चिंता. डकैती व चोरी की बड़ी घटनाओं में संलिप्तता उजागर होने के बाद बढ़ी बेचैनी

Published at :16 Mar 2016 4:07 AM (IST)
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चिंता. डकैती व चोरी की बड़ी घटनाओं में संलिप्तता उजागर होने के बाद बढ़ी बेचैनी

पुलिस के लिए चुनौती बन रहे बांग्लादेशी पुलिस-प्रशासन के लिए बांग्लादेशी चुनौती बनते जा रहे हैं. डकैती व चोरी की बड़ी घटनाओं में बांग्लादेशियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद पुलिस प्रशासन की बेचैनी व परेशानी बढ़ गयी है. अब तक चोरी व डकैती की कई घटनाओं में संलिप्त बांग्लादेशी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा […]

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पुलिस के लिए चुनौती बन रहे बांग्लादेशी

पुलिस-प्रशासन के लिए बांग्लादेशी चुनौती बनते जा रहे हैं. डकैती व चोरी की बड़ी घटनाओं में बांग्लादेशियों की संलिप्तता उजागर होने के बाद पुलिस प्रशासन की बेचैनी व परेशानी बढ़ गयी है. अब तक चोरी व डकैती की कई घटनाओं में संलिप्त बांग्लादेशी गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं. अब मकानमालिकों पर भी लगाम कसने की तैयारी चल रही है. सोमवार को सीवान में पांच बांग्लादेशियों को चोरी के सामान व हथियार के साथ पकड़ा गया है.
छपरा (सारण) : मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कई स्थानों पर हुई चोरी की घटनाओं में बांग्लादेशियों की संलिप्ता उजागर हो चुकी है. बांग्लादेशी बड़े पैमाने पर जिले के ग्रामीण इलाकों में रह रहे हैं. दिखावे के लिए ये दिन में फेरी लगा कर सामान बेचने का काम करते हैं और रात में डकैती तथा चोरी की घटनाओं को अंजाम देते हैं. मजे की बात यह है कि किरायेदार के रूप में रह-रहे बांग्लादेशियों ने नागरिकता भी हासिल कर ली है,जो प्रशासन के लिए सबसे गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है.
फेरी के दौरान करते हैं रेकी
फेरी लगा कर सामन बेचने के दौरान बांग्लादेशी अपराधी घरों की रेकी करते हैं और रात में चोरी -डकैती की घटनाओं को अंजाम देते हैं. हाल ही में सीवान जिले के कई स्थानों पर हुई डकैती की घटनाओं में संलिप्त बांग्लादेशियों ने अपना ठिकाना छपरा को बना रखा था. शहर के नगर थाना क्षेत्र के बिचला तेलपा तकिया मुहल्ले में कई बांग्लादेशी किराये के मकान में रहते थे. छपरा शहर में रहने वाले बांग्लादेशियों को मकान मालिक ने संरक्षण दे रखा था. इसके पहले मुफस्सिल थाना क्षेत्र में हुई चोरी की घटना में संलिप्त बांग्लादेशी अपराधी सीवान शहर के मखदूम सराय से पकड़े गये थे.
सोनपापड़ी देकर लेते
हैं बाल
बांग्लादेशी मुख्य रूप से साइकिल पर चलते हैं और सोनपापड़ी देकर बाल लेते हैं. महिलाओं द्वारा बाल संवारते समय टूटे हुए बाल को जमा कर बच्चे रखते हैं और बांग्लादेशी साइकिल पर सवार होकर डुगडुगी (डमरू) बजा कर बच्चों को आकर्षित करते हैं. बच्चे भी घर में एकत्र कर रखे गये बाल को लेकर सोनपापड़ी के लिए दौड़ पड़ते हैं. साइिकल से फेरी लगाने वाले बांग्लादेशी दर्जनों की संख्या में एक साथ रहते हैं और प्रतिदिन सुबह में ही अपने ठिकानों से निकल जाते हैं और देर शाम लौटते हैं और फिर रात में चोरी- डकैती करने के लिए निकल जाते हैं. इस वजह से आस-पास के लोगों को उनकी गतिविधयों के बारे में काई जानकारी नहीं रहती है.
इन इलाकों में रहते हैं बांग्लादेशी
जिले के रसुलपुर, ताजपुर, दाउदपुर, कोपा, छपरा शहर के तेलपा, डोरीगंज, गड़खा, तरैया, अमनौर, मकेर, परसा, पानापुर, समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी किराये के मकानों में रह रहे हैं. लेकिन मकान मालिकों के द्वारा किरायेदारों का सत्यापन नहीं कराया गया है. पुलिस प्रशासन के द्वारा सभी मकान मालिकों को किरायेदारों का चरित्र सत्यापन कराने का निर्देश दिया गया है. अधिक किराये के लालच में मकान मालिक किराये पर रख रहे हैं. सूचना है कि बांग्लादेशी अपराधियों को मकान मालिक संरक्षण भी दे रहे हैं और चोरी-डकैती के आभूषण को खपाने का काम भी कर रहे हैं.
परेशानी. दर्जनों गांवों के लोग अंधेरे में रहने को विवश
बिजली के बिना सब सूना अंधेरे में पड़ रहा है जीना
पिछले कई दिनों से दिघवारा सब स्टेशन से दो फीडरों में विद्युत की आपूर्ति में आयी कमी से लगभग 14 हजार उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ी है. शीतलपुर पावर ग्रिड को रात्रि में 25 मेगावाट की जगह आठ मेगावाट व दिघवारा सब स्टेशन को छह मेगावाट की जगह दो मेगावाट की हो रही है आपूर्ति, जिस कारण गहराया है विद्युत संकट.
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