. यह हाल है पूर्वोत्तर रेलवे के टिकट जांच अभियान का. रेलवे के द्वारा टिकट जांच के लिए गठित टीम पर पांच से सात लाख रुपये खर्च होता है और आमदनी 70 से 80 हजार रुपये की होती है. यात्री प्रधान पूर्वोत्तर रेलवे में टीटीइ, टीसी का घोर अभाव है. इस वजह से ट्रेनों में टिकट जांच व स्टेशनों पर टिकट जांच का कार्य भगवान भरोसे चल रहा है. टिकट जांच परीक्षकों, टिकट जांच निरीक्षकों तथा टिकट संग्रहकों की कमी के कारण पूरे मंडल के सभी टिकट संग्राहकों, टिकट निरीक्षकों और टिकट परीक्षकों को एक स्थान पर बुलाया जाता है. इस वजह से उनके भत्ता आदि पर अतिरिक्त राशि खर्च होती है.
छपरा (सारण) : आमदनी अठनी, खर्चा रुपया. यह हाल है पूर्वोत्तर रेलवे के टिकट जांच अभियान का. रेलवे के द्वारा टिकट जांच के लिए गठित टीम पर पांच से सात लाख रुपये खर्च होता है और आमदनी 70 से 80 हजार रुपये की होती है. यात्री प्रधान पूर्वोत्तर रेलवे में टीटीइ, टीसी का घोर अभाव है. इस वजह से ट्रेनों में टिकट जांच व स्टेशनों पर टिकट जांच का कार्य भगवान भरोसे चल रहा है. टिकट जांच परीक्षकों, टिकट जांच निरीक्षकों तथा टिकट संग्रहकों की कमी के कारण पूरे मंडल के सभी टिकट संग्राहकों, टिकट निरीक्षकों और टिकट परीक्षकों को एक स्थान पर बुलाया जाता है.
इस वजह से उनके भत्ता आदि पर अतिरिक्त राशि खर्च होती है. परिणाम स्वरूप यात्री प्रधान पूर्वोत्तर रेलवे में राजस्व की वृद्धि नहीं हो रही है. आलम यह है कि राजस्व बढ़ाने के चक्कर में रेलवे के सामने दुरुप्रयोग हो रहा है. पांच से सात लाख रुपये खर्च कर 70-80 हजार रुपये राजस्व संग्रह करने वाले अधिकारी अपनी पीठ अपने थपथपा रहे हैं. यही वजह है कि देश स्तर पर पूर्वोतर रेलवे राजस्व वसूली में सबसे अंतिम पायदान पर पहुंच गया है. राजस्व वसूली में फिसड्डी रहने के कारण छपरा जंकशन समेत अन्य स्टेशनों का अपेक्षित विकास नहीं हो रहा है.
टीटीइ-टीसी की है कमी : पूर्वोत्तर रेलवे के छपरा जंकशन पर टिकट संग्राहकों, टिकट जांच परीक्षकों, टिकट निरीक्षकों की घोर कमी है. इस वजह से छपरा सेक्शन से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की जांच समुचित ढंग से नहीं हो रही है. आलम यह है कि छपरा जंकशन पर ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों के टिकट की जांच नहीं की जा रही है. यहां मात्र छह टीसी हैं. गेट पर टिकट जांच के अलावा उनके जिम्मे पूछताछ काउंटर है. साथ ही बेडरौल, ट्रेनों में आरक्षण चार्ट लगाना अलग है. टीटीइ की कमी के कारण कई ट्रेनों में एक या दो टीटीइ को ही ड्यूटी पर लगाया जाता है. इस बात का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि छपरा से गोरखपुर और छपरा से वाराणसी तक एक दर्जन से अधिक ट्रेनों में पूर्व मध्य रेलवे के टीटीइ को लगाया जाता है.
जांच अभियान पर खर्च होने वाली राशि के मुकाबले 20-25 फीसदी होती है राजस्व की वसूली
इन ट्रेनों में नहीं रहते टीटीइ
छपरा-पाटलिपुत्रा पैसेंजर
छपरा-भटनी पैसेंजर
छपरा-सीवान पैसेंजर
छपरा-मडुआडीह पैसेंजर
फुलवरिया-छपरा-हाजीपुर पैसेंजर
थावे-छपरा, हाजीपुर पैसेंजर
सीवान-छपरा, समस्तीपुर पैसेंजर
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन